… बहुत हो गई ब्लॉगिंग, अब चला जाए ….

पाबला जी …कुत्तों की तरह केवल भौकना जानते हैं/ पाबला और उनके गैंग कि दादागिरि इस पुरे ब्लाग जगत पर है/ पावला … और … बेबकूफो की जमात अपने आप को हिंदुस्तान का प्रधान मंत्री समझती है/ पावला जी …कौड़ी काम के भी नहीं हैं/ किसी का लिखा अख़बार से उठाकर छाप देना भी कोई ब्लोगिंग है? इन जैसी बातों के अलावा हिन्दी ब्लॉग जगत से अब तक शुभचिंतकों का बेपनाह स्नेह व यथोचित आदर मिलता चला आया है। इन सबके बीच मुझे याद आता है कि 18 सितम्बर 2005…

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शाहरूख खान बनेंगे, पाबला परिवार के पड़ोसी !?

हमारे सुपुत्र कल शाम रवाना हुए थे भोपाल के लिए। डोंगरगढ़ के पास ट्रेन का इंजिन खराब हो गया। ज़नाब को देर हो गई दो घंटे की। सुबह पहुँचने की सूचना दी तो चहकने भी लगे कि शाहरूख खान मेरे घर के पास रहने का जुगाड़ कर रहे!मैं भी चकराया कि मज़ाक में भी सच बोलने वाले को क्या हो गया? भोपाल की कौन सी हवा लग रही उसे? लेकिन जब बात खुली तो हम दोनों ही ठहाका मारने की होड़ में लग गए। हुया यह कि उसने किसी अखबार…

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