दोपहर के बाद आनंद दे गई वो …

अजय कुमार झा आजकल मुझसे खूब शिकायत करते हैं कि मैं अपने ब्लॉग्स पर कुछ नहीं लिखता। ब्लॉग्स इन मीडिया, ब्लॉग गर्व, ब्लॉग मंडली, ब्लॉग मंच संबंधित वस्तुस्थिति बताने पर भी वह अपना स्नेह भरा आग्रह बनाए रखे हैं। आज मैंने ठान लिया था कि हालिया दिल्ली यात्रा संस्मरण की शुरूआत की जाए लेकिन ऑफिस से लौटते हुए ही आंधी तूफ़ान ने ऐसा तांडव मचाया कि इलाके की बिजली ही गुल हो गई गई। यूपीएस की बिजली बचाए रखी कि बाक़ी कम्प्यूटरों के काम आ जाए। शाम होने के पहले…

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आ तो गई वो, लेकिन अब तांडव पर उतारू है

आ तो गयी वो आखिर. स्वागत तो हमने भी किया. तस्वीरें देख ही चुकें है आप. लेकिन यह उम्मीद नहीं थी उससे, कि हमारे भाई-बन्धुओं की ओर आंख उठा कर भी ना देखे. इतनी भी क्या अकड़ रखनी भई! आखिर कितना तरसाया है उसने. अब भी रहम ना आया तो क्या फायदा आने का! (दुर्ग बायपास पर बने पुल से नदी का नज़ारा) हमसे भी जब देखा ना गया तो ज़रा सी गुजारिश कर दी कि इतनी बेरुखी ठीक नहीं. बस फिर क्या था हो गया शुरू तांडव उसका. (मेरे…

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रूठी हुई थी… आखिर आ ही गई आज …

आज कुछ लिखने का मन नहीं है। लगता है कि सिर्फ देखता ही रहूँ। आखिर वो रूठने के बाद आ ही गई। कहाँ कहाँ नहीं तलाशा उसे … आँखें पथराने लगी थीं … उम्मीदें टूटने लगीं थीं … आज वो आई तो हम भी झूम उठे … वो गीत है ना? ‘आने से उसके, आये बहार … जाने से उसके, जाये बहार‘ बस उसी की बात कर रहा। आप भी देखिए और बताईये क्या मैं झूठ बोल रहा!? दो दिन पहले, घर के पास वाले पेड़ पर पंछी फिर घुमड़े…

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