इथेनॉल ! गाड़ी चलेगी दारू पीकर, ड्राईवर भले ही ना पिए !!

भारत में इथेनॉल मिले पेट्रोल की स्थिति के बारे में जानकारी देता आलेख

पिछले काठमांडू यात्रा संस्मरण में जब मैंने लिखा कि “… स्पीड पेट्रोल की तलाश असफल… रही… अब मिल रहा….10% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल….” तो रवि रतलामी जी की जिज्ञासा दिखी “…ये क्या चक्कर है? इस बारे में कभी सुना नहीं… कृपया इस पर प्रकाश डालें… . याने इसका फ़ायदा-नुकसान?… आग्रह है कि जल्द ही एक पोस्ट अवश्य लिखें… हमारे भी ज्ञान में थोड़ी वृद्धि तो हो…”

मैं संकोच में पड़ गया. उन जैसा सक्षम व्यक्ति तो चुटकियों में इसका उत्तर पा सकता है इंटरनेट पर! फिर यह कृपया… आग्रह क्यों? तात्कालिक तौर पर औपचारिकता के लिए एक लिंक वहीँ दे दी और चुप्पी साध गया. लेकिन तब से अब तक कई संगी साथी पाठक इसके बारे में पूछ चुके तो मुझे लगा कि कुछ लिखना पड़ेगा अब.

मूल रूप से इथेनॉल एक एल्कोहल है, जिसे एथिल अल्कोहल भी कहा जाता है. अल्कोहल का मोटे तौर पर मतलब दारू, मदिरा, शराब 😀 सभी प्रकार की शराबों में एथिल ऐल्कोहल होता है और इस अल्कोहल की मात्रा 3% से 20% तक होती है.

शराब के रूप में पिए जा सकने वाले अल्कोहल पर भारी टैक्स लगाया जाता है। लेकिन औद्योगिक अल्कोहल सस्ता मिलता है. उस पर टैक्स बहुत कम लगता है. अब लोग उसे पी ना सकें, इस उद्देश्य से ऐसे अल्कोहल में, जान-बूझ कर कुछ विषैले और अस्वास्थ्यकर पदार्थ मिलाये जाते हैं. इससे वह औद्योगिक कार्यों में तो प्रयोग किया जा सकता है लेकिन ‘पिया’ नहीं जा सकता. कई बार जो खबरें आती हैं जहरीली शराब से होने वाली मौतों की, वह इसी अल्कोहल के कारण होती हैं.

वार्निश, पॉलिश, कृत्रिम रंग, पारदर्शक साबुन, बनाने के अलावा पीने के लिए विभिन्न मदिराओं के रूप में, जीवाणुनाशक के रूप में घावों को धोने में, मरे हुए जीवों को संरक्षित रखने के साथ ही इसका एक महत्वपूर्ण उपयोग सामने आया है पेट्रोल – डीजल से चलने वाले इंजिनों के लिए आंशिक ईंधन विकल्प. वही विकल्प हमें मिला अपनी यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश में.

गन्ने से एथेनॉल

अमेरिका के 80% वाहनों में जिस 10% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग किया जाता है. वह इथेनॉल मक्के से प्राप्त किया जाता है. लेकिन भारत में गन्ने से चीनी निर्माण के दौरान उत्तपन्न सह-उत्पाद शीरे से बनता है यह इथेनॉल.

इस तरह के जैव-ईंधन प्रयोग को प्रोत्साहित करने तथा खनिज ईंधन की खपत नियंत्रित करने के इरादे से, भारत सरकार ने 2003 में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति की बुनियाद रखी. इस नीति के अनुसार पेट्रोल, डीज़ल में इथेनॉल मिलाकर बेचने का प्रस्ताव था. जिसे 5% से बढ़ाते हुए, 2017 तक 20% करने की योजना बनी. लेकिन कई कारणों से इस नीति को सही तरीके से लागू नहीं किया जा सका.

यह अधिक उड़नशील नहीं है इसलिए वाहनों को चलाने में कठिनाई न हो इस उद्देश्य से इसे पेट्रोल-डीज़ल में मिला कर प्रयोग किया जाता है. यही मिश्रित E10 पेट्रोल हमें मिला था काठमांडू जाती राह में आये उत्तर प्रदेश के पेट्रोल पम्पस में. E10 का मतलब, 90% साधारण पेट्रोल और 10% इथेनॉल.

पर्यावरण के लिए इथेनॉल

पर्यावरण की बात करें तो इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल द्वारा, पारंपरिक इंटरनल कंबश्चन वाले इंजन के मुकाबले वायु प्रदूषण 20% से 30% कम होता है और यह इंजन को ‘ठंडा’ रखता है.

