बहुत से लोग पूछते हैं…एंड्रॉयड क्या है?

जानना नहीं चाहेंगे कि आखिरकार मोबाइल हैंडसेट्स पर एकाधिकार जमा चुका एंड्रॉयड क्या है

पिछले दिनों फेसबुक पर दो तीन मित्रों ने एक जिज्ञासा प्रकट की. सभी का कहना था कि भले ही हम सब एंड्रॉयड एंड्रॉयड करते रहते हैं लेकिन असल में ये एंड्रॉयड क्या है, पता नहीं!

मैंने एक लाइन में ज़वाब दिया कि ये एक मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसे गूगल ने विकसित किया और बाज़ार में मुफ्त उपलब्ध करवाया है. लेकिन फिर अनिता जी ने आग्रह किया इस पर कुछ अधिक लिखने के लिए. आज यही सही!

वैसे तो शब्दकोष में Android का मतलब बताया गया है  – एक ऐसी आटोमेटिक मशीन जो दिखने में मानव जैसी है. इसी नाम को सार्थक करते हुए अमेरिकन कंपनी गूगल ने मोबाइल फोन में व्यापक इस्तेमाल वाले अनुप्रयोगों के सृजन और पूरी क्षमता स्थापित करने के उद्देश्य से सॉफ्टवेयर बनाया एंड्रॉयड.

जैसे कि आम तौर पर घरेलू उपयोग के डेस्कटॉप कंप्यूटर, लैपटॉप लिनक्स, मैक सहित अधिकतर विंडोज प्रणाली पर चलते हैं उसी तरह मोबाइल उपकरणों को चलाने के लिए ब्लैकबेरी, सिम्बियन, बाडा जैसी प्रणालियों के साथ एंड्रॉयड का प्रयोग होता है. एंड्रॉयड ख़ास तौर पर टच-स्क्रीन मोबाइल के लिए बनाया गया था लेकिन अब यह डिजिटल कैमरा, फ्रिज, टीवी जैसे दूसरे उपकरणों में भी प्रयोग किया जाने लगा है..

इन ऑपरेटिंग प्रणालियों को किसी वाहन के उदाहरण से समझना हो तो इसे पेट्रोल इंजिन, डीज़ल इंजन से समझा जा सकता है. दिखने में एक जैसी ही कार दो अलग अलग ऑपरेटिंग प्रणालियों से चल सकती है और दोनों में कुछ मूलभूत खामियां खूबियाँ तो होती ही हैं.

बात अगर एंड्रॉयड शब्द के उत्पत्ति की हो तो यह जानना रोचक होगा कि विज्ञान गल्प कथायों के लिए रोबोट्स की कल्पना में जो चिन्ह बनाया गया उसे Humanoid कह पुकारा गया. स्वाभाविक तौर पर यह ‘पुरुष’ ही था. फिर महिला रोबोट के लिए शब्द लाया गया Gynoid. लेकिन लिंग-भेद समाप्त करने के नाम पर शब्द आया Android!

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एंड्रॉयड की पहचान बन चुके हरे रंग वाले ऍण्ड्रॉइड चिन्ह की रचना ग्राफ़िक डिज़ाइनर इरीना ब्लोक द्वारा 2007 में गूगल के लिए की गई थी.

एंड्रॉयड का पहला संस्करण वर्ष 2008 में निकाला गया. फिर धीरे धीरे इसका प्रचलन बढ़ा. मुझे याद है जब 2010 में अपनी महाराष्ट्र यात्रा के पहले नया मोबाइल लेने गया तो एंड्रॉयड फोन के बारे में पूछते ही दुकानदार मुझे घूरने लग गया. तब तक हमारे बाज़ार तक यह आया ही नहीं था, बस्स नोकिया की ही धूम थी.

तब से अब तक कई बार इसके संस्करणों को उन्नत किया गया और हर बार इनका नामकरण वर्शन 1, 2, 3, 4… 7, 8 जैसे कोई नंबर ना हो कर A, B, C, D जैसे अक्षरों से शुरू होने वाले किसी न किसी खाद्य केक पेस्ट्री के दिलचस्‍प नामों पर किया गया. जैसे कि कपकेक, डोनट एक्लेयर, जिंजरब्रेड, आइसक्रीम सैंडविच, हनीकॉम्ब, जेली बिन, किटकैट और हालिया लॉलीपॉप … आदि नामो से किया गया.

