उत्तर भारतीय ट्रैफिक नियम तोड़ते शान बघारते हैं और दक्षिण भारतीय रिकॉर्ड बनाते हैं!?

जब कहीं समय मिलता है तो मोबाईल पर खबरें पढ़ने के लिए मैं Snaptu नामक उस अनुप्रयोग का चुनाव करता हूँ जिसे अब फेसबुक ने 3 अरब रूपये से अधिक में खरीद लिया है।

पिछले सप्ताह जब अस्पताल में भर्ती था तो यकायक एक खबर पर नज़र पड़ी। बरबस मुस्कुरा ही उठा उसे पढ़ कर।

हुआ यह था कि 9 जून को, बैंगलौर के 13 स्थानों पर चलाए गए विशेष अभियान के तहत, आश्चर्यजनक रूप से महज 2 घंटों में ही ट्रैफिक नियम तोड़ने के रिकॉर्ड 2000 मामले सामने आये। उनमें लगभग सभी उच्च शिक्षित थे। अब इस अभियान के पीछे रही Outer Ring Road Companies Association (ORRCA) और अन्य संस्थाएं माथापच्ची कर रही कि यदि शहर के सभी स्थानों को शामिल किया जाए तो क्या परिणाम होगा?


अब आप कहेंगे कि इसमे मुस्कुराने वाली क्या बात है? तो इसके लिए आपको तीन वर्ष पहले राजधानी दिल्ली के उप-राज्यपाल तेजिन्दर खन्ना के बयान का स्मरण करना होगा जिसमे उन्होंने कहा था कि उत्तर भारत के लोग कानून का उल्लंघन करने को अपनी शान समझते हैं। साथ ही साथ उन्होंने दक्षिण भारत के लोगों की सराहना करते हुए कहा था कि वहां के लोग सामान्यत कानून के दायरे में रहते हैं! उस समय केन्द्र सरकार ने कहा कि दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेन्द्र खन्ना ने यदि उत्तर भारत के लोगों के प्रति कोई गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी की है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। और फिर उन्हें त्यागपत्र देना पडा था।

अब आप बताईए उस प्रकरण को याद करते, इस खबर को पढ़ते आपके विचार क्या है?

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उत्तर भारतीय ट्रैफिक नियम तोड़ते शान बघारते हैं और दक्षिण भारतीय रिकॉर्ड बनाते हैं!?” पर 16 टिप्पणियाँ

  1. पढ़े लिखे लोग नियम को ताक पर रख देंते है …वाकई फिर कुछ कहने के लिए नहीं रहा

  2. वैसे अगर यहां भी ठीक से चालान होने लगे तो एक नया रिकार्ड बना ही देंगे.

  3. ओ पा जी ,तुसी केड़े नियम तौड के हस्पताल वड गये ओ | हुन की हाल है ..?
    बाकि जो तुस्सी कहो सब ठीक है …
    स्वस्थ रहो !

  4. मौका मिलते ही…सब लोग ट्रैफिक नियम तोड़ने की फिराक में ही रहते हैं….

    आप अस्पताल में क्यूँ थे…अब स्वास्थ्य ठीक है,ना ?

  5. शहरों में मानसिक दवाब का नतीज़ा है बहुत सी दूसरी असंगतियों की ही तरह ट्रैफ़िक नियमों का उलंघन भी. शहरों से कुछ दूर निकल जाओ… इंसान अपने आप ही शांत हो हर तरह से संयत होने लगता है…

  6. पूरा बंगलोर गाड़ियों से भरा हुआ है।

  7. पावला जी
    आप ठीक कह रहे हो, बंगलौर को छोडो जी
    आप दिल्ली के छोटे से लेकर बडॆ चौराहे पर कैमरे लगा कर, देख लो, सबको पक्का यकीन हो जायेगा कि अपनी दिल्ली यू ही राजधानी नहीं बनी, पूरे भारत में सबसे खराब परिणांम दिल्ली का ही आयेगा और दिल्ली की पुलिस नम्बर वन घुसखोर है, यायायात के मामले में।

  8. अगर वही टीमें उन्हीं नियमों के साथ वही विशेष अभियान बैंगलोर की वाहन-आबादी वाले किसी भी उत्तर भारतीय नगर में चला लें तो चलान काटते-काटते पागल हो जायेंगे। कोई आश्चर्य नहीं यदि हिंसक विरोधों में कई सदस्य घायल भी हो जायें।

  9. अगर वही टीमें उन्हीं नियमों के साथ वही विशेष अभियान बैंगलोर की वाहन-आबादी वाले किसी भी उत्तर भारतीय नगर में चला लें तो चलान काटते-काटते पागल हो जायेंगे। कोई आश्चर्य नहीं यदि हिंसक विरोधों में कई सदस्य घायल भी हो जायें।

  10. तबियत ठीक होने की सूचना राहत देने वाली है।
    आराम करें, कुछ दिन ब्लॉगिंग से दूर रहें। वरना ब्लॉग पुलिस भी चालान काटने में कम नहीं है 🙂

  11. बद अच्छा बदनाम बुरा। उत्तर वाले अंग्रेज़ों व अन्य आतताइयों के कहर के विरुद्ध आवाज़ उठाते-उठाते बाग़ी स्वभाव के हो गए हैं और अभी 63 साल ही बीते हैं इसलिए नियमों को तोड़ते हैं और लोगों ने उन्हें नियम तोड़ने वालों के रूप में बदनाम कर दिया गया है।

    दक्षिण वाले तो ट्रैफ़िक नियम तोड़ने में ही नहीं भ्रष्टाचार के क्षेत्र में भी रिकार्ड बनाया है। पहला बड़ा घोटाला मेनन ने किया था और उसके बाद सभी बड़े घोटाले दक्षिण के अंग्रेज़ी पढ़े लिखे तथाकथित ईमानदार लोगों का तमगा पहनने वालों ने ही किया है। भाषा के नाम पर संकुचित विचार रखने वाले दक्षिण भारती देश विभाजन की भी वात करते हैं तो उत्तर भारतीय उन्हें भी माफ़ कर देते हैं। यह गंभीर और विचारणीय बात है।

  12. आशा है अब पूर्णतया स्वस्थ होंगे।

  13. आशा है अब पूर्णतया स्वस्थ होंगे।

  14. माफ़ कीजियेगा पर आजकल मैं भी ज़रा दूर दूर हूँ ब्लॉग जगत से सो आपकी पोस्ट पर पहले निगाह नहीं गई … खैर आप से बात कर राहत हुयी कि अब आप बिलकुल ठीक है ! बस अपना ख्याल रखें यही एक विनती है आपसे !

  15. जितने लोग पकडाए गए होंगे उनको अगर देखेंगे तो 70-80 फीसदी उत्तर भारतीय ही निकलेंगे.. ये मेरा गारंटी है.. चाहे मामला बैंगलोर या चेन्नई का ही क्यों ना हो!

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