एक ब्लॉगर ने मांग ली माफी, दूसरे का ब्लॉग F.I.R. के बाद बंद करवाया गया गूगल से

जैसा कि मुझे अंदेशा था वैसा ही हुआ। पिछली पोस्ट में महिला ब्लॉगर के ब्लॉगिंग छोड़ने और फेसबुक पर पुलिस रिपोर्ट दर्ज़ करने के बाद ब्लॉग बंद किए जाने की जानकारी देता संदेश! इन दोनों घटनाओं को आपस में जोड़ कर अधिकतर व्यक्तियों ने देखा। जबकि हकीकत में इन दो घटनाक्रमों का कोई संबंध नहीं है।

ताज़ा घटना क्रम के पहले एक बात बताता चलूँ कि 2009-10 में विभिन्न ब्लॉगों के लेखों और टिप्पणियों के सहारे, मुझ पर, नाम ले कर, कुछ ब्लॉग स्वामियों तथा बेनामियों द्वारा लगातार आपत्तिजनक बातें की गईं। इनमें से एक को चेतावनी देने पर ‘उखाड़ लो क्या उखाड़ना है’ का ज़वाब ब्लॉग लेखक और टिप्पणीकार से मिला तो मैं चुप्पी साध गया। दूसरे ही दिन अपने स्थानीय वकील की सहायता से उस ब्लॉगर को ईमेल पर ही नोटिस भिजवा दिया। साथ ही साथ पतासाजी कर डाक का पता भी हासिल कर उस पर भी रवाना कर दिया स्पीड पोस्ट। जो कि स्वीकार भी कर लिया गया

इस बीच बंदे ने अपना शहर ही बदल लिया और ब्लॉग पर भी सक्रिय ना रहे। नए शहर का पता भी मैंने हासिल किया और पहले वाले नोटिस को फिर उस पर भिजवाया। साथ ही साथ उनके कथित दोस्त के माध्यम से संदेश भी भिजवाया कि अगर नोटिस का ज़वाब ना मिला तो मामला सीधे अदालत में होगा और फिर करते रहें हर महीने दो महीने में सैकड़ों किलोमीटर का सफ़र

इस बार तत्काल प्रतिक्रिया मिली और फोन पर अपने किए पर खेद प्रकट हुआ। लेकिन मैंने उनकी एक ना सुनी। जैसा मैंने ठाना हुआ था वैसा ही उन्हें दोहरा दिया कि मेरे शहर में आ कर मेरे सामने बैठ कर, दो गवाहों के सामने अपनी खुद की हस्तलिपि में भले ही दो पंक्तियों का माफ़ीनामा लिखो लेकिन आना तो पड़ेगा।

तारीख बता कर वह अपने एक मित्र के साथ आए। स्टेशन से सीधे तृप्ति रेस्टारेंट। अपने और मेरे मित्र के सामने माफ़ीनामा लिखा, लंच किया, फोटो शोटो ली गईं, कॉफ़ी का दौर चला और वापस दुर्ग स्टेशन।

ट्रेन जब आती दिखने लगी तो उम्र में मुझसे छोटे उस ब्लॉगर ने एकाएक पाँव छू कर आग्रह किया कि इस बारे में किसी को कुछ बताया दिखाया ना जाए। मैंने कंधा थपथपा कर आश्वस्त किया कि कभी जिक्र हुआ तो प्रतीकात्मक उल्लेख ही होगा चिंता ना करें। आजकल शायद वे अपनी नौकरी में व्यस्त रहते हैं और साल में एकाध पोस्ट ही आती है ब्लॉग पर।

इसके पहले भी ऐसा ही कुछ 2008 में एक और ब्लॉगर के साथ भी हुआ था। वे ज़नाब तो अब गुमनामी के अंधेरे में खो चुके।

blog closed

यह सब मुझे तब ख्याल आया जब पिछले सप्ताह सुबह सुबह एक ब्लॉगर साथी का फोन आया कि उनके मित्र का ब्लॉग गूगल ने बंद कर दिया है। लेकिन जैसे जैसे उनकी बात आगे बढ़ी वैसे वैसे स्थिति की गंभीरता का अहसास होने लगा।

