आ तो गई वो, लेकिन अब तांडव पर उतारू है

आ तो गयी वो आखिर. स्वागत तो हमने भी किया. तस्वीरें देख ही चुकें है आप. लेकिन यह उम्मीद नहीं थी उससे, कि हमारे भाई-बन्धुओं की ओर आंख उठा कर भी ना देखे. इतनी भी क्या अकड़ रखनी भई! आखिर कितना तरसाया है उसने. अब भी रहम ना आया तो क्या फायदा आने का! (दुर्ग बायपास पर बने पुल से नदी का नज़ारा) हमसे भी जब देखा ना गया तो ज़रा सी गुजारिश कर दी कि इतनी बेरुखी ठीक नहीं. बस फिर क्या था हो गया शुरू तांडव उसका. (मेरे…

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