फैलते जा रहा है इंटरनेट पर झूठ का पिटारा

नेपाल में आए भूकंप को तीन दिन हो चुके थे जब शाम को ऑफिस से आ कर मैंने कंप्यूटर ऑन किया. चाय की चुस्कियां लेते  ईमेल्स देखने के बाद फेसबुक का रूख किया तो सबसे पहले श्रीगंगानगर के चंदर कुमार सोनी जी के स्टेटस पर नज़र पड़ी.

एक खबर दिखाते हुए लिखा था कि दैनिक भास्कर ने चीन में 2012 में आये भूकंप के समय छापी गयी फोटो को वर्तमान में नेपाल में आये भूकंप की दिखा कर जनता को बेवकूफ बनाया है. दोनों फोटो आप खुद देख सकते है.

इंटरनेट पर झूठ का पिटारा खुलता ही रहता है. मेरी दिलचस्पी जगी कि आखिर सच क्या है और शुरू हो गई खुराफ़ात.

दैनिक भास्कर के राजस्थान संस्करण में दो बच्चों की तस्वीर के साथ बताया गया था कि एक वायुसेना अधिकारी ने हालिया नेपाल भूकंप दौरान थामेल गाँव में दो बच्चों को रोते देखा. खोजबीन करने पर उनके माता-पिता के मारे जाने की जानकारी मिली … और ये यतीम हो गए

नेपाली बच्चों के इंटरनेट पर झूठ का ताज़ा सच

जबकि मैंने इंटरनेट पर उठापटक करने के बाद पाया कि इस तस्वीर का नेपाल तो क्या किसी भूकंप से कोई लेना देना नहीं है. इस तस्वीर को तो एक फोटोग्राफर ने यूं ही लिया था और यह सन 2007 की है.

भास्कर द्वारा इंटरनेट पर झूठ

इस तरह की भ्रामक तस्वीर व तथ्यों की सहायता से भूंकप की त्रासदी को भुनाने की भर्त्सना करते टिप्पणियाँ आने लगीं.

दो घंटे बाद ही सतना की वंदना अवस्थी दुबे जी ने खबर दी कि इसी तस्वीर को बार बार दिखाते इण्डिया टीवी पर एक रिपोर्ट चलाई जा रही है. मैंने यू-ट्यूब से वह रिपोर्ट खोज निकाली.

इण्डिया टीवी और इंटरनेट पर झूठ

मुम्बई की रश्मि रविजा जी का गुस्सा फूट पडा कि ….कोई फिल्म बना रहे हैं क्या कि लोगों के आँखों से आंसू निकलवाने है...लानत है.

फिर उन्होंने ही बताया कि दूसरे दिन टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ने भी वही तस्वीर नेपाल के नाम पर छाप दी और हैरानी जताई कि जब आप इसकी सच्चाई पता कर सकते हैं तो ये इतना बड़ा राष्ट्रीय अखबार नहीं कर सकता…आश्चर्य है. फिर पता चला कि अमर उजाला भी भास्कर की राह चल चुका. और भी कई अखबारों ने इसे नेपाल की बता कर छापा.

आखिरकार इस तस्वीर के फोटोग्राफर ने 5 दिन बाद ट्वीट कर पुष्टि कर दी कि मेरी खोजबीन सही है.

 

इंटरनेट पर झूठ की पुष्टि

इस लेख को लिखे जाने के पहले ही जलगांव के शेखर पाटिल जी ने ‘सैल्यूट’ करते बताया कि मीडिया की यह ‘चोरी’ आपने छह दिन पहले ही पकड ली थी. बीबीसी ने उसे खबर बनाया है.

ऐसे ही ना जाने कितनी ही तस्वीरों, वीडियो को किसी भी मौके से जोड़ कर नई कहानी बना दी जाती है. एक नजर उन पर भी डाली जाए.

मलेशियाई विमान का इंटरनेट पर झूठ

पिछले वर्ष, मलेशियन एयरलाइन्स के MH370 विमान दुर्घटना के बाद नई दुनिया अखबार ने एक खबर छापी कि इस विमान का अपहरण कर पाकिस्तान के एक अज्ञात स्थान पर रखा गया है. साथ ही आसमान से ली हुई एक तस्वीर भी दिखा दी.

