अरे! मेरी शिकायत पर भारतीय रेल्वे ने इतना बड़ा फैसला ले लिया!!

जैसा कि आप पढ़ चुके हैं, इस वर्ष की शुरूआत में मुम्बई यात्रा पर निकलते हुए सुबह 7:45 पर आने वाली हावड़ा-मुंबई एक्सप्रेस में जब अपनी जगह संभाली और पूछ्ताछ की, तो पहला झटका लगा -रसोई यान नहीं है, No pantry car! हम अपने स्वभाव के चलते, रेल यात्रा में खाने पीने की भारतीय परंपरा को ठुकराते हुए, ऐलान कर चुके थे कि घर से कोई कुछ बना कर नहीं ले जायेगा, कष्ट नहीं उठाना है, घूमने फिरने जा रहे हैं, रेल में ही अलग स्वाद लिया जायेगा। माता जी की निगाहें, मानों कह रहीं थी – आ गया स्वाद! कंडक्टर ने आश्वासन दिया कि गोंदिया में भोजन की व्यवस्था कर दी जायेगी, जल्दी है तो राजनाँदगाँव या डोंगरगढ़ से कुछ खाद्य सामग्री लेकर काम चलाईये! गोंदिया में भोजन मिला। गरम था, लेकिन चम्मच गायब, पानी के गिलास गायब, अचार, नमक जैसी वस्तुएं भी नहीं दिखीं। पिता जी की निगाहों से बचते हुए, जब भुगतान करने लगा तो शिकायत करने पर जवाब मिला –गनीमत मानिए, खाना मिल गया। इस पर ज्ञानदत्त जी की टिप्पणी थी कि IRCTC के भरोसे स्वावलम्बन को तिलांजलि देना क्या ठीक है?! पूरी पोस्ट पढ़िए।

भिलाई वापस लौटने पर अपनी शिकायत को उचित मंच तक पहुँचाया गया। आज सुबह खबर लगी तो मुस्कुरा उठा। खबर थी कि सभी प्रमुख ट्रेनों से पेंट्रीकार हटाने के संबंध में रेलवे बोर्ड ने फैसला ले लिया है। सफर के दौरान ट्रेन यात्रियों को अब खाने का आर्डर पहले से देना होगा, अगर ऐसा नहीं कर पाते हैं और खाने का आर्डर बाद में देते हैं तो उन्हें किसी बड़े स्टेशन आने तक खाने का इंतजार करना पड़ेगा। इसके लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन (IRCTC) को निर्देश जारी करते हुए ट्रेन यात्रियों को खाना उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी सौंपी है।

बोर्ड के निर्देशों के तहत आईआरसीटीसी बड़े स्टेशनों पर बेस किचेन स्थापित करेगी। जहां पर तैयार भोजन ट्रेनों में सप्लाई किया जायेगा। शताब्दी और राजधानी ट्रेनों की तर्ज पर ट्रेन में तैनात कर्मचारी, यात्रियों से खाने का आर्डर पहले से लेकर बीच रास्ते में पड़ने वाले इन स्टेशनों के बेस किचेन को सूचना देगा। जिसके बाद ट्रेन के उस स्टेशन पहुंचते ही आर्डर के मुताबिक गरमागरम खाने के पैकेट ट्रेन में पहुंचा दिए जायेंगे। इसके बाद ट्रेन में मौजूद कर्मचारी उस खाने को यात्रियों के सामने परोसेंगे।

खबर में यह भी बताया जा रहा है कि रेलवे बोर्ड ने ट्रेनों की पेंट्रीकार में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता में कमी और कर्मचारियों द्वारा यात्रियों के साथ अभद्रता की शिकायतों को देखते हुए यह फैसला लिया है। आईआरसीटीसी को जिम्मेदारी दी है कि वह बेस किचेन में बनने वाले खाने की क्वालिटी पर प्रमुख रूप से नजर रखे। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इससे खाने की क्वालिटी में सुधार तो आयेगा ही साथ ही यात्रियों को गरमागरम व हाईजिनिक खाना मिलेगा। अभी पेंट्रीकार में बिक्री का अंदाज लगाते हुए एक साथ भोजन पहले से तैयार कर लिया जाता है।

खैर, यह तो था एक खबर को, हास्य के साथ मिलाकर बताने का अंदाज। अब आप बताईये। इसके लागू हो जाने पर, ट्रेन में जाने के पहले आपको मेरी याद आयेगी न?

अरे! मेरी शिकायत पर भारतीय रेल्वे ने इतना बड़ा फैसला ले लिया!!
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अरे! मेरी शिकायत पर भारतीय रेल्वे ने इतना बड़ा फैसला ले लिया!!” पर 18 टिप्पणियाँ

  1. Bilkul yaad aayegi uncle..
    khaskar ke agar ham yahan se ghar train se gaye to pakke se yaad aayegi.. 🙂
    44 ghante ka rasta jo hai..

  2. अब तो मामला कुछ और भी कन्फ्यूजिया गया !

