भाषा ऎसी चुंबकीय लिखें कि विज्ञापन दिखें

ऑनलाइन विज्ञापन कैसे खींचे जाएँ? इसके लिए भाषा नाम के की-वर्ड का उपयोग करते हुए लिखा गया रोचक लेख

Read More

जनमदिन के मौके पर हुई दो ब्लॉगरों से पहली मुलाक़ात

इस बार जनमदिन पर पोस्ट लिखना टलते चला आ रहा था क्योंकि सभी वेबसाईट्स के सर्वर बदले जा रहे थे और बिंदास तरीके से लिखने का समय ही नहीं मिला। सर्वर संबंधित काम तो खतम हो गया लेकिन कई छोटी छोटी बातें अभी भी तनाव बढ़ा रहीं। इस बार मन कुछ उदास सा था जनमदिन के मौके पर, जैसा कि मैंने बताया था पिछली बार। इस उदासी को तोड़ा शुभचिंतकों ने, जब 20 सितंबर से ही उनकी बधाईयाँ एसएमएस व मोबाईल द्वारा मिलनी शुरू हुईं। ठीक आधी रात को सुपुत्र…

Read More

ब्लॉगस्पॉट पर हिंदी लिखने की सुविधा समाप्त!?

आम तौर पर जब सुबह की चहलकदमी के लिए निकलता हूँ तो अपने सभी मोबाइल, कम्प्यूटर टेबल पर ही छोड़ जाता हूँ। आज सुबह जब मैक के साथ टहल कर लौटा और कुछ समय बाद कार्यालयीन कार्य के लिए मोबाइल उठाते ही नज़र पड़ी मिस्ड कॉल की संख्या 2 बताती सूचना पर, दूसरा मोबाइल भी सूचना दे रहा था कि 1 मिस्ड कॉल वहाँ भी है। वह कॉल थीं अरविंद मिश्रा जी की। मैंने तुरंत ही वापस उन्हें कॉल किया। क्योंकि इतनी सुबह उनके द्वारा याद किया जाना मतलब कुछ…

Read More

ब्लॉगिंग में गर्व करने लायक कुछ है भी?

हिंदी ब्लॉगिंग में पांच वर्ष का समय बिताने के दौरान मेरा सामना ऐसे कई बयानों से हुआ कि यहाँ कुछ नहीं रखा हुआ, ऐरे गैरे आते हैं गालीगलौज बकवास कर चले जाते हैं, अपनी ढपली अपना राग है सबका, भाषाकीसमझनहीं, बात करने का सलीकानहीं, कोई किसी को लतियारहाहै कोई किसी धार्मिकआस्थाकोचोट पहुंचा रहा, कोई निंदारस में डूबा हुआ है, लोग कुंठाएंनिकालरहे हैं, कुत्ते–बिल्लीसाझगड़ा करते हैं… वगैरह वगैरह! बात किसी हद तक सही दिखती भी थी क्योंकि लोकप्रिय एग्रीगेटर पर अक्सर ही इसी तरह के ब्लॉग चमकते दमकते दिखते थे। हद…

Read More

एक क्लिक ने सारा ब्लॉग मिटा दिया

मेरे एक मित्र पिछले दिनों ब्लॉग से वेबसाईट पर स्थानांतरित हुए। नई तकनीक थी। जिद कर बैठे कि इसका सम्पूर्ण संचालन मुझे सौंप दें, कुछ प्रयोग करने हैं। कुछ गड़बड़ हुई तो संभाल लेना। अब मुझे करना क्या था, सब कुछ तो उन्हीं का है। दो-तीन दिन तो ठीक बीते लेकिन कुछ दिन बाद देखता हूँ पूरी वेबसाईट गायब, बस कोरा कागज़ बच गया। अब उसके बाद जो हुआ जो हुआ। लेकिन ठीक इसी समय लोकप्रिय फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। अमिताभ बच्चन की…

Read More

ब्लॉगरो सावधान! गूगल ने असली लेखन को बढ़ावा देने अपने कोड बदलने शुरू किए

निश्चित तौर पर यह खबर उनके लिए बेहद निराशा ले कर आ रही है जो किसी अन्य के लेखन या खबर को आधार बना कर या ‘प्रेरणा’ ले कर अपने कथित लेख लिखते हैं। हुआ यह है कि खोज इंजन परिणामों में, नकल किए गए लेखों, स्पैम को कम करने के लिए गूगल टीम की साप्ताहिक बैठक में गूगल सर्च इंजिन Algorithm बदले जाने को अनुमोदित कर इस प्रकिया को इसी सप्ताह लागू कर किया गया है। इस कवायद का मकसद, सर्च इंजन के द्वारा, खोजकर्ता को मूल साइट की…

