इंसानों जैसा दिमाग रख कर ठगी करने वाला शातिर वायरस

अभी तक तो मैं पढ़ते सुनते आया हूँ कि एक ठग ने कैसे किसी को सम्मोहित कर किसी इनसान से उसके हजारों लाखों रूपये हड़प लिए या फिर आधुनिक युग में बैंक में सेंधमारी करने वाले कैसे सीसीटीवी कैमरे बंद कर डाका डाल लेते हैं।

लेकिन मानव मशीन की जंग में इस बार एक दबंग कंप्यूटर वायरस के किस्से पता चले तो मैं हैरान हुआ बिना नहीं रहा सका। साइबर जगत में सक्रिय अपराधियों ने एक ऐसा अनोखा कम्प्यूटर वायरस बनाया है जो बिलकुल इक इंसान जैसे न सिर्फ आपके खाते से धन चुराता है, बल्कि भुक्तभोगी की आँखों में धूल डालने की कोशिश में यह झूठा यकीन भी दिला देता है कि आपकी राशि पहले की तरह बरकरार है। जब तक सच्चाई का पता चलता है तब तक तो बहुत देर हो चुकी रहती है।

credit card fraud

अगर आप धड़ल्ले से इंटरनेट बैंकिंग सुविधा का इस्तेमाल करते हैं, तो अब आपको काफी सतर्क रहने की जरूरत है। मैं बात कर रहा हूँ एक बेहद शातिर वायरस की जिसे स्पाईआई का नाम दिया गया है। जिस कम्प्यूटर पर यह मौजूद हो वहाँ यह पहले तो ऑनलाइन बैंकिंग का पासवर्ड या क्रेडिट कार्ड की जानकारी चुराता है फिर पैसे निकालता है, खरीदारी करता है। लेकिन इसके बाद शुरू होता है इसका कमाल! जब खाताधारक अपना बैलेंस जांचता है तो यह धूर्तों की तरह अपने निकाले गए धन को या की गई खरीदारी को छुपाते हुए नकली स्टेटमेंट दिखा देता है। बन्दा सोचता है कि सब ठीक है जबकि वह लुट चुका रहता है। उसे तब पता चलता है जब वह किसी एटीएम, अपने बैंक काऊंटर या बिना वायरस की चपेट में आए कम्प्यूटर पर अपना खाता देखता है।

‘SpyEye’ नाम के ट्रॉजन हॉर्स वायरस के इस नए संस्करण को अमेरिका और ब्रिटेन में देखा गया है। ‘Trusteer नाम की एक सुरक्षा कंपनी ने इस तरह के हमलों का पता लगाया है। कंपनी ने बताया है कि यह वायरस आपके खाते के पासवर्ड को चुरा लेता है और जब आप अपने खाते का इस्तेमाल करते हैं तो आपको भुलावे में रखता है।

इस कंपनी का कहना है:

“The next time the victim visits their online banking site, the malware hides the fraudulent transactions, as well as artificially changing the total balance. As a result, the deceived customer has no idea that their account has been ‘taken over’, nor that any fraudulent transactions have taken place.”


(गहन जिज्ञासुयों के लिए स्पाईआई संबंधित एक वीडियो )

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बचने के लिए इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले लोगों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनके वेब ब्राउजर बिलकुल अपडेट है और  ‘एंटी फिशिंग’ विकल्प सक्रिय है।

अरे! क्या सोच रहे?

इंसानों जैसा दिमाग रख कर ठगी करने वाला शातिर वायरस
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इंसानों जैसा दिमाग रख कर ठगी करने वाला शातिर वायरस” पर 25 टिप्पणियाँ

  1. यह तो बहुत खतरनाक है. इससे बचना भी थोडा मुश्किल होगा. यद्यपि मुझे लगता है कि कोई भी फायरबाल प्रयोग करना ठीक होगा लेकिन उसे प्रयोग करना थोडा सा कठिन है, मतलब यह कि जानकारी हो कि किस प्रोग्राम को इन्टरनेट एक्सेस की अनुमति हो और किसे नहीं.
    यह “कतिपय” वाला किस्सा क्या है…. हमें भी बताइए.
    टिप्पणीकर्ता indian citizen ने हाल ही में लिखा है: व्यापारी की प्रार्थनाMy Profile

    • समस्त फीचर्स वाले फायरवाल का प्रयोग काफ़ी हद तक सुरक्षित है

      ये ‘कतिपय’ वाली बात मीडिया मे भी आ गई क्या?
      Overjoy

  2. यह तो सच में बड़ा खतरनाक है, अच्छा है हम इण्टरनेट के माध्यम से पैसों का लेन देन नहीं करते हैं।
    टिप्पणीकर्ता प्रवीण पाण्डेय ने हाल ही में लिखा है: स्नेह से ध्येय तकMy Profile

  3. एक तरीका ये है कि बैंक अकाउंट पे अलर्ट्स को एक्टिव करा लिया जाये, भारत में तो सन्देश आना निःशुल्क भी है|
    ज्यादातर बैंकिंग वेबसाइट्स पे पासवर्ड डालने के लिए वर्चुअल कीबोर्ड होता है उसका इस्तेमाल किया जा सकता है|
    टाइम टाइम पे फोन-बैंकिंग का इस्तेमाल करके अपने बैंक अकाउंट को क्रोस-वेरीफाई करते रहें |

    क्यूंकि वायरस तो लगातार आते ही रहेंगे खुद जागरूक रहना ही उपाय है |
    टिप्पणीकर्ता देवांशु निगम ने हाल ही में लिखा है: वो “सात” दिन : मुख्य अंश और एक “एक्सक्लूजिव” साक्षात्कार…My Profile

  4. उम्मीद करनी चाहिये कि वर्चुअल की बोर्ड का अभी कोई तोड़ नहीं आया है

  5. सही है सर जी … पहले इस तरह की खबरों से पेट का पानी खौला दो … फिर मासूमियत से पूंछ रहे है … “अरे! क्या सोच रहे?”
    टिप्पणीकर्ता Shivam Misra ने हाल ही में लिखा है: सैनिक धर्मMy Profile

  6. (1)
    जिन बन्दों के खजाने हर महीने की 25 तारीख से ही खाली हो जाते हों और जो अगले महीने की 1 तारीख आने तक कौड़ी कौड़ी के मोहताज़ हो चुकते हों उन सज्जनों को इस वाइरस से डरने की ज़रूरत नहीं है 🙂

    उनके मसले में ये दबंग वाइरस दो कहावतों को ध्यान में रखकर अपंग वाइरस बना रहता है …

    (A) नंगा नहायेगा क्या और निचोड़ेगा क्या 🙂
    (B) नंगों से खुदा भी डरता है 🙂

    (2)
    इस वाइरस की फिक्र वो लोग करें जिनकी मुट्ठियों से रेत नहीं फिसलती या फिर वो ,जोकि नंगे होके भी ड्रेस डिजाइनर होने का दिखावा करते फिरते हों 🙂

  7. सोच क्‍या रहे हैं बस चिंतित हो गए हैं कि यह जासूस हम गरीबों को भी अपनी लपेट में ना लेले।

  8. जब ईश्वर का बनाया मनुष्य ही अच्छे और बुरे में बंट गया तो इंसान का बनाया शातिर निकला तो आश्चर्य कैसा:)
    टिप्पणीकर्ता चंद्र मौलेश्वर ने हाल ही में लिखा है: गुरुदयाल अग्रवालMy Profile

  9. Dear Sir,

    I use internet banking for tranction. Please suggest me a proper advice step by step to be safe from these viruses. I have a Mac fee antiviruse updation.

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