अर्थशास्त्र की बात की जाए तो यह इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, ईंधन आयात किये जाने में होने वाले विदेशी मुद्रा खर्च को कम करने में सहायक है.

E10 पेट्रोल, इंजिन में बिना कोई बदलाव की आवश्यकता के, दुनिया के बीस से भी अधिक देशों में प्रयोग किया जा रहा है. इससे अधिक प्रतिशत वाले इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए कई सावधानियाँ रखने की आवश्यकता बताई जाती हैं. यह बात सामने आई है कि सन 2001 से ‘पुराने’ वाहनों में 10% से अधिक का मिश्रित पेट्रोल नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. विदेशों से 10% से अधिक वाले मिश्रित पेट्रोल Eके कारण इंजिन संबंधित रबर पाइप और रबर सील को नुकसान पहुँचाने की खबरें सामने आई हैं. मिश्रण की विविधता पर इस कड़ी द्वारा गहन अध्ययन किया जा सकता है.

भारत का हाल देखें तो जहां श्रीरेणुका शूगर्स को इथेनॉल की आपूर्ति करने के लिए तेल विपणन कंपनियों से आशय पत्र मिला है. कंपनी को कुल मिलाकर 11.8 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति करनी होगी. हाल ही में नागपुर से खबर आई कि भारतीय जनता पार्टी के भूतपूर्व अध्यक्ष, श्री नितिन गडकरी की मिलकियत वाला पूर्ति समूह, 50 ऐसे खुदरा केंद्र खोलने जा रहा है जो बाज़ार दर से 2 % कम में E-10 (10% इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल बेचेगा. इस समूह द्वारा अभी, प्रतिदिन सवा लाख लीटर इथेनॉल का उत्पादन किया जा रहा है.

इथेनॉल से चली यह गाड़ी

हालांकि इस नीति का लाभ उठाते हुए चीनी मिलों द्वारा, तेल कंपनियों को अब तक 34-36 रुपये प्रति लीटर पर दिए जा रहे इथेनॉल की कीमत एक दिसंबर 2013 से 30 नवंबर 2014 तक के लिए 90-92 रुपये प्रति लीटर मांगी गई है. इस अवधि में 5% इथेनॉल, पेट्रोल में मिलाने के लिए लगभग 135 करोड़ लीटर एथेनाल की आवश्यकता होगी.

तकनीकी रूप से, एक लीटर इथेनॉल करीब 4 लीटर शीरे द्वारा बनता है और शीरे की थोक दर है लगभग 30 पैसे लीटर है. बाज़ार में इथेनॉल बेचा जाता है 34-36 रुपये प्रति लीटर. यानि एक लीटर इथेनॉल पर चीनी मिलों को करीब 32-33 रुपये का लाभ है जबकि अब 90 रुपये की मांग है.

एथेनॉल को पेट्रोल में मिला कर बेचे जाने के समर्थन में सरकार जी-तोड़ कोशिश कर रही है. जहां समर्थकों का कहना है कि इससे खेती-किसानी की ओर रूझान बढेगा वहीं आलोचकों का यह भी कहना है कि इथेनॉल की बढ़ती मांग से खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी होगी जो अर्थव्यवस्था को गड़बड़ा सकती है.

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल

फिलहाल मेरा इस मिश्रित पेट्रोल के बारे में अनुभव है कि इंजिन की आवाज़ सुधरी थी और गाड़ी चलाने में ‘स्मूथ’ लगी. अब तक मुझे महसूस नहीं हुआ कि किसी तरह का कोई बुरा प्रभाव हुया हो. पहले ध्यान नहीं दिया था लेकिन अब याद आ रहा ही कि उत्तर प्रदेश में इस मिश्रित पेट्रोल की कीमत भी साधारण पेट्रोल के मुकाबले कम थी.

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के बारे में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम की कड़ियाँ देखी जा सकती हैं.

अगली बार जब आप पेट्रोल लेने जाएँ तो देखिएगा कि वहाँ कहीं दारु मिला पेट्रोल मिल रहा है कि नहीं. यदि मिले तो उसे प्राथमिकता दें, अपनी जेब और तेल आयात बिल को ध्यान में रख कर.

बताईए ! आप ‘पिएंगे’ या गाड़ी को ‘पिलाएंगे’ ?

इथेनॉल ! गाड़ी चलेगी दारू पीकर, ड्राईवर भले ही ना पिए !!
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