जुहू बीच और मेरी बेबसी के आगे अनिता जी का बिंदास अंदाज

यूनुस जी से मुलाकात के बाद, अंधेरी होते हुये जब हम खारघर पहुँचे तो मामी के दो पैराग्राफ सुनने के बाद ही लोहड़ी के कार्यक्रम में शामिल हो सके। तब पाया कि टॉफियों के डीलर अपनी पूरी मस्ती में थे, आखिर कार्यक्रम उन्हीं के लिए तो था! रात को सोते समय, अगले दिन की योजना में, अनिता जी से मुलाकात की प्राथमिकता तय कर ली गयी। लेकिन यह जगप्रसिद्ध है कि जो सोचा जाये वह कभी होता है क्या? कथित हाईकमान के अंदाज में बिटिया ने घोषणा की, कि हम…

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