टिप्पणी लिखने वालों के लिए कुछ तकनीकी बातें

“कई बार ऐसा होता है दिल कसमसा कर रह जाता है, कम्बख़्त ऐसा मैं क्यों नहीं कर पाता? सभी जगह देखता हूँ, कोई ना कोई अपनी कला दिखाता रहता है, एक मैं ही ललचाई आँखों से देखने के अलावा कुछ नहीं कर पाता “ एक ऐसे ब्लॉगर के मुँह से मैं यह बात सुन रहा था जिसे लगभग दो वर्ष होने को आए हिंदी ब्लॉग जगत में। मेरा दिल तो किया उसी समय उनको बता दूँ उनकी चाही सभी जानकारियाँ, लेकिन कई बातें थीं जो लिखित में ज़्यादा बेहतर समझ…

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