अमूल बेबी से तो मैं वर्षों पहले मिल चुका! आप भी मिलिए

पिछले दिनों केरल के एक राजनेता द्वारा इंदिरा गांधी के पौत्र राहुल गांधी को अमूल बेबी कहे जाने पर अमूल ने इसे हाथो हाथ लपक लिया। मीडिया में अमूल के इस कदम पर सुगबुगाहट हुई तो मैं कंधे उचका कर रह गया क्योंकि अमूल तो ऐसे मौकों को पिछले 35 वर्षों से भुना रहा है।

मुझे याद आता है कि 1982 के बाद अपने शहर, भिलाई के सेक्टर 5 चौक से गुजरते हुए, वर्षों तक ताज़ा घटनाक्रमों पर अमूल के चुटकीले विज्ञापन वाल़े होर्डिंग देखता रहा। फिर यकायक वह विज्ञापन उस जगह दिखना बंद हो गया। एक दिन निगाह पड़ी नेहरू नगर चौक पर तो वह विज्ञापन दिखा होर्डिंग पर, अपने अंदाज़ में। आजकल वह भी वहाँ नहीं दिखता शायद जगह फिर बदल गई हो।

अधिकतर अमूल उन मुद्दों पर अपना यह तरीका अपनाता है जो जनमानस को तात्कालिक रूप से प्रभावित करते हैं। कई बार तो केवल एक दिन में भी विज्ञापन बदल जाते है।

मुद्दे की पैरोडी बना कर अमूल की तारीफ़ करते विज्ञापन देख इसकी परिकल्पना करने वाल़े की सराहना करनी पड़ती है। कुछ उदारहण देखिए

मुम्बई के आदर्श सोसायटी घोटाले पर अमूल को ‘ख़तम’ कर देने की बात

अंगरेजी फ़िल्म मिशन इम्पोसिबल की तर्ज़ पर नारा लगाते अमूल के हमेशा टॉपर बने रहने की चुटकी

रोजा खोलने की नक़ल करते रोज़ अमूल खोलना


मुम्बई के बांद्रा-वरली पुल पर अभिनेता अमिताभ बच्चन की विवादास्पद उपस्थिति पर उनके फिल्मी संवाद दोहराते हुए ब्रिज को भूल फ्रिज में रखा अमूल अपनाने की नसीहत


हाल ही में संपन्न हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप में दक्षिण आफ्रिका के विरूद्ध खराब प्रदर्शन पर वन्दे मातरम की तर्ज पर वन डे मातम कहते हुए अमूल मक्खन के पीले रंग का इशारा


राजकपूर अभिनीत फ़िल्म के गीत ‘आ अब लौट चलें’ की पैरोडी कर आ अबू लौट चलें कहते हुए गैंगस्टर अबू सलेम के पतन को भुनाते हुए अमूल के सुबह से शाम तक उपयोग किए जाने की बात

हाल ही में आए विज्ञापन देखिए

यम ला बन ला, अमूल परिवारों को नज़दीक लाता है! — फ़िल्म यमला पगला दीवाना

नो माफी फॉर गद्दाफी – अमूल, स्वाद आजादी का

होस्नी को क्रान्ति मुबारक — अमूल का क्रांतिकारी स्वाद

आजकल मैं इन मजेदार विज्ञापनों का आनद इसके लिए बनी एक खास वेबसाईट पर लेता हूँ। आप भी देखिए इस वेबसाईट पर सन 1976 से अब तक के चुनिंदा विज्ञापनों को और बताईए अपनी प्रतिक्रिया।

अमूल बेबी से तो मैं वर्षों पहले मिल चुका! आप भी मिलिए
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अमूल बेबी से तो मैं वर्षों पहले मिल चुका! आप भी मिलिए” पर 20 टिप्पणियाँ

  1. अमूल के कटाक्ष होते बहुत टेस्टी है

  2. विज्ञापन का ये तरीका पसंद आया।

  3. अमूल के यह विज्ञापन वाकई अद्भुत है और मुझे हमेशा से आकर्षित करते रहे हैं ! और कोई कंपनी ऐसी तात्कालिक प्रतिक्रिया शायद ही दे पाती हो !

    शुभकामनायें आपको और अमूल को !

  4. अमूल के विज्ञापन प्रभावित करते हैं।

  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति। प्रभावकारी।

  6. यही तो अनोखा अंदाज है जो अमूल को स्वाद के अलावा आगे रखता है..सुन्दर विज्ञापन और आपकी सुन्दर प्रस्तुति…

  7. अमूल और फेवीकोल दोनों के ही विज्ञापन बहुत शानदार होते हैं..

  8. मजेदार. हम यह रायपुर के जयस्‍तंभ चौक पर देखा करते थे.

  9. बड़े अच्‍छे विज्ञापनों से रूबरू करवाया, आभार।

  10. बहुत मज़ेदार अमुल की तरह स्वादी स्वादी। पंजाबी आलू के प[परांठे और अमुल बट्टर भी इस कटाक्षों के आगे फीका स्वाद देगा। शुभकामनायें।

  11. बड़ा शानदार लिंक दिया है…क्रिएटिविटी क्या होती है, इन एड्स से सीखी जा सकती है…

    (लगदा वे अमूल दे प्रोडक्टस तुसी वी बचपन विच जम के छके ने…चश्मेबद्दूर)

    जय हिंद…

  12. आनन्‍द ही आनन्‍द। बजरिए पाबलाजी, अमूलानन्‍द।

  13. बहुत बहुत धन्यवाद आपने मेरी समस्या हल की

  14. मैंने कहीं पढ़ा था कि इसके शुरुआती विज्ञापनों की पंच लाइनें प्रसिद्ध मीडिया पर्सन व अभिनेता भरत डाभोलकर लिखते थे. आजकल का पता नहीं. शायद कोई क्रिएटिव टीम हो.

  15. हमारे देश के विज्ञापनों की बात ही अलग है..

  16. कमाल की पोस्ट सर जी … अमूल वालों का तो वैसे भी कोई जवाब नहीं … जितना बढ़िया मक्खन … उतने ही बढ़िया विज्ञापन !

  17. बहुत अच्छी प्रस्तुति| धन्यवाद|

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