अरे दीवानों मुझे पहचानो!!!

मैंने सोचा आज मैं भी जरा मौज ले लूँ!

ना तो राजीव तनेजा जैसा कुछ कर रहा हूँ न ही कार्टूनिस्ट सुरेश शर्मा जैसा और न ही रचना सिंह जैसा

आप तो बस इस ब्लॉगर को पहचानिए
कोई हिंट, कोई बात, कोई पहचान नहीं बता रहा हूँ। आप बस नाम बताईए इनका और ब्लॉग बता सकें तो उम्दा!anil-pusadkar-bspabla

कैसी रही?

अरे दीवानों मुझे पहचानो!!!
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अरे दीवानों मुझे पहचानो!!!” पर 29 टिप्पणियाँ

  1. ललित जी,
    गलत बात है। इसीलिये किसी भी पर्तियोगिता में लिख दिया जाता है कि इससे जुड़े लोग भाग नहीं ले सकते। वैसे अनिल पुसदकर जी पूरे अनिल सिंह लग रहे हैं। 🙂

  2. हमें भी आप ही की जवानी के दिनों की तस्वीर लग रही है!
    अगर आप अभी भी अपनी गिनती जवानों में करते हों तो फिर जरूर ये तस्वीर आपके बचपन के दिनों की होगी 🙂

  3. ये अनिल बी एस पुसदकर पाबला जी हैं , यानि दोनों का कंबीनेशन हैं , अब क्या करें हम तो झटके से आपका ही नाम ले देते ,,,आखिर आपही ने लिखा है कि अरे दीवानों मुझे पहचानो, हम लिखते पहचान लिया , मगर ललित जी ने ठोक दिया अनिल जी का नाम , सो हम दोनों तरफ़ हो लिए
    अजय कुमार झा

  4. हमें भी कोई शक नहीं —ये वही हैं। 🙂

  5. बहुत जमाने से फोटू खींच रहे हो ठाकुर

  6. चित्र बहुत बढ़िया है..जैसे बनाया गया हो…धन्यवाद जी..

  7. ho ho,,,,,,,,
    aaj mazaak ke mood main lag rahe ho????? kya baat hain????
    bhai ji, humne to inhe pehchaan liyaa hain.
    ye hain =
    .
    .
    .
    .
    .
    don yaani aap. (don ne bhi arre diwaano mujhe pehchaano kahaa tha or aap bhi yhi keh rahe hain) to huye naa aap bhi don.
    thanks.
    http://www.chanderksoni.blogspot.com

  8. हमे तो यह बताइये कि इसे देखकर उन दिनो किसने कहा था "हाय मर जावाँ " ?

  9. अरे यह तो पाबला साहब है, क्या आप इन्हे नही जानते, चलिये दिल्ली आये हम आप को मिलायेगे इन से.

  10. ये जिनकी फोटो है ….
    क्या कमाल के इंसान थे जनाब
    बहुत हसमुख आदमी थे
    जब देखो तब हसी मजाक करते थे
    अरे यारों के यार थे

    लेकिन……..हाय किस्मत

    विधि का विधान

    बेचारे बाद में ब्लॉगर हो गए

  11. युवावस्था की छवि दिखाने के लिए शुक्रिया!

  12. मुझे तो सौ प्रतिशत अनिल पूसदकर लग रहे हैं आगे जैसी पंचो की मर्जी.

    रामराम.

  13. CORRIGENDUM:

    पी.सी.गोदियाल January 29, 2010 6:54 PM
    आप ही की जवानी की फोटो है !

    आजकल जिस तरह से विवाद खड़े हो जाते है इस देश में, तो यह स्पष्ट कर दूं कि मेरा यह कहने का कदापि आशय नहीं था कि पावला जी अब बुढ्ढे हो गए है 🙂

  14. अरे, ये तो पिंकू है। पक्का! पता नहीं पगड़ी कब पहन ली उसने!

  15. ये तस्वीर मेरी है और मेरे हाईस्कूल के दिनों की है।मेरे बचपन के मित्र खुशपाल जिसे उसके असली नाम की बजाय सब बिट्टू गिल के नाम से जानते हैं ने मुझे पगड़ी पहनाई थी और दोनो ने एक साथ और अलग-अलग तस्वीर खिंचवाई थी।वो असली सरदार था मगर तस्वीर मे उससे ज्यादा असली मै नज़र आता था।आपमे से बहुतों ने बिना हिंट मुझे पहचान लिया मै आप सब के प्यार का आभारी हूं।मै पाब्ला जी आपका भी आभारी हूं जो आपने आपने ब्लाग पर मेरी तस्वीर को जगह दी।यही प्यार तो सबको एक अदृश्य डोर से बांधे हुये और ये बंधन और मज़बूत हो इसी आशा के साथ आप सब का एक बार फ़िर आभार्।

  16. इसीलिए अपन ने सीधे यह पूछा था कि " ये कौन जमाने की फोटू है उनकी" मतलब अनिल जी की।

  17. ्सच कहें अनिल जी तो हम नहीं पहचान पाये थे और सोच रहे थे कि लोगबाग अनिल जी का नाम क्युं ले रहे हैं जब कि हमें तो पाबला जी लग रहे थे…।:)
    मतलब ये कि शरद कोकास जी ने जो प्रश्न पूछा है वो अब तक वेलिड है तो जवाब दें

  18. पाबला भाई,
    मैं हरियाणा और पंजाब में 22 साल रहा और सरदार भाइयों की पहचान पगड़ी की स्टाइल से किया करता था। आपकी वर्तमान पगड़ी की स्टाइल से तो नहीं लगता कि आपकी ही फ़ोटो है। परंतु आँखे ही बयाँ करती हैं कि जाने न मगर पहचाने नज़र।

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