मलेशियाई विमान का इंटरनेट पर झूठ

 

मुझे ध्यान आया कि इस फोटो को तो मैंने कई साल पहले देखा था. तलाशा तो आखिर मिल गया फोटो का वह ‪ठिकाना‬ जिसमें ‪गूगल‬ अर्थ के सहारे ‪अमेरिका‬ के पैरागुवे के किसी आँगन में देखा गया था ‘जहाज’, 2010 में.

यह किसी ने शौकिया अपने घर के बाहर विमान की आकृति बनाई हुई है. मीडिया ने उसे अपहृत किए विमान को छुपाए जाने की बात कह दी. उस जगह का आज ताज़ा हाल देखा जाए तो कई पेड़ भी उग गए हैं उस ‘जहाज’ के आसपास.

वास्तविकता जान कर उस समय नई दुनिया के वेब संस्करण से वह खबर हटा ली गई थी लेकिन अभी देख रहा हूँ कि वह फिर मौजूद है.

घटोत्कच के कंकाल वाला इंटरनेट पर झूठ

घटोत्कच वाला इंटरनेट पर झूठ

एक अखबार की कतरन, जनवरी 2015

ऐसा ही एक कंकाल के मामले में हुआ. बड़े जोर शोर से कुछ चित्र दिखा कर कहा गया कि वर्तमान तथा भूतकाल की कांग्रेस सरकारें हिन्दू विरोधी और सम्प्रदाय विशेष के तुष्टिकरण की भावना से ग्रसित हैं…. ये सरकार भी हिन्दू धर्म से सम्बंधित प्रतिक चिन्हों या स्थलों को सिरे से नकारने के प्रयत्न में लगी हुई है… इसके पीछे वेटिकन और पोप का कांग्रेसी राजनेताओं के साथ कुख्यात गठबंधन है…

2007 में नेशनल जियोग्रफिकल टेलीविजन चैनल की भारतीय टीम और अर्कोलोजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया ने सेना के अधिकार क्षेत्र में आने वाले एक रेगिस्तानी क्षेत्र की खुदाई में एक विशालकाय कंकाल को खोज निकाला….इसकी सत्यता की अंतिम पुष्टि पोप और वेटिकन के दबाव में भारत सरकार ने रोक रखा है …

घटना कुछ स्थानीय समाचार पत्रों में भी आई थी मगर सरकार के आदेश पर यह खबर दबा दी गयी…. 80 फीट के नरकंकाल के पास से ब्रह्म लिपि में एक शिलालेख भी प्राप्त हुआ… घटोत्कच ने मरते समय अत्यंत विशाल आकर धारण किया था… ये कंकाल उसी ओर इशारा करता है कि ये कंकाल घटोत्कच का है

तब नई दुनिया पत्र समूह की वेबदुनिया पोर्टल ने भी सनातन धर्म के इतिहास में यही बातें दोहराईं.

जबकि सच्चाई यह है कि 2000 में अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय ने न्यूयॉर्क के हाईड पार्क में एक खुदाई के दौरान प्राप्त कंकाल के चित्र लिए थे और  2002 में एक वेबसाइट की ‘पुरातात्विक असंगति की तिकड़मी फोटो बनाओ’ प्रतियोगिता में इन्ही चित्रों के साथ छेड़खानी कर कलाकारी की गई कि किस तरह इंसानों को इस कंकाल की तुलना में तुच्छ दिखाया जाए.

इस प्रतियोगिता की सभी प्रविष्टियों को यहाँ क्लिक कर देखा जा सकता है.

तब से दुनिया भर में इन तस्वीरों को अपने अपने हिसाब से प्रस्तुत किया जा रहा है. भारत में इसे घटोत्कच का कंकाल कहा जा रहा.

2007 में खुद नेशनल जियोग्रफिकल टेलीविजन चैनल वालों ने स्पष्ट किया है कि इन तस्वीरों से उसका कोई लेना देना नहीं है, उसने भारत में ऐसा कोई काम नहीं किया है, इन तस्वीरों से जुडी भ्रामक जानकारियों से बचें. इस स्पष्टीकरण की अधिक जानकारी इस कड़ी पर क्लिक कर देखें.

