इंसानी दिमाग को हैक करने वाला कम्प्यूटर वायरस

आज खबर पढ़ी कि वेबसाईट हैक करने से ऊबने वाले हैकरों का समूह अब उन कम्प्यूटरों की ओर मुड़ रहा है जो ट्रेन, हवाई जहाजों के यातायात नियंत्रित करते हैं। Train switching systems जो किसी रेल्वे जंक्शन पर एक पटरी से दूसरी पटरी पर किसी ट्रेन को ले जाने का काम करती है, अभी तक ऑनलाईन दुनिया से अन्छुई थी लेकिन अब वायरलेस तकनीक द्वारा ट्रेन और स्विच के बीच संपर्क की प्रणाली विकसित होने से कुछ आशंकाएँ सिर उठाने लगी हैं। ऐसे ही कुछ विचार बर्लिन में हुई हैकर्स कॉंफ़्रेंस ने व्यक्त किए हैं।

मुझे याद आया जब पहली बार, साइबर विशेषज्ञों को एक ऐसे दुर्भावनापूर्ण औद्योगिक कंप्यूटर वायरस कोड का पता चला जो विशेष रूप से औद्योगिक संयंत्रों की अंदरूनी कामकाज को नियंत्रण लेने के लिए बनाया गया था। ऐसे आक्रमणों के सफल होने पर किसी भी विद्युत ग्रिड की बिजली को अन्य दिशा में प्रवाहित किया जा सकता है, डाटा चुराया जा सकता है, बिजली बंद की जा सकती है! मतलब कि एक माऊस क्लिक से अनेकों शहर अंधेरे में डूब जाएंगे!! इसके अलावा यह खबर शायद किसी को न मालूम हो कि सायबर हमलों के कारण, अब तक अमेरिका में कम से कम 170 बार बिजली बंद हो चुकी है। उनमें भी तीन बार तो बड़े पैमाने पर अंधेरा छा गया। इसके बारे में मैने डेढ़ वर्ष पहले लिखा भी था जिसे यहाँ क्लिक कर पढ़ा जा सकता है

human mind hacking

अब तो विशेषज्ञों को आशंका है कि वह दिन भी दूर नहीं रह गया जब कम्प्यूटर वायरस का इस्तेमाल इंसानों के दिमागों को प्रभावित करने में किया जाएगा। सिंगुलैरिटी यूनिवर्सिटी के एंड्रयू हेसेल के मुताबिक, सिंथेटिक जीव विज्ञान के तेजी से विकास करने के कारण हैकर्स, इंसानी दिमागों को काबू में करने वाले बैक्टीरिया और वायरस तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा ‘यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली तकनीकों में से है।

‘डेली मेल’ की खबर में हेसेल के हवाले से बताया गया है कि ‘यह विज्ञान तेजी से विकास कर रहा है और यह कम्प्यूटर प्रोद्यौगिकी से भी तेजी से विकास करेगा।’ उनके अनुसार ‘कोशिकाएं जिंदा कम्प्यूटर हैं और डीएनए प्रोग्रामिंग लैंग्वेज’!

एंड्रयू हेसेल ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि एक समय ऐसा आएगा जब लोग डीएनए को ‘प्रिंट’ और ‘डिकोड’ भी कर सकेंगे लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि वायरस और बैक्टीरिया, मानव मस्तिष्क में रसायन भेज सकते हैं और इसके चलते एक दिन इसका इस्तेमाल दूसरों के दिमागों को प्रभावित करने, यहां तक कि नियंत्रित करने में भी किया जा सकता है।

सुरक्षा विशेषज्ञ मार्क गुडमैन के मुताबिक, ‘सिंथेटिक जीवविज्ञान आने वाले दिनों में नए किस्म के जैव-आतंकवाद और जैव-अपराध की राह खोल सकता है, ठीक उसी तरह जैसा कि अस्सी के दशक में कंप्यूटर, अपराध के तौर पर था। तब बहुत कम लोगों ने ही इसके खतरों को पहचाना था लेकिन यह बहुत तेजी से बढ़ा।’

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जूलियन सैव्यूलेस्क्यू इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए कहते हैं कि जिस तरह अरबपति उद्यमी क्रैग वेंटर ने वैक्टीरिया की कोशिका में सिंथेटिक डीएनए जोड़कर ‘जीवन’ की रचना कर डाली थी, उसी तरह इस तकनीक से भविष्य में सबसे खतरनाक जैव हथियार तैयार किए जा सकते हैं।

इन सब बातों की विस्तृत जानकारी लेते लेते मैं एकाएक मुस्कुरा उठा कि भविष्य की क्या बात करनी? एक वायरस तो अभी भी है ऐसा जिसने इंसानी दिमाग को हैक कर लिया है!

आप जानते हैं ना उसके बारे में?

लेख का मूल्यांकन करें

27 comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


टिप्पणीकर्ता की ताज़ा ब्लॉग पोस्ट दिखाएँ
[+] Zaazu Emoticons Zaazu.com