इग्नू ऑनलाईन परीक्षा पर सायबर हमला!? : हम आत्मनिर्भर कब होंगे?

वैसे तो अपने देश में इतना कुछ होता रहता है कि अब अकेले, सिवाय कसमसाने के कुछ किया नहीं जा सकता। फिर भी कभी कभी कोई ऐसी खबर दिख जाती है कि मन उद्देलित हो उठता है। अजीब सा आक्रोश हो आता है। कल ही प्रशांत की एक पोस्ट में भी उनकी भावनाएँ पढ़ीं कि मेरे कुछ-कहने सुनने से उन्हें कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला है.. कभी-कभी … मन ही मन एक तरह का विद्रोह इन सबके खिलाफ पनप रहा है?

हुया यह कि कुछ देर पहले एक खबर पढ़ी कि इंदिरा गाँधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) की 31 अक्टूबर को इंजीनियरिंग कोर्स में दाखिला के लिए ली जा रही ऑनलाइन परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद ही ठप्प हो गई थी। इंजीनियरिंग की इस प्रवेश परीक्षा में लगभग 9,350 छात्र थे। जिस पंक्ति ने मुझे उद्देलित किया वह थी कि देश के 18 लाख छात्रों को दूरस्थ शिक्षा देने वाला यह विश्वविद्यालय याहू के सर्वर का इस्तेमाल किया करता है। अब ऑनलाईन परीक्षा के दौरान सम्पर्क टूट जाने के संबंध में याहू से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।

बेशक मुझे इस संबंध में बेहतर तकनीकी ज्ञान नहीं है किन्तु एक सामान्य भारतीय नागरिक के रूप में जब मेरे कान पक चुके हों यह सुन सुन कर कि आईटी मामलों में भारत, भारत की मानव शक्ति, विश्व में अपने परचम फहरा रही है, तो एक सीधा सा प्रश्न यह आता है मन में कि हम आत्मनिर्भर क्यों नहीं हो सकते? क्या, कुछ घट जाने की प्रतीक्षा की जाती है ऐसी पहल के लिए? आज जब विभिन्न शहरों में फैली छोटी छोटी संस्थाएँ भी अपने खुद के सर्वर रखती हैं तो परीक्षा जैसे गोपनीय मामलों में भी विदेशी सर्वरों पर निर्भरता क्यों है?

प्रवेश परीक्षा में भाग लेने वाले छात्रों का कहना है कि मात्र 9350 उम्मीदवारों के लिए इग्नू का यह प्रयोग असफल रहा है तो यह निकम्मापन ही है।

विश्वविद्यालय प्रशासन हैरान है कि 9350 उम्मीदवारों के लिए रखे गए इस टेस्ट पर एक लाख से अधिक हिट्स कैसे आ गईं।

हालांकि इस घटना के पीछे हैंकिंग या भीतराघात की संभावना से इग्नू इंकार कर रहा है फिर भी यह है तो गंभीर मसला। इंडियन एक्सप्रेस समूह के फाईनेंशियल एक्सप्रेस ने इसे पिछले दिनों हुए फेसबुक व ट्विटर जैसा एक सायबर हमला करार दिया है। साथ ही यह अपुष्ट खबरें भी तैर रहीं कि यह विरोधियों का काम था।

मैं विचलित हूँ कि सब कुछ होते हुए भी हम आत्मनिर्भर कब होंगे?

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इग्नू ऑनलाईन परीक्षा पर सायबर हमला!? : हम आत्मनिर्भर कब होंगे?” पर 10 टिप्पणियाँ

  1. अभी जल्द ही केट (CAT) की परीक्षा होने जा रही है आनलाइन। २ लाख परीक्षार्थी बैठेंगे। उसे भी देखते हैं।

  2. हम चाहें तो सही कि हमें आत्मनिर्भर होना है।

  3. मैं हर साल साल दर साल देख रहा हूँ की जब भी सीबीएसई या राज्य शिक्षा बोर्ड में किसी सरकारी परीक्षा का रिजल्ट आता है तब पीक आवर्स में सर्वर्स पर इतना लोड बढ़ जाता है की सर्वर्स डाउन हो जाते हैं. वह सरकारी परीक्षा चाहे दसवी की हो, चाहे बारहवी की या पीईटी, पीएमटी, पीएटी, एम्ईटी या और कुछ. हर परीक्षा में रिजल्ट देखने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था. अगर यह इग्नू की परीक्षा एनआईसी सर्वर्स पर आयोजित की जाती तो भी पक्का यही होना था.

    खीझ कर मैं हमेशा सोचा करता था की मध्यप्रदेश का शिक्षा विभाग निकम्मी एनआईसी की सरकारी साईट पर रिजल्ट क्यों प्रसारित करता है? क्यों नहीं गूगल से कांट्रेक्ट कर लेते? कम से कम बच्चों को परेशानी तो नहीं होगी.

    मैं तो कहूँगा की याहू की जगह गूगल को कांट्रेक्ट दिया जाना चाहिए था, इस हरामखोर भारत सरकार का एक भी विभाग विश्वास करने लायक नहीं है. एक भी भारतीय शासकीय साईट मुझे नहीं पता जो नवीनतम Web Standards को फालो करती हो. सभी फ्रंटपेज पर बनी हैं. ऐसी आत्मनिर्भरता से अच्छा है की आउटसोर्स ही करा लें.

  4. पाबला जी!
    हम लोगों को मार पड़ने पर ही अक्ल आती है।

  5. क्या करेंगे.. आत्मनिर्भर होने का प्रयास एन.आई.सी जैसे महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के रूप में सामने आया, लेकिन यूजर कन्जेशन बढ़ते ही इनका सर्वर दम तोड़ देता है।

  6. सही कहा आपने । परीक्षा जैसे गोपनीय काम के लिये भी हम याहू के सर्वर पर निर्भर रहते हैं । यह निर्भरता की आदत कब छोड़ेंगे हम !

  7. यह तो बहुत ही गंभीर विषय है.
    कुछ तो सोचना पड़ेगा.

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