लेकिन अभी भी यह कारस्तानी विभिन्न मंचों पर लगातार की जा रही है.

एक और कहानी भी इंटरनेट पर देखी जाती है जिसमें एक बड़े से कंकाल के प्रदर्शन को रखे देखते लोगों को दर्शाया गया है. इस वास्तविक तस्वीर का प्रयोग कर घटोत्कच के कंकाल के उत्खनन की वही कहानी बताई जाती है जैसा ऊपर बताया गया है.

इंटरनेट पर झूठ

यह तस्वीर असल में इटली के कलाकार Gino De Dominicis द्वारा मानव कंकाल की 28 मीटर लंबी अनुकृति है जिसे Calamita Cosmica कहा जाता है और इसे इटली के संग्रहालय में प्रदर्शन के लिए रखा गया है. इसके अन्य चित्रों के लिए इस कड़ी पर क्लिक करें.

इंटरनेट पर झूठ फैलाती कुछ और तसवीरें

इंटरनेट पर झूठ वाली दीवाली

पिछले कई वर्षों से दीपावली का त्यौहार आते आते जिस फोटो की धूम मच जाती है वह बताई जाती है अमेरिकी अंतरिक्ष संस्था ‘नासा’ द्वारा किसी दीवाली की रात उपग्रह से ली गई रंगीन रौशनी से जगमगाते भारत की तस्वीर.

जबकि वास्तविकता यह है कि यह तस्वीर Defense Meteorological Satellite Program के तहत कई वर्षों तक ली गई उपग्रह की तस्वीरों की तहें जमा कर बनी है और इसके विभिन्न रंग उस क्षेत्र विशेष में, उन वर्षों में हुई जनसंख्या वृद्धि को इंगित करते हैं.

दीवाली की बात का खंडन कई स्तर पर किया जा चुका है जिनमें से एक को यहाँ क्लिक कर देखा पढ़ा जा सकता है.

इंटरनेट पर झूठ कश्मीर वाला

 

इस तस्वीर को इस कहानी के साथ प्रचारित किया जाता है कि कश्मीर में मुसलमानों ने हिन्दुओं को सड़क पर ही जला दिया!

जबकि उपरोक्त चित्र इजिप्त में ईसाईयों पर किये गए अत्याचार का है.

हनुमान की गदा वाला इंटरनेट पर झूठ

 

हनुमान जी की गदा दर्शाता एक चित्र भी खूब चर्चित है विभिन्न माध्यमों पर. बताया जाता है कि कई जगह इस चित्र को दिखा कर जिक्र किया गया कि भगवान हनुमान जी की सोने की गदा, खुदाई के दौरान इंटरनैशनल रामायण रिसर्च सैंटर को श्रीलंका से मिली है, गदा कई सौ किलोग्राम वजन की है जिसे उठाने के लिए 2 क्रेनों की सहायता लेनी पड़ रही.

बेशक ये गदा और तस्वीर बिल्कुल असली है. लेकिन ये गदा श्रीलंका में किसी खुदाई में नहीं मिली है बल्कि मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित पितृ पर्वत पर हनुमान जी की जो 90 टन वजनी और 125 फीट ऊंची प्रतिमा प्रतिष्ठापित की जाने वाली थी. यह गदा उसी कलाकृति का एक हिस्सा है.

2013 की हनुमान जयंती पर जब इस गदा को प्रतिमा पर रखना था तब इस गदा को उठाने के लिए दो क्रेनों का इस्तेमाल किया गया. यह वही तस्वीर है. इस बात की पुष्टि करता स्थानीय विधायक माननीय कैलाश विजयवर्गीय का साक्षात्कार यहाँ क्लिक कर देखा जा सकता है.

 सांप्रदायिक तनाव बढाता इंटरनेट पर झूठ

इस वास्तविक तस्वीर के साथ नीमच में ‘कांग्रेस नेता के नेतृत्व में मुसलमानों द्वारा पथराव’ और ‘सैकड़ों के घायल’ होने ‘सड़क पर खून बिखरे’ जाने की बात कह कर सांप्रदायिक नफ़रत का बवंडर खड़ा किया जाना अभी भी जारी है.

