आधी सदी का सफ़र और एक नई शुरूआत

आज 21 सितंबर को, इस धरा पर मानव जीवन का सफ़र तय करते पाश्चात्य गणना पद्धति के हिसाब से आधी सदी का वक्त बीत गया। इस मौके पर कल रात माँ बहुत याद आई। सिर्फ़ कल्पना ही कर पाया कि वह कैसे बलैंय्या लेती अपने इस बच्चे की। इससे पहले मन कुछ और उदास होता, दादी की डाँट सुन मुस्कुराते हुए फिर चल पड़ा अपने कर्मपथ पर।

दादी 1987 में ही दुनिया छोड़ गई थी लेकिन आज भी मेरे सामने अपनी प्यार भरी डाँट के साथ तब हाजिर होती है जब उदासी छाती है या तबीयत बहुत खराब हो जाती है। मेरा यह मानना है कि उसी मीठी डाँट की बदौलत मैं अपनी ऊर्जा समेटे फिर उठ खड़ा होता हूँ। सारा परिवार यह बात जानता है।



आधी सदी के इस वक्त की न जानें कितनी ही अनछुई बातें उमड़-घुमड़ कर याद आ रहीं हैं। बस्तर के प्रारंभ होते स्थान पर कच्चे लोहे की एक खदान के उस समय भी सर्वसुविधायुक्त अस्पताल में जब अलसुबह पौने छह: पाउंड के नवजात की पहली रूलाई फूटी तो सारे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।

भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा संचालित प्राइमरी स्कुल का पहला दिन मेरी आँखों के सामने अक्सर कौंध जाता है। आज भी जब उस हॉल को देखता हूँ तो पीले रंग की टेरीकॉट की शर्ट और हल्के नीले रंग की निक्कर वाले बलि के बकरे समान जार जार रोते बच्चे को घसीटते हुए ले जाते पाटिल गुरुजी जीवंत हो उठते हैं।

मैट्रिक पास की 1977 में। हमारा 23 लोगों का समूह था। उनमें से लगभग 13 सहपाठी यहीं भिलाई इस्पात संयंत्र और विभिन्न सरकारी संस्थानों में सेवारत हैं। विवेक शेष, संजय चावला, स्वप्न चक्रवर्ती जैसे सहपाठियों से मिले अर्सा हो गया। ये विभिन्न बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में उच्चाधिकारी हैं।

इलेक्ट्रौनिक्स में ज़ुनून की हद से लगाव था तो रायपुर में कॉलेज की पढ़ाई अधूरी छोड़ रूचि अनुसार तकनीकी शिक्षा का दामन थामा जो बाद में आजीविका का आधार बना। इसी क्रम में कुछ माह लुधियाना भी रहना हुआ।

30 वर्ष पहले, सितंबर 1981 में भिलाई स्टील प्लांट में कदम रखे थे जो आज भी चलायमान हैं

लगातार होते पारिवारिक हादसों का एक परिणाम यह हुआ कि माँ की ज़िद के चलते साढ़े तेईस की उमर में विवाह-बंधन में बंधना पड़ा। 25 वर्ष के हो चुके संस्कारी जुड़वाँ बच्चे (पुत्र-पुत्री) आज हर रूप से स्वाबलंबी हैं।

इस आधी सदी की अपनी खट्टी मीठी सैकड़ों यादें हैं। इंटरनेट की दुनिया से जुड़े हुए शानदार 6 वर्षों के बाद अब अपनी वेबसाईट पर इन्हीं यादों को सजोने का इरादा है। साथ ही साथ अपनी रूचि के क्षेत्रों से मिले अनुभव भी यहीं होंगे।

आभासी दुनिया में पनपे अपरिभाषित संबंधों ने जीवन का एक और पह्लू देखने में मेरी बहुत सहायता की है। कई पारिवारिक मित्र यहीं बने हैं। शुभचिंतकों ने हमेशा मनोबल बढ़ाया है। विध्वंसकों ने भी हौसला बनाए रखने में बहुत मदद की है।

जीवन के इस मोड़ पर आप सभी का दिल से धन्यवाद। एक और सफ़र शुरू किया जाए उत्तरार्ध का।

आधी सदी का सफ़र और एक नई शुरूआत
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आधी सदी का सफ़र और एक नई शुरूआत” पर 39 टिप्पणियाँ

  1. जय जय !
    जीवन बंधनों का ही दूसरा नाम है ……..जीवन में आये इस जन्मदिन की लख लख बधाइयां !
    हैप्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्पी बड्डे जी !