मामला कुछ ऐसा था कि मध्यप्रदेश स्थित एक शहर से चलने वाले ब्लॉग पर धर्म संबंधी तार्किक आलेखों की भरमार थी, जो कई व्यक्तियों के लिए असहजता का बायस बनी। विश्वसनीय सूत्रों की अपुष्ट जानकारी के अनुसार इस ब्लॉग के आलेखों पर उच्च स्तर के राजनैतिज्ञों में भी कसमसाहट शुरू हो चुकी थी।

ब्लॉग लेखक को कई प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संदेश दिए गए लेकिन वे नहीं माने। तब महाराष्ट्र के एक शहर में उस ब्लॉग के विरूद्ध I.P.C. के सेक्शन 153(1), 505(1)(b)(c) सहित Information Technology Act 2008 (Revised)  की 66(A) के अंतर्गत 28 सितंबर 2011 को पुलिस में रिपोर्ट लिखाई गई। मामला उसी शहर के फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पहुंचा। ब्लॉग के आलेख और उस पर आई टिप्पणियाँ देखी गईं और फिर माननीय न्यायालय ने ब्लॉग बंद करने का मौखिक आदेश पारित किया 3 अक्टूबर 2011 को । और उसी दिन चिट्ठी भेज दी गई भारत सरकार के संचार एवं सूचना मंत्रालय के अधीन Computer Emergency Response Team को। जिसने संपर्क किया गूगल के दिल्ली कार्यालय को। फिर क्या था गूगल बाबा ने उस ब्लॉग की हवा निकाल दी

जिस ब्लॉगर साथी ने मुझे फोन किया था उनकी जिज्ञासा यही थी कि बड़ी ही मेहनत और खोज-परख के बाद लिखे गए वह सैकड़ों आलेख किसी प्रकार वापस मिल सकेंगे क्या? मुझे ध्यान आया इंदु पुरी गोस्वामी जी के ब्लॉग का जिसे गूगल ने बंद कर दिया था और उनके सारे आलेख वापस मिल गए थे एक ट्रिक से। वही तरीका उन बंधु को बताया। अब पता नहीं उन्होंने उसका पालन किया कि नहीं।

फिलहाल मामला अदालत में है। अब आगे आगे देखिए होता है क्या?

इन दो मामलों का यहाँ उल्लेख करने का मंतव्य यही है कि हिंदी ब्लॉगिंग को बार बार शैशवावस्था में बताया जाना अब बंद हो और इस अनोखी विधा को गंभीरतापूर्वक अपनाने की ओर ठोस कदम बढ़ाए जाएँ।

लेकिन कहने भर से कुछ होगा क्या?

एक ब्लॉगर ने मांग ली माफी, दूसरे का ब्लॉग F.I.R. के बाद बंद करवाया गया गूगल से
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एक ब्लॉगर ने मांग ली माफी, दूसरे का ब्लॉग F.I.R. के बाद बंद करवाया गया गूगल से” पर 59 टिप्पणियाँ

  1. वड्डे भापा जी, सत श्री अकाल…
    व्यस्तता की वजह से बहुत दिनों बाद आपकी दुकान पर पधारना हुआ… बदला-बदला सा चकाचक माहौल है एकदम…
    क्या एक सलाह देने की गुस्ताखी कर सकता हूँ – विज्ञापन और फ़ोटो के बीच मुख्य Text का Font बहुत छोटा दिख रहा है, थोड़ा सा बड़ा करें।
    अब आते हैं मुख्य बात पर – आपने तो सही सलाह ही दी होगी, लेकिन जिनका ब्लॉग बन्द हुआ है क्या वे सज्जन आपकी तरह तकनीकी ज्ञान रखते होंगे? कि वे गूगल द्वारा बन्द की हुई सामग्री वापस निकाल सकेंगे?
    टिप्पणीकर्ता Suresh Chiplunkar ने हाल ही में लिखा है: Shri Gopal Ratnam, RSS and Social Service in TamilnaduMy Profile

    • Thinking

      सलाह तो ठीक है लेकिन किस स्थान का विज्ञापन और कहाँ की फोटो?

