आईये हम सब मिलकर विलाप करें




कल रात मुम्बई में हुए, एक और विचलित करने वाले घटनाक्रम में मारे गये तमाम लोगों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। हमारी शासक मंडली आज दुःख जतायेगी और उसके बाद परसों फिर से दुख जताने की तैयारी करेगी।

तो, आईये हम भी दिन की शुरूआत करें, इन सब !@#$%^&* …. का नाम लेकर, आंखों में आँसू लिए अपने-अपने विलाप प्रलाप की।

इसके अलावा हम आप कुछ कर सकते हैं क्या?

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आईये हम सब मिलकर विलाप करें” पर 10 टिप्पणियाँ

  1. आप की यह पोस्ट आज की सब से सख्त है। जब लोग कुछ नहीं कर सकते तो विलाप करते हैं। सब से अजीब बात है कि जब करने को बहुत कुछ है तब भी हालत ये ही है कि विलाप के अलावा कुछ नहीं। जनता के स्तर पर जनता के संगठनों के स्तर पर ही कुछ आरंभ होना चाहिए तभी हालात सुधार की ओर बढ़ने की गुंजाइश है।

  2. सरकार सेना और संतो को आतंकवादी सिद्ध करने जैसे निहायत जरूरी काम मे अपनी सारी एजेंसियो के साथ सारी ताकत से जुटी थी ऐसे मे इस इस प्रकार के छोटे मोटे हादसे तो हो ही जाते है . बस गलती से किरेकिरे साहब वहा भी दो चार हिंदू आतंकवादी पकडने के जोश मे चले गये , और सच मे नरक गामी हो गये , सरकार को सबसे बडा धक्का तो यही है कि अब उनकी जगह कौन लेगा बाकी पकडे गये लोगो के जूस और खाने के प्रबंध को देखने सच्चर साहेब और बहुत सारे एन जी ओ पहुच जायेगी , उनको अदालती लडाई के लिये अर्जुन सिंह सहायता कर देगे लालू जी रामविलास जी अगर कोई मर गया ( आतंकवादी) तो सीबीआई जांच करालेगे पर जो निर्दोष नागरिक अपने परिवार को मझधार मे छोड कर विदा हो गया उसके लिये कौन खडा होगा ?

  3. बहुत दर्दनाक मंजर …और हम लाचार और बेबस सच कहा विलाप ही कर सकतें हैं , और श्रधान्जली अर्पित कर सकतें हैं.

  4. दरअसल शुरूआत में एसा लगा ही नहीं था कि ये आतंकवादी हमला है एसा माना गया कि ये कोई गैंगवार है इसलिये मामला क्राइम ब्रांच के हवाले था. हेमन्त करकरे भी वहां पहुंच गये थे और उन्हें मीडिया के कैमरों के सामने दो पुलिसवालों ने बुलैट प्रूफ जैकेट पहनाई.
    हेमन्त करकरे तो सिर्फ “हिन्दू आतंकवाद” विशेषज्ञ थे, वहां क्यों गये?

    लेकिन विलाप क्यों करे? परिवर्तन के लिये कदम क्यों नहीं उठाये़

  5. सिर्फ़ यही कर सकते है अब देश अफगानिस्तान या पाकिस्तान बनने से कुछ कदम ही दूर है …….मुलायम सिंह ओर अमर सिंह जैसे नेता ..ओर तमाम सो कॉल्ड धार्मिक नेता अब अपने घरो में दुबके होगे ..आतंकवाद कोई हँसी ठठा का खेल नही है इसे सख्ती से निपटना होगा …ओर जो भी नेता या पीर पैगम्बर इसके रास्ते में आये उसे लतियाना पड़ेगा…..अमेरिका की नीति में कही सब दलों की एक जुटता है देश के प्रति……..अब विलाप करने का समय नही है हमें आप को जाति-प्रांत से ऊपर उठकर ऐसे लोगो को सत्ता में लाना होगा जिनके लिए देश पहले है ओर जो कड़े कदाम उठाना जानते है

  6. रोयें,कल फ़िर रोना है, रोने को मजबूर.
    तन्त्र कहेगा फ़िर वही, जिसके हित मशहूर.
    तन्त्र बङा मशहूर,किसी को दोष ना देगा.
    सिर्फ़ हवा में लहरा कर मुक्का तानेगा.
    कह साधक इस दुष्ट-तन्त्र से कुछ ना होना.
    हिन्दू जब तक नहीं उठेगा, तब तक रोना.

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