इंटरनेट पर आपका लिखा हुआ कुछ भी बदला जा सकता है, संदेश पहुँचने के पहले!

एकाएक मुझे फिल्म ‘बैराग’ का गीत याद आ रहा है कि ‘पीते पीते कभी कभी ये जाम बदल जाते हैं… लोग ये कहते हैं कि बंद लिफ़ाफ़े में भी दिल के पैगाम बदल जाते हैं…’

दरअसल अभी अरविन्द मिश्रा जी वाला किस्सा चल ही रहा था कि डॉ महेश सिन्हा की एक ई-मेल आई जिसमें जिज्ञासा थी कि इस तिकोन का अर्थ क्या है?

यह तिकोना चिन्ह गूगल क्रोम में प्रदर्शित होता है। इसका अर्थ यही है कि जिस पृष्ठ पर यह दिखता है उसकी सामग्री सुरक्षित नहीं हैं तथा इसके अंशों को, इंटरनेट पर आते-जाते पढ़ा जा सकता है तथा किसी बदनीयत हैकर द्वारा इस तरह परिवर्तित/ संशोधित किया जा सकता है कि पृष्ठ पर दी गई सामग्री पूर्णतया या आंशिक रूप से बदल जाए।

फिलहाल इस त्रिकोण को ब्लॉगर पर टिप्पणी देते हुए ऊपरी दाएँ हिस्से में देखा जा सकता है।
इसका सीधा अर्थ यही हुआ कि कोई ब्लॉगर अपनी असली प्रोफ़ाईल से भी टिप्पणी भेजे तो रास्ते में ही वह टिप्पणी बदली जा सकती है!
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इंटरनेट पर आपका लिखा हुआ कुछ भी बदला जा सकता है, संदेश पहुँचने के पहले!” पर 8 टिप्पणियाँ

  1. इसी बहाने कुछ तकनीकी संवेदीकरण तो हो रहा है !

  2. ये त्रिकोण होते ही विवादास्पद हैं.
    एक लाल त्रि कोण ने एमरजेन्सी के दिनों में पुल्लिंग को उभयलिंग बना दिया था अब यह पीला त्रिकोण ब्लागर पर निगाहें गड़ाए बैठा लगता है 🙂

  3. हे भगवान, ये गटरगंगा और कहां तक जायेगी? ये हो क्या रहा है?

    रामराम

  4. पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त !
    कोई भी ब्राउज़र सुरक्षित नहीं ?

  5. टिप्पणियां यूँ भी बदली जा सकती हैं . …आश्चर्य … जानकारी देने का आभार …

  6. यह तो बेहद गंभीर चेतावनी है!

    [हमें तो इस ब्लॉग का मालूम नहीं था..अरविन्द जी की पोस्ट से यहाँ तक पहुंचे ..बहुत ही काम की जानकरियां हैं यहाँ.]

  7. समाधान भी बताइए हुजूर…।

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