अपने Inkjet प्रिंटर से एकदम नए और स्वस्थ, मानव के अंग बनाइये!

घरों में इस्तेमाल होने वाले इंकजेट प्रिंटर से अगर तस्वीरों या अक्षरों के बजाय शरीर के असल अंगों को ही छापा जाए, तो कैसा रहे। आखिर मानव कोशिकाएं भी तो प्रिंटर के नोजल से गिरने वाली इंक की बूंदों के बराबर ही होती हैं। यह आइडिया दिमाग में आते ही जापान के वैज्ञानिक मकोटो नाकामूरा ऐसा मुमकिन करने की कोशिश में जुट गए और 3 साल के प्रोजेक्ट के बाद वे इंकजेट बायो प्रिंटर बनाने में कामयाब हुए। इस प्रिंटर से हर दो मिनट पर तीन सेंटीमीटर लंबी ट्यूब बनाई जा सकती है। इस प्रोजेक्ट की सफलता ने बायो प्रिंटिंग के जरिए नए अंगों के निर्माण का रास्ता खोल दिया है।

नाकामूरा के मुताबिक, इस organ printing technique से भविष्य में स्टेम कोशिकायों के साथ बायो प्रिंटिंग का रास्ता खुल जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि तब एकदम नए और स्वस्थ अंग बनाए जा सकेंगे। नाकामूरा की यह तकनीक इंकजेट प्रिंटिंग पर आधारित है। इसमें प्रिंटर से इंक के बजाय प्रति सेकंड हजारों कोशिकाएं निकलती हैं। इसके बाद इनसे त्रि-आयामी अंग बनाए जाते हैं। अगर प्रिंटर किसी एक छेद पर एक के बाद एक कोशिकाएं डालते हुए उसी प्रक्रिया को बार-बार दोहराता है तो वहां अपने आप एक त्रिआयामी अंग बन जाएगा। जिस तरह से प्रिंटर अलग-अलग रंगों को प्रिंटिंग के लिए चुनता है उसी तरह इस तकनीक में प्रिंटर विभिन्न तरह की कोशिकायों को ‘छापता’ है।

कोशिकाएं सूखने के बजाय त्रिआयामी आकार लें इसके लिए नाकामूरा ने कोशिकायों को एल्गिनेट सोडियम में रखा और उस पर कैल्शियम-क्लोराइड द्रव्य का छिड़काव किया। नाकामूरा के शब्दों में यह कुछ उसी तरह का है, जैसे किसी बिल्डिंग को बहुत ही छोटे स्तर पर सरियों, कंक्रीट या कांच के बजाय कोशिकायों और दूसरे सामानों से बनाया जाए। फिलहाल नाकामूरा को जीवित कोशिका वाली नली बनाने में कामयाबी मिली है। इसकी चौड़ाई एक मिलीमीटर है। इसमें 2 प्रकार के कोशिकायों के साथ ही दुहरी दीवार भी है। यानी यह सब ठीक तीन स्तरों वाले मानवीय रक्त वाहनियों की तरह है।

नाकामूरा के मुताबिक ‘मेरा अंतिम मकसद दिल को बनाना है। हालांकि इसमें 20 साल और लगेंगे।’ एक बार ऐसा हो जाने पर ह्रदय प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे मरीजों का इंतजार खत्म हो जाएगा। इंसानी कोशिकायों से बनने के कारण ऐसा दिल शरीर से भी जल्दी सामंजस्य बैठा लेगा।

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अपने Inkjet प्रिंटर से एकदम नए और स्वस्थ, मानव के अंग बनाइये!” पर 8 टिप्पणियाँ

  1. नयी जानकारी। ज्यादा समझ नहीं आई।

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