अनिल पुसदकर तथा पंकज अवधिया के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई

मैंने सोचा था कि संजीव तिवारी व राजकुमार ग्वालानी से हुई आज की छोटी सी मुलाकात का विवरण लिखूंगा। लेकिन जो सोचा जाए वह होता है क्या! अभी कुछ देर पहले अनिल पुसदकर जी की पोस्ट पर पंकज अवधिया जी की टिप्पणी देखी, राजिम कुम्भ एक साथ जाने के विचार सहित। मन प्रसन्न हुआ।

अपनी सीट बुक करने के लिए अनिल जी फोन लगाया गया, तब उन्होंने जानकारी दी कि पंकज जी ने उन्हें फोन भी किया था। किसी कारणवश जो गलतफहमियां हो गईं थी, वह इस फोनालाप से दूर हो गई हैं तथा हाल ही में हुए शब्दों के आदान-प्रदान को, बिना किसी कलुषता के, यहीं समाप्त किया जा रहा है।

अनिल जी से हुई मेरी बातचीत के दौरान ही, नए ब्लॉग बनाने के विषय पर आधारित आगामी ब्लॉग कार्यशाला की तिथि निश्चित कर ली गई है, जिसके बारे में व्यक्तिगत रूप से, आमंत्रितों को सूचित कर दिया जाएगा।

अनिल पुसदकर तथा पंकज अवधिया के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई
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अनिल पुसदकर तथा पंकज अवधिया के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई” पर 17 टिप्पणियाँ

  1. बधाई हो बधाई। सुनकर खुशी हुई।
    घुघूती बासूती

  2. छत्तीसगढ़ ब्लागर्स के हित मे उचित कदम है।

  3. ये हुई ना बात। छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया।

  4. अच्‍छी खबर है .. बधाई और शुभकामनाएं !!

  5. बधाई हो बधाई। सुनकर खुशी हुई।
    बहुत सुखद खबर!!
    छत्तीसगढ़ ब्लागर्स के हित मे उचित कदम है।
    बहुत सुखद खबर!
    ये हुई ना बात। छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया।
    अच्‍छी खबर है .. बधाई और शुभकामनाएं !!

    C C P

  6. ऎसे ही सभी गलतफ़ैमिया दूर हो ……आमीन

  7. ओह अब वे बेचारे क्या करेंगे जो सोच सोच के खुश हुए जा रहे थे कि लो पड गई फ़ूट ……..है न आखिरकार हिंदी ब्लोग्गिंग ….अभासी दुनिया से अलग एक दुनिया । बहुत अच्छी खबर सुनाई सर , काश कि सबका अंत सुखद हो
    अजय कुमार झा

  8. अच्छी खबर के लिए बधाई!
    मैं तो पिछले छह दिनों से लगातार यात्रा में रहा। मुझे तो समझ नहीं आया कि विवाद क्या था?

  9. chalo is balak ka maan to rakh liya dono varishhtho ne, matlab ki din bhar ki gai mehnat kaam aai…
    shukriya un dono ko

  10. दूरभाष पर मिट गये दो ब्लोगर के मैल
    फ़ूट डालने के हुए सभी इरादे फ़ैल
    सभी इरादे फ़ैल बात मेरी तुम मानो
    एक दूसरे की इज्जत को अपनी मानो

  11. विवाद से किसको क्या मिला है?इस आभासी दुनिया मे आने का कारण ही है वास्तविक दुनिया मे प्रेम का अभाव और उसी प्रेम की तलाश मे मैं यंहा आया था।अगर यंहा भी सब कुछ् वैसा ही है तो फ़िर यंहा आये ही क्यों?

  12. "सुबह का भूला यदि शाम को घर लौट आये तो उसे भूला नहीं कहा जाता!"

    बहुत अच्छी बात है कि गलतफ़हमियाँ दूर हो गई! छत्तीसगढ़ के ब्लोगर्स का सदैव आपस में ताल-मेल बना रहे!

  13. बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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