अगर आप वाह न कहें तो क्या फायदा इस पोस्ट का!?

यदि सब कुछ सामान्य हो तो मैं प्रतिदिन सुबह 4:30 पर नींद से जग जाता हूँ, भले ही सोया कितने भी बजे होऊँ! नित्यकर्म से निपट नींबू वाली चाय के साथ इंटरनेट के सहारे होने वाले अपने कार्यों को निपटाते 6 बज जाते हैं और फिर दौड़ लगती है कुछ दूर ही समाचारपत्र के अड्डे तक। हालांकि वह कई बार कह चुका है कि पेपर घर में दे दिया करूँगा किन्तु मैं ही उसे मना कर देता हूँ कि सुबह सुबह अपने शरीर को हरकत में लाने का यह एक अच्छा मौका होता है। डेज़ी होती थी तो यह समय 6 बजे के पहले से शुरू होता था।

वापस आते-आते 6:30 होने वाले होते हैं और कम्प्यूटर मॉनीटर पर स्वत: प्रकट हो जाता है बीबीसी हिन्दी का वह रेडियो कार्यक्रम जिसे पहले ‘आजकल’ के नाम से जाना जाता था, अब उसे ‘नमस्कार भारत’ कहा जा रहा। आधे घंटे के इस कार्यक्रम से बीबीसी के अंदाज़ में देश-दुनिया की जानकारी मिल जाती है। हैडफोन लगा कर मैं अपना काम जारी रखने के साथ रेडियो भी सुनता रहता हूँ।

आज बीबीसी रेडियो में एक रिपोर्ट थी छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी ‘बस्तर की मैना’ की। जिसमें बताया गया कि बस्तर की मैना थोड़े से प्रशिक्षण के बाद इंसानों की आवाज़ की हू-ब-हू नक़ल कर सकती है। मैंने जो कुछ सुना उससे तो दंग रह गया। शाम को ऑफ़िस से आकर उसकी रिकॉर्डिंग का इंतज़ाम कर, बार-बार सुन आनंद लेता रहा।

आप भी सुनिए वह रिपोर्ट, जो केवल साढ़े चार मिनट की है। (इसेसुननेकेलिएतीरकेनिशानपरक्लिककर कुछसेकेंडप्रतीक्षाकरें)

अब बताईए आप क्या कहेंगे?
अगर आप वाह न कहें तो क्या फायदा इस पोस्ट का!?
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अगर आप वाह न कहें तो क्या फायदा इस पोस्ट का!?” पर 44 टिप्पणियाँ

  1. वाह , क्या बात है।
    एकदम असली जैसा लगता है ।
    पायल का ज़वाब नहीं ।

  2. हमारे यहाँ एक प्राचीन ग्रंथ पाया जाता है " शुकसप्तति" जिसका आम बोलचाल में नाम है " किस्सा तोता मैना " इस कहानी में मैना तोते को पुरुष की बेवफाइ की कहानियाँ सुनाती है ।
    इस बस्तर की मैना की आवाज़ सुनकर एक प्रश्न मन में आया कि अगर भविष्य में यह मैना सँरक्षित रह गई तो वह क्या किस्से सुनायेगी ?

  3. बस्तर की मैना के संरक्षण का कार्य 36 गढ निर्माण के पश्चात प्रारंभ हुआ है।
    साथ ही मैना को 36 गढ के राज्य पक्षी का दर्जा भी दिया गया है।
    अब इसकी आवाज तो आपने सुना ही।
    एक अच्छी जानकारी के लिए आभार

    जय 36 गढ

  4. जय हिन्‍दी
    जय मैना
    वाह पाबला जी

  5. बी बी सी से ऐसी अधूरी रिपोर्ट की उम्मीद नहीं थी -यह पहाडी मैना है -हिल मैना जो पहाडी -हिमालय के की पर्वत श्रेणी में अमूमन मिलती रही है -बस्तर के घने जंगलों में भी मिलती है -मगर अब आम लोग इससे परिचित नहीं हैं -मैं खुद एक जोड़ा या एक मैना छात्तेसगढ़ से मंगाना चाहा लेकिन किसी भी कीमत पर नहीं मिल सकी /सका .मैं इसे पालना चाहता हूँ आप या अली सा मदद कर सकते हैं …

  6. वाकई, वाह बोल उठे..अब जब यह प्रजाति विलुप्त होने को है तो जागे सब!

  7. बहुत सुंदर प्रस्तुति। ऎसी मैना को देखने को दिल करता है, धन्यवाद

  8. वाह, तो हम भी बोल रहे है पर पूरा मज़ा तो तब आता ना जब हम पूरा सुन पाते नेट इतना स्लो चल रहा है आजकल कि मत पूछिए !

  9. हमने तो देखा भी है…अऊर कुछ पुराने उपन्यास (सायद चंद्रकांता में)इस तरह का जिकिर भी है..आपका रूटीन सुनकर जलन होने लगा है कि हम सोते हुए केतना गँवा दिए सब!!