  3. प्रसन्न रहें और भगवान पर भरोसा रखें।

  4. भाई,हमें तो ट्रेन पर मिलने वाले भोजन पर कभी भरोसा नहीं रहा। वैसे भी कहा जाता है कि शेर अपने भोजन का इंतजाम खुद ही करता है।

  5. Mai pehlebhi aapke blogpe aayee thi…shayad tippanee bhee dee thi…lekin ab nahee dikh rahee…khair…aapka ye lekh, jis tareeqese pesh hua hai, vilakshan pathneey ban gaya hai..!Kab padhna shuru kiya aur “yatra” kab khatm huee, samajhme hee nahee aayaa…laga kuchh der aur “gaadee” chaltee to musafiree kar lete..maqam itnaa jald kyon aa gaya?

    Mere blogs:( Shayad aapko jaankaaree na ho, anyatha na le, ye vinamr binati hai).

    “Kahanee”

    “Kavita”

    “Aajtak Yahantak”

    “Sansmaran”

    “Baagwaanee”( sirf maloomat nahi, jeevanke parati ek nazariya)

    “Gruhsajja”( ye mera pesha hai)

    “Chindichindi”( Recycling dwara, kalatmakta aur paryawaran kaa bachaw)

    “Fiber art”( Isme apnee kalaki pics load kar rahee hun..Bharatme mai akeli fiber artist hun)

    Shukrguzareeke saath
    Shama

  6. बी एस पाबलाजी
    टेशन नही लेने का मै हू ना !!!!
    चुनाव के दिन अपने मत का सही उम्मीदवार के पक्ष मे प्रयोग करके सभी ठिक-ठाक कर दुगा।
    हे प्रभु का नमस्कार्।

  7. बी एस पाबलाजी
    टेशन नही लेने का मै हू ना !!!!
    चुनाव के दिन अपने मत का सही उम्मीदवार के पक्ष मे प्रयोग करके सभी ठिक-ठाक कर दुगा।
    हे प्रभु का नमस्कार्।

  8. बी एस पाबलाजी
    टेशन नही लेने का मै हू ना !!!!
    चुनाव के दिन अपने मत का सही उम्मीदवार के पक्ष मे प्रयोग करके सभी ठिक-ठाक कर दुगा।
    हे प्रभु का नमस्कार्।

  9. बी एस पाबलाजी
    टेशन नही लेने का मै हू ना !!!!
    चुनाव के दिन अपने मत का सही उम्मीदवार के पक्ष मे प्रयोग करके सभी ठिक-ठाक कर दुगा।
    हे प्रभु का नमस्कार्।

  10. बी एस पाबलाजी
    टेशन नही लेने का मै हू ना !!!!
    चुनाव के दिन अपने मत का सही उम्मीदवार के पक्ष मे प्रयोग करके सभी ठिक-ठाक कर दुगा।
    हे प्रभु का नमस्कार्।

  11. बी एस पाबलाजी
    टेशन नही लेने का मै हू ना !!!!
    चुनाव के दिन अपने मत का सही उम्मीदवार के पक्ष मे प्रयोग करके सभी ठिक-ठाक कर दुगा।
    हे प्रभु का नमस्कार्।

  12. बी एस पाबलाजी
    टेशन नही लेने का मै हू ना !!!!
    चुनाव के दिन अपने मत का सही उम्मीदवार के पक्ष मे प्रयोग करके सभी ठिक-ठाक कर दुगा।
    हे प्रभु का नमस्कार्।

  13. बी एस पाबलाजी
    टेशन नही लेने का मै हू ना !!!!
    चुनाव के दिन अपने मत का सही उम्मीदवार के पक्ष मे प्रयोग करके सभी ठिक-ठाक कर दुगा।
    हे प्रभु का नमस्कार्।

  14. बजरंगबली की जै। हम तो झंझट ही नही पाल्ते रेल मे सफ़र का।अपनी गाड़ी,अपना टाईम-टेबल अपनी मर्ज़ी,अपनी पसंद का ढाबा और खना भी जब मन चाहे तब्।

  15. बड़ी खुशी की बात है कि आप की शिकायत पर गौर किया गया, वैसे शिकायत करने का ये उचित मंच कौन सा था। हमें याद है एक बार ए सी डब्बे में सफ़र कर रहे थे और डब्बे में इतने कोकरोच थे कि हम सारी रात सो न सके सिर्फ़ उन्हें काकरोच विचररण देखते रहे, शायद बड़ौदा से बोम्बे का सफ़र था। ऐसे में ट्रेन में कुछ भी खाने का मन ही नहीं करता। लेकिन ये भी सच है कि अब घर से कुछ ले कर चलना झंझत लगता है तो हम भी रेलवे भरोसे होते हैं।
    रेलवे अधिकारी कह रहे हैं ‘भगवान पर भरोसा रखिए’ तब तो राम ही राखे। अब ट्रेन के सफ़र के लिए भी पहले मंदिर जाना होगा, शक्कर दही खाना होगा…॥:)

  16. भैया बेड-रोल भी ठीक करवा दीजिए। राजस्‍थान की ट्रेनों में तो कम से कम बहुत ही बुरे हाल हैं।

  17. हवाई जहाज़ कम्पनियों की ही तरह की कैटरिंग क्वालिटी आज रेलवे को भी चाहिए. जैसे रेलवे अपने प्लेटफार्मों पर टूटी का पानी और बंद बोतल में पानी, दोनों ही देती है. ठीक वैसे ही, ट्रेनों की पेंट्रीकार में भी बनाओ और प्रोफेशनल कैटरिंग भी कराओ. इसमें किसी रेलमंत्री को वोटों का कोई नुक्सान नहीं ही होना चाहिए.

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