एक खतरनाक बताये जा रहे ई-मेल की सच्चाई

अभी थोड़ी देर पहले ही जाकिर अली ‘रजनीश’ जी के ब्लॉग पर नज़र पड़ी। जिसमें उन्होंने एक ई-मेल का जिक्र करते हुए राय माँगी है। क्षणिक टिप्पणी तो कर आया, किंतु लगा कि कुछ और जानकारी भी बाँट ली जाए। ऐसे कई ई-मेल आते रहते हैं जिनमें सच्चाई तो रहती है, लेकिन सहजता से हमारा (भारतीय) स्वभाव उसे स्वीकारने में हिचकिचाता है कि इतनी बड़ी कम्पनियाँ और हमारा सरकारी तंत्र गलत थोड़े ही हो सकता है। लेकिन इस ई-मेल की सच्चाई आप स्वयं ही देखें तो बेहतर होगा। अनुवाद करने…

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