जबकि यह तस्वीर जयपुर की सोने चांदी वाली दुकान में हुए एक हादसे की है जब सोने की जलाई का काम करते समय गैस लीकेज होने से सिलेंडर में विस्फोट हो गया… इसके साथ ही दुकान भी जल गई… हादसे में दुकान मालिक समेत छह अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए… जिन्हें अस्पताल लाया गया.

सोने चांदी वाली दुकान में हुए हादसे की खबर यहाँ क्लिक कर देखी पढ़ी जा सकती है.

गांधी हत्याकांड वाला इंटरनेट पर झूठ

 

इंटरनेट की इस दुनिया में मशहूर लोगों को विवादों में लाने की शरारतें करने वाले कम नहीं है. महात्मा गांधी की ह्त्या दर्शाती इस तस्वीर में नाथूराम गोडसे को हाथ में पिस्तौल लिए दिखाया जा रहा और इसे धूम धडाके से गांधी जी की ह्त्या के चंद पलों पहले की बताया जा रहा.

वास्तविकता यह है कि गांधी जी की ह्त्या के समय की कोई तस्वीरें नहीं हैं. फिल्मों में दिखाए गए दृश्य तो बस्स चश्मदीदों की बातों पर आधारित हैं.

हत्याकांड दर्शाता उपरोक्त चित्र दरअसल 1963 में जारी हुई  एक ब्रिटिश फिल्म Nine hours to Rama का है.  गांधी जी के हत्याकांड से 9 घंटे पहले तक घटित घटनाओं पर केन्द्रित इस फिल्म में गोडसे की भूमिका जर्मनी के अभिनेता Horst Buchholz ने निभाई और गांधी बने थे जे एस कश्यप.

फिल्म का अंश यू-ट्यूब पर उपलब्ध है जिसे यहाँ क्लिक कर देखा जा सकता है.

इंटरनेट पर झूठ ही झूठ

 

एक और तस्वीर भी इंटरनेट के झूठ फ़ैलाने वाले दिखाते हैं. एक बड़ा सा वृक्ष जिसके चारों विभिन्न जानवर लिपटे हुए हैं, उसे अफ्रीका का एक रहस्यमयी वृक्ष बताया जाता है.

असल में तो यह डिज्नी के एनिमल किंगडम का एक वृक्ष है. जिसके चारों ओर  325 विभिन्न पशु- पक्षियों – सरीसृपों की आकृतियाँ बड़ी ही ख़ूबसूरती से उकेरी गई हैं.

म्यांमार में एक परिवार की आपसी रंजिश से हुई ह्त्या के बाद का दृश्य किसी मुसलमान द्वारा बलात्कार के बाद हत्या का बता दिया जाता है, विसर्जन के बाद पानी में डूबी गणेश की जीर्ण शीर्ण हुई प्रतिमा को दस हज़ार साल पहले का बताया जाता है. ऐसी ही दसियों तस्वीरों को किसी अलग ही मुद्दे से जोड़ कर अक्सर भ्रमित किया जाता है पाठक/ श्रोता को.

नेपाल के भूकंप के दौरान एक होटल के सीसीटीवी कैमरा से मिला स्वीमिंग पूल का जो दृश्य टीवी चैनलों, व्हाट्सएप्प, फेसबुक, वेबसाइट्स द्वारा चारों तरफ फैलाया गया वह भी तो बरसों पहले आई सुनामी के मौके का है.

इंटरनेट पर झूठ की तसवीरें

हालांकि यहाँ दिखाई गई सारी ही तसवीरें असली हैं सच्ची है, लेकिन अपने मूल रूप में, मूल घटनाक्रम में. इनमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है. लेकिन इनके साथ किसी और ही कहानी को जोड़ कर भ्रम और भय की स्थिति निर्मित कर देते हैं इंटरनेट पर झूठ फ़ैलाने वाले.

आप भी कभी ऐसी तस्वीरों से चकराए हैं?

