रूठी हुई थी… आखिर आ ही गई आज …

आज कुछ लिखने का मन नहीं है। लगता है कि सिर्फ देखता ही रहूँ। आखिर वो रूठने के बाद आ ही गई। कहाँ कहाँ नहीं तलाशा उसे … आँखें पथराने लगी थीं … उम्मीदें टूटने लगीं थीं … आज वो आई तो हम भी झूम उठे … वो गीत है ना? ‘आने से उसके, आये बहार … जाने से उसके, जाये बहार‘ बस उसी की बात कर रहा। आप भी देखिए और बताईये क्या मैं झूठ बोल रहा!? दो दिन पहले, घर के पास वाले पेड़ पर पंछी फिर घुमड़े…

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