      जो तकनीक सक्षम हैं वह गूगल द्वारा बंद किए गए ब्लॉग की सामग्री वापस निकाल सकते हैं

      लगता है दुकान की रेट लिस्ट बदलनी पड़ेगी
      Overjoy

  2. गलती उन ब्लॉगर महोदय की भी है। वैसे तो सभी लोगों को अपने ब्लॉग का बैकअप लेते रहना चाहिये पर खासकर दो प्रकार के लोगों के लिये तो यह बहुत ही जरूरी है, एक तो वे जो बहुत शोध करके अपने लेख लिखते हैं दूसरे वे जो संवेदनशील मामलों पर लिखते हैं।

    अगर किसी को लगता है कि उनके द्वारा लिखे जाने वाला ब्लॉग बन्द होने की संभावना है तो उसे स्वयं का डोमेन नेम और होस्टिंग लेकर वहाँ लिखना चाहिये, ज्यादा शंका हो तो ये दोनों चीजें भी विदेशी सेवा प्रदाता से ली जा सकती हैं। गूगल बाबा से तो सरकार कभी भी बन्द करा सकती है, अपने डोमेन वाले को ज्यादा से ज्यादा देश में बैन कर दिया जायेगा जिसे प्रॉक्सी के जरिये देखा जा सकता है।
    टिप्पणीकर्ता ePandit ने हाल ही में लिखा है: क्या स्मार्टफोन, टैबलेट और डैस्कटॉप कम्प्यूटर एकीकरण की ओर बढ़ रहे हैं?My Profile

    • Smile

      संयोग ही कह लीजिए
      मेरे अगले लेख का विषय है कि
      आखिर गंभीर, स्थापित ब्लॉगर मुफ्त का गूगल मंच छोड़कर, हजारों रूपए खर्च कर अपनी खुद की वेबसाईट पर क्यों चले जाते हैं?

  3. एक  बात  मेरी समझ में नहीं आई |
    क्या ब्लॉग्गर लोग अपने लेखों की एक सुरक्षित   प्रति अपने पास अपने ही कंप्यूटर पर नहीं रखते ?
    यदि इस  ब्लॉग्गर  ने ऐसा  किया होता तो यह नौबत नहीं आती |
    हम तो हमेशा ऐसा ही करते हैं और इसके अलावा मेरा Dropbox account भी है जहाँ मैं अपने सारे फ़ाईलों का backup copy रखता हूँ  |

    यह जानकर खुशी हुई कि आप भिलाई इस्पात  कार्खाने से जुडे हुए हैं  ।
    मैं भिलाई आया हूँ 
    मैंने 26 साल तक MECON में नौकरी की थी |

    शुभकामनाएं 
    जी विश्वनाथ 

    • Delighted

      अरे वाह!
      कितने समय तक रहे आप भिलाई में?

      रही बात ब्लॉगों का बैक-अप रखने की
      तो
      मुफ्त की सलाह पर कौन ध्यान देता है!

      • पाबलाजी,

        हम भिलाइ आए हैं, दौरे पर
        वहाँ कभी पोस्टिन्ग नहीं हुई।
        १९७४ से लेकर १९८२ तक, बेंगलौर में बैठे बैठे, हमने Bhilai 4MT Expansion Project पर काम किया था और कभी कभी भिलाई आया करते थे।
        भिलाइ के दिन अब भी याद हैं । आखरी बार मैं पहुँचा था १९८५ में, मई के दिनों में और गरमी से परेशान हुआ था।
        बेंगलौर में गरमी के दिनों में भी कभी तापमान ३६ से अधिक नहीं होता।
        भिलाइ में उस दिन ४५ से लेकर ४७ तक पहुँचा था। ऐसी गरमी का अनुभव पहली बार जिन्दगी में किया।