लेख ख़त्म करते करते दिखा कि यू-ट्यूब से इण्डिया टीवी ने बच्चों की तस्वीर दिखाती अपनी रिपोर्ट का वीडियो हटा दिया है.

© बी एस पाबला

आइये देखें इस लेख को लिखे जाने के बाद और क्या क्या झूठ मिला! आगे पढ़ें यहाँ क्लिक कर

फैलते जा रहा है इंटरनेट पर झूठ का पिटारा
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फैलते जा रहा है इंटरनेट पर झूठ का पिटारा” पर 37 टिप्पणियाँ

    • Smile
      सर जी ग्रेट तो एक ही है दुनिया में
      वो ऊपर वाला

  1. पाबला जी, दक्षिण भारत में सड़क के किनारे दर्शन देनेवाला शेषनाग और हिमालय में फलनेवाला नारीलता फूल भी दावेदार हैं. वैसे तो आयुर्वेदिक इलाजों के नाम पर भी बहुत ऊटपटांग चीजें रोज देखने में आती हैं.
    टिप्पणीकर्ता Nishant Mishra ने हाल ही में लिखा है: बच्चों को जिम्मेदार व स्वावलंबी बनाने के लिए ज़रूरी 10 बातेंMy Profile

    • Heart
      निशांत जी, वो तस्वीरें तो फोटोशॉप्ड हैं मॉरफ़्ड हैं वे इस लेख वाली बिना छेड़खानी की गयी तस्वीरों की कसौटी पर नहीं लाई जा सकती हैं

  2. सर जी!
    फेसबुक पर तिरंगे को गैर हिंदु लोगो द्वारा पैरो कुचलते/ जलाते दिखाया जाता है !
    कृपया ऐसे फेक फोटो की सच्चाई से रूबरू कराने का कष्ट करें!

  3. Smile
    सूर्य प्रताप जी! उस तस्वीर को मूल तस्वीर से छेड़खानी कर बनाया गया है, वह फोटोशॉप्ड हैं मॉरफ़्ड हैं.
    ऐसी छेड़खानी कर बनाई गई फोटोज के बारे में अलग से लिखता हूँ

    आभार आपका

  4. बहुत जरूरी है लोगों को सचेत करना,लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है झूठे लोगों को पकड़ना…..अखबार का विश्वास ख़त्म होने में कोई कसर नहीं रखी…..

    मैं इस कार्य के लिए आपका अभिनन्दन करती हूँ..

  5. बहुत गहरा अध्ययन किया है आपने। बहुत काम की जानकारियां दी हैं। बेशक तस्वीरें झूठ नही बोलती लेकिन मनुष्य झूठ बोलता है। ऐसे ही लोगों को गुमराह कर भ्रमित कर मन में अंध विश्वास , अवमाननायें व गलत धारणाएं पैदा की जाती हैं , अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए।

    हैट्स ऑफ टू यू पाब्ला जी .

  6. बहुत अच्छी और पोल खोलती तस्वीरों के सबूत लगाए हैं आपने।
    दुनिया भर में चर्चित कई झूठों का पर्दाफ़ाश किया हैं आपने।
    आपने मेरा भी जिक्र किया उसके लिए आभार।
    धन्यवाद।
    चन्द्र कुमार सोनी

  7. धन्यवाद सर जी !!!
    तमाम जिज्ञासाओ को शांत करने का एकमात्र माध्यम आपका ब्लॉग!

  8. पाबलाजी, आपका अध्ययन एवं संशोधन महत्वपूर्ण है, जो समाजको सचेत, जागृत करने के लिए आवश्यक है. धन्यवाद सर….

