जब माताजी की आँखों में एकाएक आँसू आ गये और लौटने को तत्पर हो गयीं

मुंबई यात्रा समाप्त हुए हालांकि एक माह से ऊपर हो चुका है, लेकिन एक घटना अब भी याद आ जाती है, जिसने कम से कम तीन प्राणियों के स्वभाव में फर्क ला दिया। अब तक आप पढ़ चुके हैं कि कैसे हावडा-मुंबई एक्सप्रेस से मुंबई पहुँच कर हमारा परिचय टॉफियों के कारोबारी से हुया, Domino Pizza के बाहर खडी आधुनिक युवती की हरकत को देख यूनुस जी से नाराज हुया, ममता जी से मिलने से इनकार भी कर दिया, अपनी बेबसी के आगे अनिता जी के बिन्दासपने का जिक्र किया…

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प्लेटफार्म पर जिसकी बातें हुयीं, वो कौन थी!?

अनिता जी के बारे में इतनी तारीफें सुन चुका था कि न मिल पाने के कारण, मुझे अपनी बेबसी पर झल्लाहट होने लगी थी.जब मैंने कहा कि कल तो शाम की ट्रेन से वापसी है तो बिंदास अंदाज में उन्होने कहा कि हालाँकि क्लासेस शाम तक हैं, लेकिन आप आ जाईये दोपहर एक बजे, नवरत्न होटल में साथ-साथ लंच कर लेंगे, फिर आप चल दीजियेगा, बस दो घटों की ही तो बात है, आपकी ट्रेन तो रात 8:35 की है। मैंने एक बार फिर हामी भर दी। आप भी जानते…

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जुहू बीच और मेरी बेबसी के आगे अनिता जी का बिंदास अंदाज

यूनुस जी से मुलाकात के बाद, अंधेरी होते हुये जब हम खारघर पहुँचे तो मामी के दो पैराग्राफ सुनने के बाद ही लोहड़ी के कार्यक्रम में शामिल हो सके। तब पाया कि टॉफियों के डीलर अपनी पूरी मस्ती में थे, आखिर कार्यक्रम उन्हीं के लिए तो था! रात को सोते समय, अगले दिन की योजना में, अनिता जी से मुलाकात की प्राथमिकता तय कर ली गयी। लेकिन यह जगप्रसिद्ध है कि जो सोचा जाये वह कभी होता है क्या? कथित हाईकमान के अंदाज में बिटिया ने घोषणा की, कि हम…

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जब हमने ममता जी से मुलाकात करने से इंकार कर दिया

विविध भारती की प्रस्तुतकर्ता ममता सिंह से इनकार किये जाने का मज़ेदार किस्सा

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टॉफियों का कारोबार और नाना के घर में लगे हैंडपंप की याद

नवी मुंबई के खारघर में अपने मामा के घर पहुँचने का वर्णन करते हिंदी ब्लॉगर बी एस पाबला

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