इसे ना ही पढ़ें, कोई फायदा नहीं इसे पढ़ने से

पिछले चार दशकों से मेरे घर पर स्थानीय समाचारपत्र देशबन्धु आ रहा है। अर्सा पहले तक इसमें एक स्तंभ आता था ‘आजकल’, जिसे सुनील कुमार जी लिखा करते थे। उनकी तीखी लेखनी का मैं हमेशा कायल रहा हूँ। यह शायद वही सुनील कुमार हैं जो 70 के दशक में रायपुर के सांईंस कॉलेज में मेरे सहपाठी रह चुके।

अब यह स्तंभ, स्थानीय समाचारपत्र ‘छत्तीसगढ़’ में आता है। आज उनकी लेखनी से ऐसा कुछ आक्रोश झलका कि मन कर आया इसे यहाँ प्रस्तुत करने को। मैंने पढ़ तो लिया लेकिन इस सामाजिक-राजनैतिक व्यवस्था में बेबस हूँ।

आप भी चाहें तो पढ़ लीजिए। हो सकता है आप भी कहें कि कोई फायदा नहीं इसे पढ़ने से
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21 comments

  • Udan Tashtari says:

    किससे क्या उम्मीद की जा सकती है..सब अपना उल्लु सीधा करने में लगे हैं..ऐसे में कौन याद करेगा..

  • ajit gupta says:

    खाओ पीओ और मौज उडाओ का दर्शन तेजी से भारत में भी फैल रहा है तो किसे चिन्‍ता है देश के महान सपूतों की? हम केवल उनकी चिन्‍ता करते हैं जो हमें लाभ पहुंचाए। अब ना तो सुभाष बाबू और ना ही भगत सिंह के नाम पर वोट मिलते हैं। वैसे आपने लिखा था कि कि इसे पढने से कोई फायदा नहीं लेकिन हम भी क्‍या करे हमारा उसूल है कि हम बेफायदा के रास्‍ते पर ही जाते हैं।

  • दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi says:

    यही पूंजीवादी संस्कृति है, जो मानव के समूहबद्धता में रहने के मूल स्वभाव के विपरीत है। यही आशा जगाता है कि जैसे दासत्व और सामंतवाद का अंत हुआ है वैसे ही इसे भी एक दिन जाना होगा।

  • संगीता पुरी says:

    नैतिक मूल्‍यों का बेतहाशा पतन हुआ है !!

  • निर्मला कपिला says:

    पावला जी सब कुछ उल्टा पुल्टा हो गया है— सब ने सही कहा है। शुभकामनायें।

  • Babli says:

    पाबला जी आपने बिल्कुल सही लिखा है! कुछ भी सही नहीं हो रहा है! आपने लिखा है की पढने से कोई फायदा नही पर आपने जब लिखा है तो पढ़ना ज़रूरी है!

  • डा. अरुणा कपूर. says:

    यह सब इसलिए हो रहा है…क्यों कि हमारी भारत सरकार या यूं कहिए कि जिन्हें हम लोगों ने कुर्सी पर बैठाया वे नेता लोग….आंखे बंद किए हुए चैन की नीद सो रहे है!

  • डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) says:

    आपने मना किया था मगर हमने पढ़ ही लिया!

    स्वार्थ का सब प्यार!
    स्वार्थ का संसार!

  • ताऊ रामपुरिया says:

    आपने अच्छा फ़ार्मुला लगाया इस आलेख को पूरा पढवा डाला, आप जानते हो कि जो मना किया गया काम नही करे वो कैसा ताऊ?:) सो पढ डाला पूरा का पूरा.

    बिल्कुल कायदे की बात यह है कि मैं इस मामले में दिनेशराय जी द्विवेदी की बात से सहमत हूं.

    रामराम.

  • Krishna Kumar Mishra says:

    महान विचारक बलिदानी और देशभक्त को मैं नमन करता हूं, अब बात है बात की लोग यकीनन सिर्फ़ उल्ल्लू सीधा करते हैं, महान लोगों के नामों को जबान और कागज पर लाकर!

  • Gagan Sharma, Kuchh Alag sa says:

    सब गड़्ड़-मड़्ड़ होता जा रहा है।
    जिस तरह नेता-अभिनेता के वाहन चालक एक मायने में खास होते हैं। वैसे ही आजकल लक्ष्मी वाहन का बोलबाला है। ये जो ना कर या करवा जाएं कम है।

  • शरद कोकास says:

    सुनील कुमार जी का यह लेख पढ़वाने के लिए शुक्रिया । इसे पढ़कर दुश्यंत क एक शेर याद आ रहा है " दोस्त अपने मुल्क की किस्मत पे रंजीदा न हो / उनके हाथों में है पिंजरा उनके पिंजरे में सुआ ।"

  • PD says:

    आपकी बात ना मान कर बेकार का इसे पढ़ लिया.. नहीं पढता तो ही ठीक था.. 🙁
    ऐसे ही CWG को लेकर मन खराब है..

  • महफूज़ अली says:

    मैंने इसे नहीं पढ़ा है… वाकई में कोई फायदा नहीं है इसे पढने में….

  • Udan Tashtari says:

    फायदा न भी हो तो चलेगा..बस, घाटा न लगे.

  • चन्द्र कुमार सोनी says:

    बेहद दुखद हैं ये सब.
    अच्छा मुद्दा उठाने के लिए धन्यवाद.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  • Mrs. Asha Joglekar says:

    Galti to hamaree hee hai . Logon ko waisee hee sarkar milati hai jiske we layak hote hain. Lekin gaddi par baithe log itana to dekh hee sakte hain ki humare poojya Shaheedon ka vigyapan ke bahane makhaul na udaya jaye . Dukh ki bat hai.

  • vinay says:

    नैतिक मुल्यों का पतन ।

  • vinay says:

    नैतिक मुल्यों का पतन ।

  • vinay says:

    नैतिक मुल्यों का पतन ।

  • vinay says:

    नैतिक मुल्यों का पतन ।

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