  9. बेहतरीन लेख, इनमें से कई चित्रों की सच्चाई से वाकिफ थे, कुछ से आपने करा दिया।

    कई बार लोग लेख शेयर कर देते हैं जिसमें खबर तो सच्ची होती है पर तस्वीर मिलते-जुलते प्रसंग की कहीं और की लगा दी जाती है। एक बन्दे द्वारा शुरु किया गया यह सिलसिला चलता रहता है।

    नासा द्वारा दीवाली वाली तस्वीर जैसे मामलों में तो हँसी भी आती है कि लोग इतने सालों से हर दीवाली के बाद वही तस्वीर देखने के बाद भी उसे सच समझकर आगे शेयर कैसे कर देते हैं।

    मॉर्फ की गयी तस्वीरों की तो खैर लम्बी कहानी है। तीन सिरों वाला साँप याद होगा। 🙂

  10. बी एस पाबला जी, आपका बहुत बहुत शुक्रिया, हमें सच्चाई से रूबरू कराने का.
    इन गलतफहमियों की वजह से आज काल तो हिंसा भड़क उठती है.

    • Approve
      सही है, हमें झूठी बातों से भरसक बचना चाहिए

  11. bahut achha likha gya he…
    hm newspaper pdhte he,jankari hasil krne ke liye..Google pr jate he,jankari pane ke liye…….ydi kisi ghtna ka mzaq udaya jay..to bahut glt kam he…
    …….anjane log ise mnornjan ka sadhan bna lete he…….dharm se Judi afwahon ki to log puja bhi krne lgte he…….
    .hme jagruk hone ki jrurat he
    ………thanks to inform

  12. Heart
    अख़बारों पर विश्वास तो कम हुआ ही है

    आभार आपका

  13. Smile
    ग्रेट तो एक ही है, वो है दुनिया को बनाने वाला

  14. कमाल ही कर दिया आपने. कितने सारे भ्रमो का निवारण कर दिया, आपको धन्यवाद और आपकी इस अद्भुत सृजनशीलता के लिए बधाई और शुभकामनाएं

  15. अपने वकील मित्र द्विवेदी जी से सलाह लेकर एक पोस्ट डालियेगा की =
    इन झूठ के खिलाफ क्या और कैसे एक्शन लिया जा सकता हैं.??
    आप अधिकांशत: तकनीकी मुद्दे पर लिखते हैं, आप कानूनी मुद्दे पर ना लिख सकें तो उन्हें लिखने की सलाह दे दीजियेगा.
    थैंक्स.
    चन्द्र कुमार सोनी

    • Smile
      पोस्ट तो लिखी जा सकती है लेकिन द्विवेदी जी का लिखना ही ठीक माना जाएगा
      अनुरोध करता हूँ उनसे

  16. ये लेख बेहतरीन है। बोहत जरुरी है क कोई इन झूठ से पर्दा उठाये। आपने वो किया। आपको शुभकामनाये औए धन्यवाद।

  17. बड़े भैय्या पाब्ला जी,
    काफी समय के बाद मैंने आपका यह धाँसू और खोजबीन से भरपूर लेख पड़ा. बहुत अच्छा लगा यह जानकार की इंटरनेट की दुनिया और मीडिया की दुनिया में भी इस प्रकार के झूठ इस तरह से परोसे जाते हैं की वह सच लगने लगता है. कमाल की जानकारी और खोज आपने की है. ऐसे ही अगर आप झूठ पकड़ते रहे तो, आप झूठ पकड़ने वाले बन जाएंगे.

  18. चावला जी आपने सच में बहुत म्हणत की होगी इन धोकेबाजो की असलियत बताने के लिए आपको बहुत बहुत बधाई

  19. आप इन सब गलत समाचारों को एक जगह संकलित कर लिखा व लोगों को सही जानकारी दिया इसके लिए आपको बहुतों धन्यवाद। ……………
    इस तरह के गलत जानकारी व अफवाह फैलाना गलत बात है। ये लोग मीडिया व इंटरनेट का गलत उपयोग कर रहे हैं । ………………………..
    लोग इस तरह से इंटरनेट का गलत उपयोग करते हैं इससे आखिर बचने का क्या तरीका है? मीडिया वाले में भी लोग किस पर विश्वास करे कि कौन सही समाचार दे रहा है व कौन गलत?
    टिप्पणीकर्ता महेश कुमार वर्मा ने हाल ही में लिखा है: दुष्कर्म व बलात्कार बनाम हमारा समाजMy Profile

  20. वाह सर।जी
    सच।जानकर।बहुत ख़ुशी हुई
    धन्यवाद

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