        जब भी back up की बात चलती है हम Drop Box के गुणगान करने लगते हैं।
        कार्यालय के डेस्क्टॉप पर, घर में अपने लैपटॉप पर और अपना IPAD2 पर भी इसे install कर लिया।
        मरे सभी फ़ाइल सुरक्षित रहते हैं और synchronised भी रहते हैं और दुनिया के किसी भी कोने से (जहाँ internet की सुविधा हो) उन फ़ाइलों तक पहुँच सकता हूँ और उन पर काम भी कर सकता हूँ, कोई भी PC या laptop से। Cyber cafe से भी अपने फ़ाइलों तक पहुँच सकता हूँ, उन्हें edit करके फ़िर से save कर सकता हूँ और धर या कार्यालय पहुँचते ही, जैसे ही हम internet पर login करते हैं, यह फ़ाइलें अपने आप update हो जाते हैं। खर्च? कुछ भी नहीं। जिन्हें रुचि हो, dropbox.com पर जाएं और अपना खाता खोलें। २ GB का storage मुफ़्त में उपलब्ध है और यह मुफ़्त का खाता आप औरों को आमंत्रित करके और उन्हें खातेदार बनाकर, ८ GB तक ले जा सकते हैं, । इससे ज्यादा storage के लिए, कुछ खर्च करना पडता है।

        हाँ एक और बात आपसे कहना चाहता था।
        अन्य web site की तुलना में, आपका web site load होने में बहुत ज्यादा समय लगता है।

        शुभकामनाएं
        जी विश्वनाथ

        • Delighted

          विश्वनाथ जी

          यहाँ गरमी की बात ही कुछ और है

          ड्रॉप बॉक्स की सुविधा तो वाकई में बहुत बढ़िया है
          मैं खुद भी इसका उपयोग करता हूँ

          web site load होने में जो ज्यादा समय लग रहा उसे कम करने की कोशिशे जारी हैं

          सादर

  4. बढ़िया जानकारी मिली| दो दिन से इंतजार था इस पोस्ट का|
    खैर हम तो एसा कभी लिखते ही नहीं कि सरकार या किसी और को कोई तकलीफ हो फिर भी कभी गूगल बाबा ने आँखें तरेर ली तो कोई बात नहीं , आपकी इस पोस्ट ने हमें तो आश्वत कर ही दिया कि गूगल बाबा के रुठते ही पाबला बाबा के दरबार में हाजिरी लगाकर अपनी खोयी ब्लॉग पोस्ट वापस पा लेंगे 🙂

    • Pleasure

      मुझे याद आ रहा
      बसों ट्रेनों में लिखा रहता है
      (ब्लॉग) यात्री अपने सामान का खुद ख्याल रखे
      हा हा हा

  5. @ तृप्ति रेस्टोरेंट १,
    वो सारा घटनाक्रम मुझे याद है ,बंदा कम उम्र नौजवान था सो मामले का पटाक्षेप जिस तरह से हुआ वो ठीक ही लग रहा है !

    @ तृप्ति रेस्टोरेंट २,
    एक बेहद रोमांटिक गाना याद आया पर आपके मामले , रेस्तरां के माहौल और इन्वाल्व पार्टीज के गेटअप में फिट ही नहीं बैठ रहा ससुरा ! बहरहाल वो मिसफिट ख्याल कुछ यूं था …

    ‘पाँव छू लेने दो फूलों पे इनायत होगी’ 🙂

    @ वास्ते न्यायालयीन प्रकरण ,
    ब्लागर की मुफ्त सुविधाओं के चलते ऐसे तर्कदार ब्लागों का अफारा हो गया है 🙂
    फैसला लेने के लिए माननीय न्यायालय को भी गूगल में खो गये , उन तर्कदार आलेखों की ज़रूरत ज़रूर होगी 🙂
    टिप्पणीकर्ता ali syed ने हाल ही में लिखा है: वे सूरज को स्पेस नहीं देते !My Profile

  6. आँखे खोलने वाला लेख …. बेहतरीन और नयी जानकारी देने में आपका जवाब नहीं भाई जी !
    आभार के साथ आपको हार्दिक शुभकामनायें !
    टिप्पणीकर्ता सतीश सक्सेना ने हाल ही में लिखा है: लड़कियों का घर ? – सतीश सक्सेनाMy Profile

  7. बहुत अच्‍छी जानकारी मिली। आपके ब्‍लाग पर अन्‍य टिप्‍पणियां आउटलुक में पढ़ी नहीं जाती, इसके लिए ब्‍लाग पर ही आना होता है। क्‍या करें?