Read More

हिन्दी ब्लॉगिंग को समर्पित 11 वेबसाईट्स आ रही हैं 2011 में

पिछले वर्ष अनायास ही इतने पारिवारिक हादसे हुए कि तमाम योजनाएँ धरी की धरी रह गईं। अब पुन: स्फूर्ति आई है तो हिन्दी ब्लॉगिंग को केन्द्र में रख कर किए जाने वाले कार्यों से अवगत करवाना चाहता हूँ आपको। जैसी योजना है उसके अनुसार इस वर्ष 2011 में हिन्दी ब्लॉगिंग को समर्पित 11 वेबसाईट्स लाई जाएँगी। 2011 के प्रत्येक माह के भारतीय पर्व पर एक वेबसाईट। चूंकि जून में कोई प्रचलित पर्व नहीं है अत: इस माह को छोड़ कर 11 वेबसाईट्स। यह ऐसी वेबसाईट्स हैं जिनमें हिन्दी ब्लॉगरों के…

Read More

ब्लॉग पढ़ने के लिए एग्रीगेटर तलाश रहे हैं आप? इधर देख लीजिए

मेरे बहुत से मित्र ऐसे हैं जो ब्लॉगिंग नहीं करते लेकिन ब्लॉग पढ़ते ज़रूर हैं। उन्हें ब्लॉग पढ़ने का चस्का या तो मैंने लगाया या फिर समाचारपत्रों में ब्लॉग रचनाएँ देख हुया। आजकल कई मित्र परेशान हैं कि चर्चित एग्रीगेटर अपनी सेवायें नहीं दे रहें ब्लॉग कैसे पढ़ें? अब चालू भाषा में कहा जाए तो सब पकी-पकाई खीर खाना चाहते हैं। मैंने कई बार कहा कि आरएसएस रीडर जैसे उपाय अपना लें या काम के ब्लॉग तलाश कर पढ़ लें लेकिन उनके कानों पर जूँ नहीं रेंगती। अब उनकी जिद…

Read More

क्लिक किए जाने पर भी चित्र बड़ा नहीं दिखता! क्या किया जाए: अजय कुमार झा की दिक्कत

जिन दिनों अजय कुमार झा को टिप्पू सिंह बनाया जा रहा था उन दिनों वह बड़ी मासूमियत से पूछते रहते थे कि कुछ विशिष्ट ब्लॉगर उनको जबरन टिप्पू चाचा क्यों बनाने पर तुले हुए हैं। वे कहते थे कि बड़ी मुश्किल से तो अविनाश वाचस्पति जी से किसी वाक्य या शब्द का लिंक बनाना सीख पाया हूँ। टिप्पू जितना सीखने में जाने कितना वक्त लगेगा! एक बात मुझे उनकी बहुत भाती है कि वे नि:संकोच अपनी तकनीकी उलझन का हल पूछ लेते हैं, जबकि कई ब्लॉगर हिचकिचाते रहते हैं। इस…

Read More

ललित शर्मा की टाँगे खींच कर टंकी से उतारा गया: क्योंकि सीढ़ी वह साथ ले कर चढ़े थे :-)

उस दिन संगीता पुरी जी की वह पोस्ट पढ़ रहा था जिसमें उन्होंने बुद्धिजीवी ब्लॉगर भाइयों को प्रभावित करने में बुध ग्रह के एक प्रभाव की बात करते एक लेख लिखा था। ज्योतिष की अधिकतर शब्दावली तो अपने पल्ले नहीं पड़ती। सीधा सीधा जो कुछ समझ पाया उससे यह चिंतन करने बैठ गया कि अपने यहाँ किसको बुद्धिजीवी माना जाए 🙂 अब चूंकि बात भाईयों की थी, सो बहनों की ओर ध्यान ही नहीं दिया! अभी कुछ देर ही हुई थी कि ललित शर्मा जी का नाम दिखाती मोबाईल कॉल…

Read More