इंसान के अहसासों को समझ कर समाज का हिस्सा बनेंगे रोबोट

आईए विज्ञान का एक और अजूबा देखा जाये। आने वाले समय में हमारे सुख में हंसने, दुख में दिलासा देने वाले रोबॉट अब हकीकत बनने वाले हैं। यूरोपियन शोधकर्ता ऐसे रोबॉट विकसित कर रहे हैं जो हमारे अहसासों के साथ ताल-मेल बैठा सकें। इसके लिए खास तौर पर इनके तंत्रिका तंत्र पर काम किया जाएगा।

(फीलिक्स का एक कॉपीराईटेड चित्र, साभार: FEELIX Gallery)

इस अनोखे प्रॉजेक्ट का नाम ‘फीलिक्स ग्रोइंग‘ है। इसके तहत ऐसे रोबॉटों पर काम हो रहा है जो अपने आस-पास के इंसानों को देख कर, उनके शारीरिक लक्षणों से उनकी भावनाओं का अंदाजा लगा सकें। यह सीखने का काम आर्टिफिशल न्यूरल नेटवर्क की सहायता से होगा। यह नेटवर्क इन समझदार रोबॉट की समझदारी बढ़ाने में सहायता करेगा।

इसके लिए कैमरों और सेंसर का इस्तेमाल किया जाएगा। इनकी सहायता से किसी भी इंसान के चेहरे के भावों, उनकी आवाज और नजदीकी का अंदाजा लगाया जाएगा। इस तकनीक में रोबॉटिक्स के साथ सामंजस्य स्थापित करने की काबिलियत, मनोविज्ञान, तंत्रिका विज्ञान और व्यवहार विज्ञान को शामिल किया गया है।

असल में यह रोबॉट महज मशीनी खिलौने नहीं होंगे। ये हमारे भविष्य के समाज का हिस्सा होंगे, जो मरीजों, बुजुर्ग लोगों, विकलांग की सहायता और तीमारदारी करेंगे। इसके अलावा यह भी हो सकता है कि वे हमारा मनोरंजन भी करें।

इस तकनीक से बना रोबॉट एक मानव शिशु की तरह अपने अनुभवों से सीखेगा कि उसके आसपास इंसान किस तरह प्रतिक्रिया कर रहे हैं। अगर कोई रोबॉट को देख कर डर जाए या चीखने लगे तो यह रोबॉट अपना व्यवहार और दोस्ताना बना लेगा। अगर जरूरत पड़ी तो वह पीछे भी हट जाएगा। दूसरी तरफ, अगर कोई खुशी से चीख पड़ा तो यह रोबॉट इतना काबिल होगा कि इस अंतर को समझ कर उसी के मुताबिक प्रतिक्रिया करे।

इस परियोजना की समन्वयक डॉ. लोला कैनामेरो का कहना है कि यह दरअसल ‘बिहेवरल और कॉन्टेक्ट फीडबैक’ है। यानी, व्यवहार और स्पर्श से मिली जानकारी के मुताबिक काम करना। इसमें मायने रखेगा कि आप भी रोबॉट के लिए सहयोगी भावनाएं रखें, अच्छे शब्द बोलें, उसकी सहायता करें। फिलहाल इस रोबॉट का ऐसा चेहरा विकसित करने पर शोध चल रहा है है जो अहसासों को दिखा सके। इससे लोग उन्हें आसानी से अपना सकेंगे।


(संभावित तकनीक को दर्शाता एक वीडियो)
इस संबंध में कुछ कॉपीराईट वाले चित्र यहाँ देखे जा सकते हैं। समाचार व अन्य जानकारियाँ यहाँ तथा यहाँ देखी जा सकती हैं।
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4 comments

  • Nirmla Kapila says:

    पावला जे ये समाचार सुन कर तो चिन्ता हो गयी है आप समझे कुछ हा हा हा जानकारी के लिये अभार्

  • yuva says:

    बढ़िया जानकारी. साथ ही आपकी टिप्पणी का भी शुक्रिया

  • Vijay Kumar Sappatti says:

    just amazing , kya khoob likha hai mere dost , padhkar lagta hai ki kuch din baad sirf machine rah jaayengi , bus badhai hi badhai

    regards

    vijay
    please read my new poem " झील" on http://www.poemsofvijay.blogspot.com

  • Arvind Mishra says:

    रोचक पर अगली पोस्ट तो डरा रही है

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