  2. पाबला जी,
    आरज़ू चाँद सी निखर जाए,
    जिंदगी रौशनी से भर जाए,
    बारिशें हों वहाँ पे खुशियों की,
    जिस तरफ आपकी नज़र जाए।
    जन्‍मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!
    ——
    मायावी मामा?
    रूमानी जज्‍बों का सागर..
    टिप्पणीकर्ता Dr. Zakir Ali Rajnish ने हाल ही में लिखा है: ब्‍लॉगवाणी: रूमानी जज़्बों का सागर है ‘प्रतिभा की दुनिया’My Profile

  3. आभासी दुनिया में पारिवारिक मित्र .. वाह !!
    जीवन के उत्तरार्ध का सफर सफल और सुखमय हो ..

    बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं !!

  4. पाबला जी जन्म दिन की एक बार फ़िर से ढेर सारी शुभकामनाएं, आने वाली जिंदगी खुशियों से लबालब हो ।
    कल जब आप को बधाई देने के लिए फ़ोन किया था तो मन में एक जिज्ञासा तो थी कि पूछ लूँ कित्ते सावन बीत गये लेकिन फ़िर संकोचवश पूछा नहीं आज आप की पोस्ट से वो जिज्ञासा भी पूरी हो गयी:)।
    एक बार फ़िर बधाई

    • किसी ने पूछा कितने वर्ष?
      किसी ने पूछा कितने बसंत?
      किसी ने पूछा कितने सावन?
      और कोई तो केवल यह पूछ कर चुप हो गया कि
      कित्ते?

      सबको एक ही ज़वाब मिला, 50! 🙂

      शुभकामनाओं हेतु आभार अनिता जी

  5. आपका ब्लॉग सुबह से अब जाकर खुला है । गूगल डरा रहा था बार बार कि गड़बड़ है ।
    खैर अब तो खुल गया ।
    स्वर्ण जयंती की हार्दिक बधाई पाबला जी ।

    • खुद गूगल मुझे बताता था कि सब कुछ ठीक है कोई गड़बड़ नहीं
      लेकिन आने वालों को डराता था 🙂
      कुछ घंटो में उसे भी समझ आ गया
      सब अपने ही हैं

      शुभकामनाओं हेतु आभार दराल सा’ब

  6. जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें पाबला जी। आपके संस्मरण रोचक हैं, ईश्वर करे आपका जीवन यूँ ही मंगलमय बना रहे।
    टिप्पणीकर्ता ePandit ने हाल ही में लिखा है: ई-पण्डित आइऍमई अपडेट – संस्करण १.२, वॉकमैन-चाणक्य फॉण्ट शामिलMy Profile

  7. पाबला जी देरी से आने के लिये माफ़ी , आपको जन्मदिन कि ढेर सारी शुभकामनाये . ईश्वर आपकी सेहत को अच्छा बनाए रखे ,.

    आपका
    विजय

    • अरे यहाँ तो अब आएँ हैं आप
      जनमदिन वाले मौके पर तो आप 100 किलोमीटर दूर से दौड़े चले आए थे गले लगाने

      मेरी खुशियों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो कर आप सभी ने मेरा दिन गुलज़ार कर दिया

      आभार आप सभी का

  8. जन्मदिन की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं … सर जी … २ दिन बाद नेट चल पाया है … उस दिन वैसे आपसे बात हो गई थी पर यहाँ भी दर्ज होना जरुरी है !

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