  10. एक बार वाह कहने से काम नहीं चलना है जी,
    वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह……….वाह वाह।
    पाबला साहब,हो सके तो वीडियो भी उपलब्ध करवायें।
    आभार स्वीकारें पायल से मुलाकात करवाने का।

  11. मैंने सबसे पहले रीडर्स डाइजेस्ट मे इस चिड़िया के बारे मे पढा था.
    आज वापस पढ़ा ,अच्छा लगा. वीरजी लुप्त होने के कगार पर खड़ी इन् जीवोव को पालने की आगया सरकार क्यों नही देती हमे जैसे लव बर्ड केवल इसलिए अब तक जिन्दा है क्योंकि इन्हें इंसानों ने संरक्षण दे रखा है.
    उसी तरह इस मैना को पालने दिया जाये ? तो सबसे पहले मै पालूंगी.मेरे घर के आस पास बहुत सारी मैना रहती है.तब बहुत मजा आता है जब ये किसी भी पक्षी की हुबहू नकल उतारती है.तोते और कबूतर की नकल तो ऐसी उतारती है कि कई बार बाहर आ कर देखना पड़ता है कि बाथरूम की खिडकी के बाहर आज कौन से भाईसाहब या दीदीजी आ कर बैठे हैं.
    हा हा हा
    वाह वाह सच्ची स्च्चिवाला वाह भेज रही हूं.ब्लोगर्स वाला नही.
    हा हा

  12. दुआ करता हू सरकार की कोशिश कामयाब हो.. मेना बहुत प्यारी है..

  13. तोला बंदत हंव दिन रात वो मोर धरती मईया, मोर सोंन चिरईया, जय होवय तोर। वाह … भईया वाह.

  14. .
    .
    .
    वाह वाह,
    आनंद आया सुन कर…

    आभार आपका!

  15. आपने सुबह-सुबह मैना की आवाज सुनाकर मन प्रसन्‍न कर दिया। बहुत अच्‍छी पोस्‍ट। आभार।

  16. अच्‍छा लगा सुनकर .. जानकारी प्रदान करने के लिए आपका आभार !!

  17. छत्तीसग़ढ़ की राजकीय पक्षी 'बस्तर की मैना' हो या ब्लॉगगढ़, हम तो यही कहेंगे…वाह हुजूर वाह…

    वैसे पाबलाजी इस पायल मैना के आसपास कभी ब्लॉगर मीट रखने की भूल मत कीजिएगा, न जाने कब कौन से राज़ खोल दे…

    पायल नाल पंगा…ना भई ना…

    जय हिंद…

  18. शानदार प्रस्तुती ,काश इस तरह की इंसानों वाली आवाज की ट्रेनिंग के साथ-साथ इंसानी संवेदना की भी सिख हमारे देश के भ्रष्ट शरद पवार जैसे मंत्रियों को दी जा सकती ,जिससे इंसानियत को इस देश में बचाया जा सकता …

  19. भई हम तो यही कहेंगे – वाह वाह और वाह

    इस रोचक जानकारी को उपलब्ध करवाने के लिए आभार

    महक

  20. वाह, वाह

    वाकई विश्वास नहीं होता कि यह मैना की आवाज़ है…

  21. पहली बार सुना है मैना को इस तरह से बोलते हुवे …. लाजवाब ….
    Amazing …

  22. वाह साब आनंद आ गया …. कभी जरुर देखूँगा… आभार

  23. आप की रचना 10 सितम्बर, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपनी टिप्पणियाँ और सुझाव देकर हमें अनुगृहीत करें.
    http://charchamanch.blogspot.com

    आभार

    अनामिका

  24. सुन लिया ताया जी(उफ्फफ्फ्फ़ ताऊ जी).. आप ना भी कहेंगे तब भी वाह बोलना ही पड़ेगा ये आवाज़ सुनने के बाद.. 'वाह री मैना.. तू सुनती है कहना..'

  25. आप के इस लेख ने दो महत्वपूर्ण बाते जाहिर की, एक तो बी बी सी हिन्दी सेवा का महत्व, दूसरा पहाड़ी मैना द्वारा मनुष्य की आवाज की अदभुत नकल करना! जनाब हम मनुष्य के दिमागों की कुटिल कारस्तानियों को छोड़ दे तो हमारे पास कुछ भी अदभुत नही, न कीड़ो-मकोड़ो जैसी सुन्दरता, न पक्षियों जैसी उड़ान भरने की स्वंय मे ताकत, न उनके जैसे रंग बिरंगे विविध रूप, न बाज जैसी तेज नज़र,और न ही बाघ जैसा फ़ुर्तीलापन, आप कहेंगे की आदमी के दिमाग ने इन सब का बेहतर विकल्प तैयार किया है, सही है, किन्तु प्रकृति के इन अदभुत व सुन्दर जीवों की क्षमताओं और उनका व्यवहार का अध्ययन हमें वहां ले जाता है, जहां से हमारा प्रदुर्भाव है, और एक प्राकृतिक आनन्द का एहसास, जो तमाम नकली व मानव निर्मित संसाधनों मे कदापि नही मिल सकता! पाबला जी को धन्यवाद की सूचना के बेहतरीन माध्यम से वो आज भी जुड़े है, और प्रकृति क सुन्दर आवाजे सुन और मह्सूस करने की माद्दा उनमे बाकी है! साथ ही यह नेक काम कि हम सब इन अदभुत जानकारियों से परिचय कराते रहते है, इसके लिए हम सभी को उनका आभारी होना चाहिए!

  26. एक ही कमेन्ट आठ बार चिपका रखा है मैंने !!!!! सात बार डिलीट मार देते.पर…देखिये इससे यह मालूम पड़ता है कि मुझे कमेन्ट पोस्ट करने मे कितनी परेशानी आई होगी.ऐसा क्यों होता है वो भी कभी बता दीजिए वीर जी!
    वरना :Disapproval: आपकी मर्जी :Distort:

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