अब आया सच में उड़न खटोला

इजरायल के वैज्ञानिकों ने रिमोट संचालित एक ऐसा उड़नेवाला स्ट्रेचर बनाया है जो पलक झपकते ही घायलों को अस्पताल पहुंचा देगा। न दूरी की दिक्कत, न जाम का झंझट और न ही दुर्गम इलाकों का खौफ। खूबियों से भरे इस उड़नखटोला स्ट्रेचर का नाम Med-Evacuation Aerial Vehicle है। यह अत्याधुनिक तकनीकी वाला वाहन अपनी जगह से उड़ान भर सकता है। लगातार तीन घंटे तक उड़ान भरने वाले भौरें के आकार के इस वाहन में चार पहिए हैं जो असमतल सतह को भी पार कर सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को अगर 60 मिनट के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसके जीवित बचने की संभावना छह गुना बढ़ जाती है। समय से इलाज न मिलने के कारण भारत सहित कई देशों में लाखों लोगों को असमय जान गंवानी पड़ती है। लेकिन अब घायलों को समय पर इलाज दे पाना संभव होगा।

इजरायली वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस मानव रहित बचाव यंत्र से दूसरों की जान जोखिम में डाले बिना युद्ध-क्षेत्र से घायल सैनिकों को सुरक्षित निकाला जा सकता है। इसमें चार घायल व्यक्तियों को ले जाने की व्यवस्था है। इसको आकार देने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि जंग के अलावा भयंकर दुर्घटनाओं में इसकी उपयोगिता को ध्यान में रखकर भी इसका डिजाइन तैयार किया गया है। ऐसे दुर्गम दुर्घटना स्थल, जहां हेलीकाप्टर और एंबुलेंस घायलों के पास तेजी से पहुंचने में असक्षम हैं, वहां भी यह वाहन पहुंच जाएगा। मानव रहित ड्रोन की तरह काम करने वाले इस स्ट्रेचर को जमीन पर मौजूद एक विशेषज्ञ पायलट उड़ाएगा। अपने गंतव्य स्थल पर पहुंचते ही इसके अंदर मौजूद डाक्टर या चिकित्साकर्मी दुर्घटना में घायलों को स्ट्रेचर पर डालकर अस्पताल में इलाज के लिए वापस भेज देता है।

इस उड़नखटोला स्ट्रेचर को इजरायल के Fisher Institute for Air & Space Strategic Studies के विशेषज्ञों ने तैयार किया है। इस खोज के पीछे इन लोगों का मूल मकसद यह है दुर्घटना के बाद Golden Hour माने जाने वाले 60 मिनट के समय में ज्यादा से ज्यादा घायलों की जान बचाई जा सके। इस उड़ने वाले स्ट्रेचर के प्रोटोटाइप का सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है। अगले साल तक यह बाजार में उपलब्ध होगा।

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अब आया सच में उड़न खटोला” पर 2 टिप्पणियाँ

  1. अच्छी जानकारी प्रेषित की है।आभार।

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