  8. पाबला जी, सत् श्री अकाल !
    तुसी ते ब्लागर दे मसीहा हो !खुश और स्वस्थ रहो !
    आप का ब्लॉग मेरे पास देर से खुलता है ?
    इंदु पूरी गोस्वामी की नई पोस्ट मेरे गूगल रीडर पर नही
    आ रही ..?कष्ट निवारण कर्रो ! आभार !
    हाँ मेरा पता भी आप की टिप्पणी बाक्स में ठीक नही है ?
    नई देहली की जगह गुडगाँव हरयाणा आता है ..?
    टिप्पणीकर्ता अशोक सलूजा ने हाल ही में लिखा है: आइए….मेहरबां ,बैठिए जाने-जां….My Profile

    • सति श्री अकाल अशोक जी

      पहले दिक्कत थी
      अभी शाम 8 बजे से कुछ बदलाव किये गए हैं
      देख कर बताईयेगा कि अभी क्या परिणाम है साईट खुलने से संबंधित

      इंदु जी की ब्लॉग कड़ी बदल गई है. एक बार जांच लीजिएगा

      पता बताना एक सॉफ्टवेयर का काम है.
      जो वही ठिकाना बताता है जहां के सर्वर से आपको इंटरनेट की सेवा मिलती है

  9. वाह वाह ! सही आईना दिखाया है ।
    हालाँकि अभी भी कुछ शेष हैं ।

  10. एक अच्छे फोरम का घटिया इस्तेमाल करने वाले भी होते हैं. मगर आपने सबक सिखाया , यह बड़ी बात है. मैं चाहता हूँ, सभी चाहते हैं, की ब्लॉग की दुनिया में विचारवान लोग बढ़ें, कुछ सार्थक सामने आये. मगर कभी-कभी टुच्चेपन को भी छेलना पडेगा. अच्छे-बुरे लोग हर जगह हैं. आप जैसे लोगों से भी लोग इस तरह का आचरण कर सकते हैं, आश्चर्य, मगर चलो आपने बता ही दिया की आप क्या हैं…

  11. बढिया जानकारी।
    आपकी सलाह के मुताबिक ब्‍लाग का बेकअप हर नए पोस्‍ट के बाद ले लेता हूं।
    कभी जरूरत पडी तो आपकी मदद लगेगी।
    फिलहाल शुक्रिया जानकारी के लिए।
    टिप्पणीकर्ता अतुल श्रीवास्‍तव ने हाल ही में लिखा है: अध्‍ययन यात्रा बनाम दारू पार्टी…. !!!!!My Profile

  12. इतना कुछ हो रहा है! संभलकर रहना चाहिए और किसी भी अति में नहीं पड़ना चाहिए.
    प्रवीण पाण्डेय जी से सहमत 🙂

    • Felon

      किसी आपत्तिजनक बात पर, भारत के प्रत्येक नागरिक को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाने का अधिकार है
      आप भी तो भारतीय नागरिक हैं

  13. प्रकाश पर्व की शुभ-कामनायें.
    ब्लॉग तकनी के प्रकाण्ड विद्वान के लेख पढ़ कर ज्ञानवर्द्धन कर लेते हैं.आभार.

    • शुभकामनायों हेतु धन्यवाद अरूण जी

      विद्वान वाली कोई बात नहीं
      मानव रोज ही कुछ ना कुछ सीखता है
      और सीखी हुई बातें कोई बताता है कोई नहीं
      Heart

  14. Yes-Sir

    चलो कम से कम न्यायालय को भी पता चला कि हिन्दी ब्लॉगिंग नाम की भी कोई बला सिर उठा रही है और अब जल्दी ही इस तरह के मुकदमे आने वाले हैं, तो उनका काम बड़ने वाला है। वैसे आंग्लभाषा में बहुत सारी वेबसाईट्स और ब्लॉग हैं, जो कि कुछ इसी प्रकार की हैं, शायद न्यायालय वह भी संज्ञान में ले ।

