हैदराबाद पहुँचने की दास्ताँ, कार से बैंगलोर जाते

हैदराबाद

एशियन हाईवे पर स्मार्ट कार चलाते, भिलाई से बैंगलोर जाने के क्रम में नागपुर होते हुए हैदराबाद तक की यात्रा का रोचक संस्मरण

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भारतीय रेल की लेटलतीफ़ी से मुझे मिला एक खजाना!!

नागपुर में 9 जनवरी की शाम दलसिंगार यादव जी ने जब मुझे स्टेशन के बाहर छोड़ा तो अंदर जा कर पता चला कि ट्रेन आएगी डेढ़ घंटा देरी से, फिर देर बढ़ कर हो गई तीन घंटे! अब क्या किया जाए? धीरे धीरे टहलता हुआ स्टेशन के सामने ओवरब्रिज़ के नीचे बने खान-पान केन्द्रों में दो आलू के पराठे, फरमाईशी नीबू चाय के साथ उदरस्थ कर आया और बढ़ चला प्लेटफार्म 6-7 की ओर। अंधेरा छाने लगा था। निगाह पड़ी सामने ही एक निर्णामाधीन संरचना पर। ऊँचाई बहुत थी। खड़े…

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पिछले दिनों हुई मुलाकात कुछ ब्लॉगरों से

मित्रों ने बहुत शिकायत की कि कई दिनो से कुछ लिखा नहीं! दरअसल मंशा यह भी थी कि अब अपने ब्लॉगों को www.BSPABLA.com पर ले जाने के बाद ही कुछ लिखूँगा, किन्तु 11 वेबसाईट्स की योजना में इतना रम गया कि यह इरादा टलते ही जा रहा। आज कुछ मूड़ बदल गया तो सोचा पिछले दिनों हुई कुछ ब्लॉगरों से मुलाकातों की बात कर ली जाए। पारिवारिक हादसों के चलते पुणे से घर आई बिटिया को वापस पुणे जाना था। लगातार कई दिनो तक भिलाई-पुणे की रेलों में सीटों की…

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धधकती आग में घिरी मारूति वैन से कूद कर जान बचाई हमने

चलती मारूति वैन में लगी आग के हादसे में अपनी जान बचाने वाला लोमहर्षक संस्मरण

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‘पाकिस्तान’ व उत्तरप्रदेश की सैर, सट्टीपिकेट का झमेला, एक बे-सहारा, नालायक, लाचार और कुछ कहने की कोशिश करती ‘वो’

नागपुर के ‘मोती महल’ में स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले, हम लौट रहे थे तो रात के समय राह की पहचान न होने के कारण रास्ता भटक गए। आखिर एक सटीक रास्ता मिला तो हम पहुँच पाए अपने ठिकाने। भरपेट भोजन और किसी तरह की चिंता न होने के कारण नींद ने झट आ घेरा। सुबह आँख खुली तो दिन का उजाला हो चुका था। आलस के मारे, आराम से स्नान किया गया। देर इतनी हो चुकी थी कि गुरू-घर में शीश नवाने के बाद, नाश्ते की तलाश में भटकना…

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‘आंटी’ द्वारा रात बिताने का आग्रह, टाँग का फ्रेंच किस, उदास सिपाही और उफ़-उफ़ करती महिला

अपनी समझ से सारी तैयारी कर भिलाई से, 27 जून को जब हम अपनी मारूति वैन में मुम्बई की ओर रवाना हुए तो मौसम सुहाना ही था। बारिश के आसार पुन: दिख रहे थे। जुड़वां शहर, दुर्ग-भिलाई की सीमा, शिवनाथ नदी छोड़ ही चुके थे कि बिटिया को एकाएक शून्य की ओर ताकते पाया। एक गहरी सी सांस लेते हुए बातों का सिलसिला प्रारंभ करना चाहा तो जैसे वह नींद से जगी हो। उसका चेहरा मेरी ओर हुआ तो कहीं ऐसा लगा कि उसकी आंखें गीली हैं। आखिर हम उस…

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सड़क मार्ग से महाराष्ट्र यात्रा की तैयारी, नोकिया पुराण और ‘उसका’ दौड़ कर सड़क पार कर जाना

भिलाई से सड़क मार्ग द्वारा महाराष्ट्र, मुंम्बई की यात्रा की तैयारी का संस्मरण

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निकल पड़ा हूँ यात्रा पर, कहीं आपके शहर में तो नहीं पहुँच गया!?

आज यह लगभग एक तरह की माईक्रो-पोस्ट ही होगी। पिछले कुछ सप्ताहों से, सड़क मार्ग द्वारा, उत्तर-पश्चिम भारत भ्रमण की योजना बन रही थी। जिसमें जबलपुर – इलाहाबाद – लखनऊ – नैनीताल – दिल्ली – अमृतसर – जयपुर – अहमदाबाद – सूरत – मुम्बई – पूणे – नागपुर का मार्ग शामिल था। तैयारी थी 18 जून को प्रारंभ करने की। संबंधित शहरों के कुछ ब्लॉगर साथियों को सूचना भी थी। ऐन वक्त पर एक अनचाहा चिकित्सीय कार्य आ पड़ा। उससे पहले सलाहें मिल चुकी थीं कि बरसात के मौसम में…

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