मेरी दिल्ली यात्रा: सूचना मिलते ही मुरैना स्टेशन पर पहुँचे भुवनेश शर्मा जी

पिछले माह, अक्टूबर की 11 तारीख को आधी रात बीत रही थी। अजय कुमार झा चैट पर बतिया रहे थे। एकाएक उनकी ओर से लिखा हुआ आया ‘… सोच रहा हूं आप लोगों से मिलने आ जाउं… शायद इसी साल आपकी हमारी मुलाकात हो जाये…बिल्कुल आमने सामने… शायद दिसम्बर में’। तब तक वर्षों से मेरी भी एक दबी हुई इच्छा जोर मारने लगी थी। मैंने लिखा ’14 नवंबर का ट्रेड फेयर अटेंड किए कई वर्ष हो गए… इस बार सोच रहा हूँ कि… प्रगति मैदान की प्रगति देख ही लें…

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