किटकैट आने के पहले भारत में एक बड़ा ‘आंदोलन’ चला था कि इस बार एंड्रॉयड के संस्करण को काजू कतली कह पुकारा जाए

हर उन्नत संस्करण बेहतर कामकाज और सुरक्षित वातावरण के लिए लाये जाते हैं. कार के हिसाब से देखिए तो बदलते समय के अनुरूप, कार्बुरेटर वाले इंजन के मुकाबले मल्टी पॉइंट फ्यूल इंजेक्शन -MPFI इंजिन ज़्यादा एवरेज देता है, कम विषैली गैस उत्सर्जित करता है और इंजिन की क्षमता बढाता है. ऐसा ही एंड्रॉयड के उन्नत संस्करण की वजहों को समझा जा सकता है.

android-future-bspablaलिनक्स पर बनाए गए एंड्रॉयड की लोकप्रियता का मूल कारण है इसके कोड का सार्वजनिक रूप से मुफ्त उपलब्ध होना. इसी कारण यह उन कल्पनाशील तकनीकी व्यक्तियों का चहेता है कि इसके लचीलेपन का फ़ायदा उठा अपनी मर्जी के अनुप्रयोग बना सकें. इसे बनाया ही इसलिए गया.

विंडोज और बाडा जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम क्रमश: माइक्रोसॉफ्ट और सैमसंग के मालिकाना हक़ वाले सॉफ्टवेयर हैं. इनका उपयोग यही कंपनियां कर सकती हैं और कोई नहीं जबकि एंड्रॉयड किसी भी मोबाइल पर स्थापित किया जा सकता है.

अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम ने दुनिया के सवा करोड़ से ज्‍यादा स्‍मार्ट फोन और टेबलेट में जगह बना कर बाज़ार के 80% हिस्से पर कब्जा कर लिया है.

अब उलझन यह कि एंड्रॉयड वाला मोबाइल तो 3000 रूपये का भी आता है और 50,000 रूपये का भी! तो ध्यान दीजिये कि स्पार्क प्लग वाले पेट्रोल इंजिन वाली टाटा नैनो 2 लाख की आती है तो फोर्ड इको-स्पोर्ट 10 लाख में मिलती है.

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि एंड्रॉयड का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्मार्टफोन और टैबलेट से बाहर निकल कर कभी सोचा आपने कि एंड्रॉयड माइक्रोवेव ओवन में भी समाहित हो सकेगा! जी हाँ, मोबाइल वाला यह ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड, माइक्रोवेव भी चला सकता है.

इस माइक्रोवेव की खूबी है कि इंटरनेट से जुड़ कर पाक विधियां डाउनलोड कर सकता है, उन विधियों में प्रयुक्त होने वाली सामग्री की सूची पढ़ कर सुना कर सकता है, खाना बन जाने पर यह ई-मेल या एस एम एस द्वारा सूचित भी कर सकता है.

एंड्रॉयड वाला डिजिटल कैमरा तो है ही, बाजार में एंड्रॉयड से चलने वाला रेफ्रिजरेटर भी आ चुका है. सैमसंग के एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर bspabla-androidचलने वाले रेफ्रिजरेटर में 8 इंच की एलसीडी स्क्रीन लगी है और यह वाई-फाई समर्थ है.  हाल ही में सैमसंग ने भी गैलेक्सी गियर के नाम से स्मार्टवॉच प्रस्तुत की है, जिसे अपने एंड्रॉयड आधारित स्मार्टफोन से जोड़ा जा सकता है. आने वाले सालों में तो आम घड़ियों की जगह यही स्मार्टवॉच ले लेंगी।

एंड्रॉयड आधारित रोबोट्स भी आने वाले हैं, जिसे एंड्रॉयड स्मार्टफोन या टैबलेट पर स्थापित एप्प की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है. पुराने एलसीडी टीवी को यूएसबी जैसी एंड्रॉयड वाली एक छोटी सी युक्ति से स्मार्ट टीवी में बदल सकते हैं.

एंड्रॉयड आधारित कार, वाशिंग मशीन,  चिकित्सीय उपकरण  तो आ ही रहे हैं स्मार्ट होम भी एंड्रॉयड की देन होगा. और भी ना जाने क्या क्या! आप भी चाहें तो इस मानव रूपी रोबोट एंड्रॉयड को डाउनलोड कर अपने यांत्रिक सपनों को साकार कर सकते हैं. क्लिक कीजिए यहाँ

यह जान लीजिये, मान लीजिये निश्चित ही आने वाली दुनिया एंड्रॉयड की ही होगी. फिर ना कहिएगा कि एंड्रॉयड क्या है?

पता चल गया ना?

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