आ देखें ज़रा किसमें कितना है दम: ब्लैकमेल- भाग 2

दर्शन शास्त्र की एक उक्ति बहुत प्रचलित है कि जो सोचा जाए वह कभी नहीं होता! बस इसी तरह मेरे साथ भी हो गया। आज आलेख इस विषय पर आना था कि आखिर गंभीर, स्थापित ब्लॉगर मुफ्त का गूगल मंच छोड़कर, हजारों रूपए खर्च कर अपनी खुद की वेबसाईट पर क्यों चले जाते हैं? लेकिन पिछले एक आलेख, महिला ब्लॉगर ने ब्लैकमेल किए जाने के बाद ब्लॉगिंग छोड़ी के पश्चात कई जिज्ञासुयों ने संपर्क किया कि अगर कंप्यूटर को फॉर्मेट करा दिया जाए तो खतरा पूरी तरह टल जाएगा ना? इधर अनिता कुमार जी ने पूछ लिया कि कोई और सॉफ़्टवेयर भी होगा जिस पर ये स्पाईबोट वाला सॉफ़्टवेयर काम न करे और वो अपना ब्लैक मेल आराम से करता रहे। तब? मैंने सोचा आज इसी पर लिखा जाए।
दरअसल, इस तरह के खुराफाती काम करने वालों के लिए तकनीक ने बहुत से रास्ते खोल रखें हैं। ऐसा ही एक मामला देखने में आया था जिसमें किसी तरह के सॉफ्टवेयर का सहारा नहीं लिया गया और सारा खेल एक छोटे से मासूम दिखने वाले पुर्जे की मदद से बेख़ौफ़ चलता रहा।

यह बात एक इंटरनेट कैफे की है। जहाँ छापा मार कर एक ऐसे गिरोह को दबोचा गया जो वहाँ आने वाले किशोर-किशोरियों द्वारा भेजे लिए गए संदेशों के सहारे उन्हें परेशान करता था, इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग करने वालों के पासवर्ड जान कर दुरूपयोग करता था, व्यावयायिक अधिकारियों द्वारा भेजी जाने वाली जानकारियों को ऊँचे दामों पर बेचता था।

ऐसे ही किसी नाजुक मसले पर किसी ने पुलिस में शिकायत की और संयोग से एक पुलिस अधिकारी ऐसा था जिन्हें इस तरह के तकनीकी मामलों की खासी जानकारी थी। छापेमारी में मिला कुछ नहीं लेकिन जब कैफे वालों पर कड़ाई बरती गई तो वे भी दंग रह गए असलियत जान कर।

 

usb ps/2 converter bspabla

वास्तविक PS/2-USB की-बोर्ड कनवर्टर

 

आम तौर पर कंप्यूटर की-बोर्ड दो तरह के होते हैं एक कहलाता है पुरानी तकनीक वाला PS/2 और दूसरा होता है नई तकनीक का USB। अब कहीं कहीं ऐसा होता है कि की-बोर्ड तो पुरानी तकनीक का है और कंप्यूटर एकदम नया। अब PS/2 वाले की-बोर्ड को उपयोग में लाने के लिए एक छोटा सा पुर्जा मिलता है जिसमें एक सिरे पर PS/2 की-बोर्ड लगा कर दूसरे सिरे पर USB वाले हिस्से को कंप्यूटर में लगा कर काम किया जा सकता है।

 

usb ps/2 cpu bspabla

कंप्यूटर CPU के पीछे लगे की-बोर्ड आधारित की-लॉगर कुछ ऐसे दिखते हैं

 

लेकिन खुराफात के लिए जो जुगाड़ होता है वह हूबहू वैसा ही दिखता है जैसा पुराना की-बोर्ड को चलाने के लिए PS/2-USB वाला पुर्जा होता है। अब भले ही की-बोर्ड-कंप्यूटर सामान्य तरीके से काम कर रहे हों लेकिन इस खुराफाती पुर्जे को की-बोर्ड और कंप्यूटर के बीच लगा दिया जाए तो यह की-बोर्ड पर टाईप किए जाने वाले हर अक्षर को रिकॉर्ड करते जाता है।

माइक्रोप्रोसेसर युक्त यह पुर्जा इतना सक्षम है कि अगर किसी कारण बिजली चली जाए तो भी पूरा डाटा समेटे रखता है ठीक पेन ड्राइव सरीखे। और 2 MB की भंडारण क्षमता वाला यह छोटा सा जुगाड़ भी पूरे वर्ष तक का वह डाटा सहेजे रखता है जो की-बोर्ड पर लिखा गया है। अब जितनी क्षमता बढ़ेगी उतना समय भी बढ़ते जाएगा!

कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाला घर पर हो, किसी कैफे में हो, रेलवे स्टेशन पर हो, एयरपोर्ट पर हो या होटल में हो, आम तौर पर सीपीयू के पीछे झांकने की जहमत नहीं उठाता। भीड़ भरे माहौल में तो बिलकुल नहीं। वह अगर इसे देख भी लेता है तो सामान्यतया किसी तरह का शक नहीं करेगा। अब जिसने यह पुर्जा अपनी स्वार्थ-पूर्ति के लिए लगाया है वह कभी भी इसमें एकत्रित डाटा देख सकता है, इस पुर्जे को झांकने के लिए दिया गया पासवर्ड बदल सकता है, किसी ख़ास शब्द पर आधारित डाटा निकाल सकता है, इसका कार्य करना बंद कर सकता है, सारा डाटा मिटा सकता है।

 

ps2 usb spy bspabla

की-बोर्ड आधारित की-लॉगर के विभिन्न रूप

 

ऐसा भी नहीं है कि यह केवल एक ही तरीके का हो। यह दोनों सिरों पर USB वाला भी हो सकता ही

अब कोई क्या कर लेगा इस मामूली सी वस्तु के नतीजों के सामने?

वैसे इस तरह की जासूसी के बहुत से सदुपयोग भी हैं। छोटे, किशोर बच्चे इंटरनेट पर क्या करते हैं? ऑफिस के कर्मचारियों की गतिविधियाँ क्या हैं? किसी नए सॉफ्टवेयर पर उपयोगकर्ता किस तरह का विचरण करता है? कानून व्यवस्था के रखवाले संदिग्धों पर निगाहबीनी के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

बात यहीं तक नहीं है, तकनीक के इससे भी अधिक रास्ते हैं उनकी चर्चा फिर कभी

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आ देखें ज़रा किसमें कितना है दम: ब्लैकमेल- भाग 2” पर 30 टिप्पणियाँ

  1. मैं सोच रहा था… दुनिया कहाँ-से-कहाँ पहुँच गयी!
    मैं किसी दुसरे कम्प्युटर पर लॉगिन और पासवर्ड भरते समय सिर्फ वर्चुअल कीबोर्ड का उपयोग करता हूँ.

    • :Approve:
      किसी भी सामान्य कंप्यूटर पर
      जहां टाइप करना है उसे सामने रख कर
      Start पर क्लिक कर
      Run कमांड द्वारा
      OSK लिखा जाए
      तो
      आभासी की-बोर्ड सामने होगा

  2. सही कहा आपने, शातिर लोग कोई न कोई रास्‍ता निकाल ही लेते हैं। अरे ठीक वैसे ही, जैसे ये हमारे ब्‍लॉग पर पाण्‍डे जी ने अपना शातिरपना दिखाया।

    वैसे इस जानकारी के लिए शुक्रिया। मुझे तो पहली बार पता चला।
    टिप्पणीकर्ता Dr. Zakir Ali rajnish ने हाल ही में लिखा है: इतनी घृणा कहाँ से लाए पाण्‍डे जी?My Profile

  3. जो ‘खास’ हैं उनको इस खतरे की फ़िक्र रहे तो समझ में आता है पर हम जैसे ‘नंगा क्या नहाये क्या निचोड़े शैली के आम’ ब्लागर्स से कोई क्या ले जाएगा 🙂

    आफेंस होते ही है डिफेन्स तोड़ने के लिए ! आफेंस, डिफेन्स की ये चूहा दौड़ क़यामत तक बनी ही रहेगी ! रुपये पैसे इज्जत आबरू का ख्याल रहे बाकी सब लुट भी जाये तो क्या 🙂

    हमारा क्या ? हम तो लुटे हुओं को ही सेलेब्रेटी मानने पे मजबूर होंगे 🙂

    इसके बाद हम पर लानत जो लूटे ना गये 🙂

    हमें तो स्पाई बोट लगाने को लेकर भी लैंगिक भेद भाव सूझ रहा है यानि हमारा काम इसके बगैर भी चल सकता है 🙂

    बहराल सावधान करने के लिए शुक्रिया !
    टिप्पणीकर्ता ali syed ने हाल ही में लिखा है: नक्श-ए-ख्याल दिल से मिटाया नहीं हनोज़ !My Profile

  4. बहुत अच्छी जानकारी | धन्यवाद 🙂

    परन्तु – हम जितना ही aware होते जाएँ, technology हमसे तेज़ गति से आगे बढती है | बेहतर यही होगा कि हम ऐसा कुछ करें ही न कि कोई हमें blackmail कर सके |

  5.  शुक्रिया पाबलाजी, इस सूचना के लिए और हम सब को सचेत करने के लिए।
    वैसे भी हम इंटर्नेट कैफे में कभी जाते नहीं पर भविष्य में यदि किसी मजबूरी के कारण जाना पडा तो इस बात का खयाल रखेंगे
    जी विश्वनाथ

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