‘कुंठित मठाधीशों के ब्लॉग व अरस्तू-चाणक्य शैली की टिप्पणियाँ’ वाले आलोक मेहता के ब्लॉग से सभी पोस्ट्स हटाई गईं

नई दुनियां से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने होली के अवसर पर हिन्दी ब्लाग जगत पर व्यंग्य बाण छोड़कर सक्रिय ब्लाग लेखकों को लगभग स्तब्ध कर दिया। जब इस लेख को देखा गया तो अधिकतर ब्लाग लेखक हैरान रह गये। वास्तव में दूसरों पर कटाक्ष और प्रहार करने वाला हिन्दी ब्लाग जगत आज खुद भी निशाना बन गया। यह पंक्तियाँ हैं ग्वालियर से दीपक भारतदीप के ब्लॉग पर। आलोक मेहता जी के उपरोक्त चर्चित लेख को जब मैंने प्रिंट मीडिया पर ब्लॉग चर्चा वाले ब्लॉग पर जगह दी तो…

Read More

उसकी इतनी हिम्मत! मुझे पानी की टंकी में ढ़केल दिया!!

इस बार की होली पर, सुबह ही सुबह कुनमुनाया तो बहुत। लेकिन कर कुछ नहीं पाया। वैसे तो कई कारणों से मैं सुबह 4:30 पर बिस्तर छोड़ ही देता हूँ। लेकिन होली की सुबह, अपने राम तो सो कर ही उठे 7 बजे। तब तक हलचल शुरू हो चुकी थी। आस-पड़ोस के बच्चे एक दूसरे को रंग चुके थे। पहला काम याद आया कि नल से आने वाले अतिरिक्त पानी को इक्कठा करने के लिये जमीन पर बनायी गयी टंकी (हौद) में हमेशा की तरह रंग घोलना है। लेकिन उसके…

Read More

सभी ब्लॉगर साथियों को होली पर्व की शुभकामनायें

हिंदी ब्लॉग जगत पर अर्सा गुजारने के बावज़ूद , आप जैसे स्नेही जनों के साथ यह मेरी पहली होली है। ऐसे पारंपरिक भारतीय त्यौहारों को बाज़ारवाद की भेंट चढ़ा हुया देख मन बहुत खिन्न होता है। कथित विकास ने वह उल्लास खतम कर दिया है, जो बरसों पहले हुया करता था। परीक्षायों की आपाधापी के बीच, हफ्तों पहले शुरू होने वाली नगाड़ों की धमक और अपने अपने इलाके में होने वाली हलचल की यादें आज भी मन को प्रफ़ुल्लित बनाये रखे है। बेशक बचपन की यादें, मुस्कुराहट ला देती हैं,…

Read More

जिनका पहले से ही छोटा है, या काला है, वे यहाँ न देखें

अभी दो दिन पहले ही उस लड़की ने मुझे उकसाया, जिसके बारे में बातें मुम्बई से रवाना होते हुये प्लेटफॉर्म पर की गयी थीं। उसका कहना था कि होली पर किसी तरह की शरारत न किये जाने पर त्यौहार का मज़ा कहाँ रह जायेगा? टाँग खिंचाई का यही एक मौका रहता है जिसका कोई बुरा नहीं मानता और मान भी ले तो उसकी परवाह नहीं की जाती! मुझे भी वो दिन याद आ गये जब अपने आस-पास के चुनिंदा व्यक्तियों को तरह तरह की उपाधियाँ देकर एक लिस्ट निकाली जाती…

Read More