आने वाली पीढ़ियाँ हमें तिरस्कृत नज़रों से देखेगी

पर्यावरण वैज्ञानिकों ने भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग की भयावह तस्वीर पेश करते हुये कहा है कि वर्ष 2030 तक यह लोगों को ध्रुवीय क्षेत्रों पर शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर कर देगा। ओलंपिक खेल सिर्फ साइबर स्पेस पर आयोजित होंगे और आस्ट्रेलिया का मध्य क्षेत्र पूरी तरह निर्जन हो जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण के लिये काम करने वाली ब्रिटिश संस्था फोरम फार द फ्यूचर और ह्रूलिट पैकर्ड प्रयोगशाला, के वैज्ञानिकों ने अपनी यह ताजा रिपोर्ट पर्यावरण को हो रहे नुकसान की ओर लोगों का ध्यान खींचने और इससे निबटने के उपायो को लेकर जन जागरकता अभियान के लिये जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक संकट ने दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं की जिस कदर चूलें हिला दी है उसी तरह एक दिन ग्लोबल वार्मिंग की समस्या भी अर्थव्यवस्थाओं में ऐसा ही भूचाल लाएगी।

फोरम के अध्यक्ष पीटर मैडन के मुताबिक यह रिपोर्ट कोरे कयासों पर नहीं बल्कि पूरी तरह वैज्ञानिक अनुसंधान और तथ्यों पर आधारित है। यह धरती की भविष्य की तस्वीर पेश करती है जो निश्चित रूप से अच्छी नहीं कहीं जा सकती।श्री मैडन ने कहा कि चीजों को सुधारने का अभी भी वक्त है लेकिन इसके लिये पारंपरिक ऊर्जा स्रोतो के स्थान पर स्वच्छ और हरित ऊर्जा के इस्तेमाल को बढावा देना कम कार्बन उत्सर्जन वाली गतिविधियों पर ध्यान देना और प्राकृतिक स्रोतों के अंधाधुंध दोहन पर तत्काल अंकुश लगाना होगा।

उन्होंने पूरे हालात पर दिलचस्प टिप्पणी करते हुये कहा ‘भविष्य के इतिहासकार हमारे युग को जलवायु परिवर्तन के युग के नाम से पुस्तकों में दर्ज करेंगे। हो सकता है वे हमारी गिनती इस युग के महानायकों के रूप में करें या फिर उसी तिरस्कृत नजरों से देखें जिस तरह हम सांमती युग में दासप्रथा को बढावा देने वालों को देखते आए है।

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एक टिप्पणी on “आने वाली पीढ़ियाँ हमें तिरस्कृत नज़रों से देखेगी

  1. Insanon ko is disha men sochana to hoga, behtar hai ki samay rahte socha jaye, sochne ki liye badhy hon tab sochen usme maza nahin. aapki post upyogi jankariwali hai.

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