आ देखें ज़रा किसमें कितना है दम: ब्लैकमेल- भाग 2

दर्शन शास्त्र की एक उक्ति बहुत प्रचलित है कि जो सोचा जाए वह कभी नहीं होता! बस इसी तरह मेरे साथ भी हो गया। आज आलेख इस विषय पर आना था कि आखिर गंभीर, स्थापित ब्लॉगर मुफ्त का गूगल मंच छोड़कर, हजारों रूपए खर्च कर अपनी खुद की वेबसाईट पर क्यों चले जाते हैं? लेकिन पिछले एक आलेख, महिला ब्लॉगर ने ब्लैकमेल किए जाने के बाद ब्लॉगिंग छोड़ी के पश्चात कई जिज्ञासुयों ने संपर्क किया कि अगर कंप्यूटर को फॉर्मेट करा दिया जाए तो खतरा पूरी तरह टल जाएगा ना?…

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महिला ब्लॉगर ने ब्लैकमेल किए जाने के बाद ब्लॉगिंग छोड़ी

पिछले वर्ष की गर्मियों की एक रात जब टहल कर लौटा तो ई-मेल में एक महिला ब्लॉगर का संदेश दिखा कि वह मुझसे कुछ व्यक्तिगत बातचीत करना चाहती है लेकिन फोन पर! मैंने पहले कभी उनसे बात नहीं की थी और अब तक ईमेल, चैट द्वारा ही सीमित औपचारिक संदेशों का आदान-प्रदान ही होता रहा था। ताज़ा मिले संदेश की भाषा देख मैंने तुरंत अपना मोबाईल नंबर ई-मेल पर भेजा। ऐसा लगा जैसे वह मेरे उत्तर की ही प्रतीक्षा कर रही थीं। 5 मिनट में ही उनकी कॉल आ गई।…

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