ब्लॉगिंग को अब पुन: समय, इस नए वर्ष में

अरे! अभी अभी तो हैप्पी न्यू ईयर 2009 कहा था और इतनी जल्दी हैप्पी न्यू ईयर 2010 कहना पड़ रहा है!! और दो दिन पहले ही तो 21वीं सदी का स्वागत किया था हैप्पी मिलेनियम कह कर। इस बार तो सच में लगता है कि समय बड़ी तेजी से बीत गया। इस ब्लॉग जगत की बात की जाए तो नि:संदेह मेरे लिए ब्लॉगिंग का यह वर्ष बहुत आनंददायक रहा है। तमाम खट्टे मीठे अनुभव और नए मित्रों के साथ से जीवन के ढ़ंग, सोच व मानसिकता में उल्लेखनीय परिवर्तन महसूस…

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आ तो गई वो, लेकिन अब तांडव पर उतारू है

आ तो गयी वो आखिर. स्वागत तो हमने भी किया. तस्वीरें देख ही चुकें है आप. लेकिन यह उम्मीद नहीं थी उससे, कि हमारे भाई-बन्धुओं की ओर आंख उठा कर भी ना देखे. इतनी भी क्या अकड़ रखनी भई! आखिर कितना तरसाया है उसने. अब भी रहम ना आया तो क्या फायदा आने का! (दुर्ग बायपास पर बने पुल से नदी का नज़ारा) हमसे भी जब देखा ना गया तो ज़रा सी गुजारिश कर दी कि इतनी बेरुखी ठीक नहीं. बस फिर क्या था हो गया शुरू तांडव उसका. (मेरे…

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रूठी हुई थी… आखिर आ ही गई आज …

आज कुछ लिखने का मन नहीं है। लगता है कि सिर्फ देखता ही रहूँ। आखिर वो रूठने के बाद आ ही गई। कहाँ कहाँ नहीं तलाशा उसे … आँखें पथराने लगी थीं … उम्मीदें टूटने लगीं थीं … आज वो आई तो हम भी झूम उठे … वो गीत है ना? ‘आने से उसके, आये बहार … जाने से उसके, जाये बहार‘ बस उसी की बात कर रहा। आप भी देखिए और बताईये क्या मैं झूठ बोल रहा!? दो दिन पहले, घर के पास वाले पेड़ पर पंछी फिर घुमड़े…

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