अब आया खाने का जायका बताने वाला, रोबोट का आर्टिफिशल मुंह

इंसान जब खाने को चबाता है तो वह उसकी खुशबू और जायके को महसूस भी करता है। अब फ्रांस के शोधकर्तायों ने रोबोटनुमा ‘मुंह’ बनाने में कामयाबी पाई है, जो इंसान के मुंह की तरह काम करता है। यह खाने को चबा सकता है और उसके जायके का अहसास भी कर सकता है। शोधकर्तायों का कहना है कि इस खोज से खाद्य गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। कृत्रिम ‘मुंह’ से यह जानने में भी आसानी होगी कि इंसान खुशबू का अहसास कैसे करता है।

फ्रांस के ईआईएनआईटीएए में शोधार्थी गैले ऐविरसेंट की अगुआई में यह शोध किया गया। इसकी रिपोर्ट ‘जर्नल ऑफ एग्रीकल्चर एंड फूड ‘ में प्रकाशित हुई है। ऐसा नहीं है कि पहली बार कृत्रिम मुंह बनाने की दिशा में काम हुआ है। पहले जिस मुंह को बनाया गया था उसकी मदद से नरम खाद्यों का विश्लेषण किया गया। दांतों के अध्ययन के उसमें लिए रोबॉटिक जबड़े भी लगाए गए थे। लेकिन अब तक कोई ऐसी संरचना नहीं बना सका था, जिससे यह पता चले कि इंसान जब कड़े खाने को चबाता है तो क्या होता है। जब खाना हमारे मुंह में होता है, तो उससे कई तरह के तत्व निकलते हैं। चबाते वक्त खाना टूटता है, पिसता है और उससे तरल पदार्थ भी निकलते हैं। ये आपस में या मुंह से निकली लार के संपर्क में आकर खुशबू उत्पन्न करते हैं। खुशबू मुंह के जरिए नाक तक पहुंचती है और हमें उसका अहसास होता है।

इंसान खाते वक्त कैसा अनुभव करता है, इसे जानने के लिए वैसा ही रोबॉटिक प्रणाली बनायी गयी, जिसमें खाना जाने पर वह इंसान के मुंह की तरह काम करता है। ऐविरसेंट ने कहा- हमारे इस कृत्रिम मुंह से सेब जैसे कड़े भोजन के बारे में जाना जा सकता है। दरअसल खाने को चबाना पाचन की पहली अवस्था होती है। इस दौरान खाना टूटता है और मुंह से निकली लार उसमें घुल-मिल जाती है।

यहमुंह’ इंसान के मुंह से आकार में करीब पांच गुना बड़ा है। इसे इस्पात के बड़े डब्बे के अंदर तैयार किया गया है, जो बिजली के तत्व से लैस है। इसकी भीतर की सतह रासायनिक प्रतिरोध वाले प्लास्टिक की है। बेलननुमा प्रकोष्ठ जैसी इस संरचना की छत और फर्श में अलग-अलग स्पीड वाले मोटर लगे हैं। खाना सतह पर जाते ही वह घूमने लगती है। छत पर लगे तीखे दांत उसे चबाने लगते हैं।

दबाव और चक्कर के बीच खाना वैसे ही पिसने लगता है, जैसे इंसान मुंह में। चैंबर में पाइप की मदद से एंजाइम युक्त लार पहुंचाई जाती है। इस दौरान परिवर्तित हो रहे तत्वों की खुशबू के विश्लेषण का भी इंतजाम होता है। इस रोबॉटिक मुंह के अंदर सेब डालकर रिसर्चरों ने अलग-अलग स्पीड पर चबाने की प्रक्रिया की। अंत में जो गूदा मिला, उसकी तुलना इंसान के चबाए सेब से की गई। शोधकर्तायों ने पाया कि दोनों काफी समानता थी।

थोड़ी अधिक जानकारी के लिए समाचार देखा जा सकता है।

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