एक चिंतित पिता की समस्या का निवारण

दो दिन पहले एक विभागीय मित्र ने सम्पर्क किया। कुछ भ्रमित से लग रहे मित्र ने जो कुछ कहा-सुना वह कुछ इस तरह था कि उनका पुत्र इंज़ीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लेना चाहता है। इस संबंध में कई जगह आरम्भिक परीक्षा दे चुका है। रैंक अलग अलग आये हैं। उसे दक्षिण भारत के एक निजी विश्वविद्यालय में दाखिला मिल ही जायेगा।

मित्र की समस्या यह थी कि उस विश्वविद्यालय ने अपने विवरणिका जैसे तमाम स्थानों पर स्वयं को नम्बर 1 घोषित कर रखा था। जो उन्हें खटक रहा था और वे बिना पुत्र के संज्ञान में लाये इस बारे में वास्तविकता जानना चाह रहे थे। मैंने उन्हें घर पर आमंत्रित किया। कुछ नियामक संस्थायों की आधिकारिक वेबसाईट्स पर संबंधित विवरण दिखाये। आधे घंटे बाद ही वे धन्यवाद कहते हुये, अपना निर्णय ले कर जा चुके थे।

मैंने उन्हे दिखाया था कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission -UGC) के अंतर्गत स्वायत्तशासी संस्था (National Assessment and Accreditation Council -NAAC) में किस प्रदेश में, किन यूनिवर्सिटी को कौन सी रैंकिंग मिली हुयी है, कौन से कॉलेज को क्या ग्रेड दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) के तहत गठित All India council for Technical Education -AICTE से कौन सी संस्थायें मान्यता प्राप्त हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission -UGC) ने किन संस्थायों/ यूनिवर्सिटिज़ को जाली घोषित किया हुया है। वे इंदिरा गाँधी मुक्त विशविद्यालय (IGNOU) की जानकारी भी ले कर गये।

गैर-आधिकारिक वेबसाईट्स में उन्हें विकिपीडिया पर इंजीनियरिंग कॉलेजों की रैंकिंग सूची, टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की व्यवसायिक वेबसाईट पर भारत के कॉलेजों की सूची व विवरण, 2009 के लिए टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों की सूची से भी बहुत सहायता मिली।
मैंने सोचा शायद ब्लॉग जगत पर भी किसी को ज़रूरत हो?
एक चिंतित पिता की समस्या का निवारण
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एक चिंतित पिता की समस्या का निवारण” पर 11 टिप्पणियाँ

  1. एक बात बतानी रह गयी थी कि 2009 के लिए टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों की सूची वाली वेबसाईट खोले जाने पर मेरे कम्प्यूटर का एंटीवायरस चेतावनी देता है कि ‘कुछ गड़बड़’ है।

    मुझे दोष मत दीजियेगा 🙂

  2. इतनी अच्छी जानकारी और इकठ्ठी जानकारी के बाद दोष कही देंगे जी..
    हम तो शुक्रिया कहेंगे..

  3. pabla jee bahut hee achhee baat kahi jo sachmuch hee kitno ke saath hotee hai…..kaash ki sabke paas aapke jaise dost hote….

  4. बहुत सही जानकारी दिया,
    आज कल के नये युवा जो बहुत बेचैन है,
    जिनके तकते नैन है,
    की कितना जल्द इंजिनियर बन जाए,
    इसी चक्कर मे फँस भी जाते है,
    और फिर बस पछताते है,
    अब आपके समीकरण से कुछ काम आसान हो जाएगा,
    जो लोग जानकारी बटोरेंगे,
    खुश हो जाएगें,
    और सही जगह से इंजिनियर बन कर लौटेंगे.

  5. हम्‍म । ठीक ऐसी ही जानकारियां हमने युवाओं के अपने कार्यक्रम में विविध भारती से देनी शुरू की हैं । क्‍योंकि ये वाकई बहुत बड़ी दुविधा होती है जी ।

  6. पाबला जी, इस जनसेवा के लिये मेरे दिल से आपके लिये बस शुभकामनायें निकलती हैं

  7. सही सोंचा ..अभी बहुतों को जरुरत पड़ेगी रिजल्ट निकलने का सीजन है ..बहुत धन्यवाद.

  8. जुग जुग जियो जी।

  9. विनोद कुमार पांडे जी की ही बात का समर्थन करूँगा युवा से ज्यादा पिता बेचैन रहते हैं किसी तरह से अपने नालायक से नालायक बच्चों को किसी भी चाल टाइप के ईंजीन्यरिंग स्कूल में डालने के लिए ताकि समाज में हम किसी से कम नहीं की स्थिति बन जाये
    हे भगवान् इतने स्कूलों से निकलने वाले इन्जेनीयर क्या पंचर की दूकान खोलेंगे

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