    Delighted
    टिप्पणीकर्ता विवेक रस्तोगी ने हाल ही में लिखा है: लिव-इन रिलेशनशिप मतलब बराबर का खर्चाMy Profile

  15. एक सीखी हुई बात हमें भी बताने की कृपा करें.
    बीच बीच में ये प्यारे प्यारे emoticons आप कैसे ठूंस देते हैं ?
    क्या हम भी अपनी टिप्पणी में इनका प्रयोग  कर सकते हैं? 
    कैसे? 
    Comment Box में कोई option नहीं दिखता .
    टिप्पणी को कहीं और टाईप करके यहाँ चेपने के लिये तैयार हूँ. 
    Comment Box में विवेक रस्तोगी का नाम, ईमेल, और वेब साईट पहले से ही छपा है और उसे मिटाकर अपना नाम लिखना पड रहा है , ऐसा क्यों? 

    आपका ब्लॉग साईट अब  जल्द  ही load हो रहा है 
    लिखते रहिए, हम आते रहेंगे. 
    शुभकामनाएं 
    जी विश्वनाथ 

    • Heart

      विश्वनाथ जी,

      आप भी अपनी टिप्पणी में इनका प्रयोग कर सकते हैं
      Comment Box के नीचे की ओर कुछ विकल्प हैं
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      आपके द्वारा चाहा गया विकल्प तीसरे स्थान पर है। उस [+] Zaazu Emoticons पंक्ति पर एक क्लिक कीजिए आपके सामने दसियों प्यारे प्यारे emoticons आपको गुदगुदाते हुए नज़र आएँगे

      किसी एक पर क्लिक कीजिए। उसके प्रतीकाक्षर टिप्पणी बक्से के भीतर दिखने लगेंगे जो प्रकाशित होने पर अपने मूल चित्र में बदल जाएँगे

      है ना मज़ेदार I-got-an-idea

  16. अरे वाह !
    अब  हम  भी इसका प्रयोग करेंगे. 
    कभी कभी एक emoticon के जरिये बहुत कुछ कह सकते हैं जो शब्दों में नहीं कह सकते .
    अभी इसी  वक़्त  आजमाता  हूँ 
    THANK-YOU
    धन्यवाद और शुभकामनाएं 
    जी विश्वनाथ 

  17. us blog par maulik to kuchh tha nahi, kai jagah se liya gaya anuvaadit kaary tha, lekin yahi hai asaliyat! DIG bhi mansik chikitsalay me ja sakta hai to phir… Distort

  18. माजरा क्या था?वो कौन थे? दोनों का ज़िक्र न करके आपने अपना बडप्पन दिखाया है.जो भी हुआ हो ब्लोग्को किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाने या आहत करने के लिए यूज नही करना चाहिए.सामने वाले ने कितनी भी बड़ी गुस्ताखी भले की हो.यह मेरे व्यक्तिगत विचार है.इसलिए आपके लिए मेरे मन मे सम्मान है और……वो और बढा है.यहाँ आने पर कई नई जानकारियां मिलती है.सीखती नही हा हा हा आप है न.हर कमेन्ट को भी पढ़ती हूँ और लो ..अब तो मुस्कराते चेहरों के आइकन्स लगाना मैं भी सीख गई. Wink
    मेरे ब्लॉग के बंद होने का कारण मेरी एक शरारत भर थी. खुद को उम्र के ओप्शन मे माइनर बता दिया था मैंने Overjoy हा हा हा क्या करूं?ऐसिच हूँ मैं तो. जानकारी भरे आलेख के लिए……….?????? क्या लिखूं?थेंक्स या बधाई???? जो मर्जी ले लो..दोनों ले लो .आप भी क्या याद रखेंगे की…..कोई ‘मिली’ थी (शैतान की) ‘नानी’ हा हा Tounge-Out

  19. अब देखो भाई फलदार पेड़ पर पत्थर तो मारे ही जाते हैं न ??? मेरे तो Angel हैं मेरे वीरा !

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