उड़न तश्तरी का बोलू, ज्ञानदत्त जी का गोलू

कल से समीर लाल जी ‘उड़न तश्तरी’ की पोस्ट, मैं अभागा!! जड़ से टूटा!! को देख रहा हूँ।

उसे पढ़ते ही मुझे उनकी बोलू वाली पोस्ट याद आ गयी। मुझे वह बेहद भावुक लगी थी।

साथ ही साथ बोलू के नामकरण का किस्सा भी बेहद दिलचस्प लगा था।

 
उसी के साथ ही मुझे ज्ञानदत्त जी की गोलू वाली पोस्ट भी याद हो आयी।

शायद आपकी नज़र में न आई हों ये दोनों भावुक कर देने वाली पोस्टें इन दोनों दिग्गजों की। चाहें तो देख लें

 
कैसी रही?
उड़न तश्तरी का बोलू, ज्ञानदत्त जी का गोलू
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उड़न तश्तरी का बोलू, ज्ञानदत्त जी का गोलू” पर 8 टिप्पणियाँ

  1. ज्ञानजी के गोलू के बारे मे तो पहले पढ चुके थे लेकिन समीर जी का बोलू आज ही देखा और पढ भी लिया. शुक्रिया…

  2. दोनों पोस्टो में गजब का तालमेल बैठाया गोलू और बोलू शुक्रिया

  3. गोलू और बोलू की इस जुगलबंदी के लिये आभार ।

  4. बहुत धन्यवाद पाबला जी इन चरित्रों को याद करने के लिये!

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