एक ही स्थान पर ऐसे ब्लॉगों का जिक्र, जिनकी चर्चा समाचार पत्र-पत्रिकायों में की गयी

हिंदी ब्लॉगरों के जनमदिन एक स्थान पर पाये जाने वाली पोस्ट के बाद, एक दिन मुझे अपने ही ब्लॉग का जिक्र समाचार पत्र में किये जाने की खबर लगी। बताने वाला यह नहीं बता पाया कि समाचार-पत्र कौन सा था, लेकिन पोस्ट ज़रूर बता दी। उत्सुकता हुयी कि आखिर वह कहाँ छपी है और क्या लिखा गया है। हमने पता लगाना शुरू किया। ‘विक्टोरिया नम्बर 203’ जैसा बड़ी टेढ़ी खीर वाला लगा यह काम। चाबी (पोस्ट) थी, लेकिन ताला (समाचार पत्र) नहीं! फिर खबर लगी कि ‘उसे’ एक ऐसे न्यूज़ पेपर पर देखा गया है जिसका एक संस्करण हमारे क्षेत्र से भी निकलता है। हमने अंदाजा लगाया और तीर निशाने परबैठा।

हमने सोचा, पता नहीं ऐसे कितने ही ब्लॉगर होंगें, जिन्हें मालूम भी नहीं होता होगा कि उनकी किसी पोस्ट की, किसी समाचार पत्र या पत्रिका या ऐसे ही किसी प्रिंट मीडिया में तारीफ की गयी है, चर्चा की गयी है, उद्धृत किया गया है। पता चल भी जाये तो उसकी झलक पाने के लिए कितने ही पापड़ बेलने पड़ते होंगे। इस सोच का परिणाम यह निकला कि एक ब्लॉग बना डाला गया ‘प्रिंट मीडिया पर ब्लॉग चर्चा’। अपने ब्लॉग पोस्ट की कतरन तलाशी में जितनी जानकारी मिली, सभी इस ब्लॉग में डालनी शुरू कर दी। अब समस्या यह आयी कि किस कतरन को पहले रखा जाये किसे पीछे। समाधान यह निकाला गया कि जिस तारीख की कतरन है, उसी तारीख पर संबंधित पोस्ट लिखी जाये, फिर भले ही वह दो-तीन साल पहले की हो।

बड़ा समय खाऊ काम लगा। वैसे ही व्यस्तता रहती है। मैंने सोचा जब बना ही लिया है यह सूचनात्मक ब्लॉग, तो क्यों न इसमें उनको शामिल किया जाये जिनके ब्लॉग की चर्चा की गयी है या जिन्होंने उन ब्लॉग लेखकों को सूचना दी है उसके जिक्र की।

तो इस पोस्ट के माध्यम से मैं उन सभी ब्लॉगर साथियों को आमंत्रित करता हूँ, जो इस ‘प्रिंट मीडिया पर ब्लॉग चर्चा’ नामक ब्लॉग में अपना योगदान चाहते हैं। वे औपचारिक निमंत्रण पाने के लिए पर ईमेल करें। उन्हें निमंत्रण भेज दिया जायेगा। इस पोस्ट के माध्यम से यह प्रक्रिया इसलिये अपनानी पड़ रही है क्योंकि कुछ साथियों को भेजा गया निमंत्रण अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है तथा इच्छुक साथियों की मुझे पूर्ण जानकारी नहीं है। इच्छुक सहयोगी साथियों से एक अपेक्षा रहेगी कि इस ‘प्रिंट मीडिया पर ब्लॉग चर्चा’ब्लॉग पर संबंधित कतरन लगाने के साथ अधिकतम दो वाक्य ही लिखें तथा लेबल में संबंधित ब्लॉग़/ ब्लॉग्स का प्रचलित नाम ही लिखें। जिससे सूची द्वारा ब्लॉग तक पहुंचना आसान हो।

इस पोस्ट को लिखते लिखते GTalk पर घूघूती बासूती जी अवतरित हो गईं। हमने झट से उनको बधाई दी, उनकी पॉलीथीन वाली पोस्ट का उल्लेख, दैनिक हिंदुस्तान में किए जाने पर। वे चौंकीं। कहने लगीं ‘भई कोई खबर देगा, तब तो पता चलेगा! कहाँ है उनका उल्लेख?’ हमने झट से उन्हें वह पोस्ट दिखायी। उतनी ही फुर्ती से उन्होंने, (उस कॉलम के लेखक) रवीश कुमार जी को धन्यवाद देते हुये टिप्पणी भी कर दी और वह बन गयीं उस नये नवेले ब्लॉग़ की प्रथम टिप्पणीकर्ता!

हालांकि अभी भी ढ़ेरों कतरनें मेरे पास पड़ी हुयी हैं, जैसे जैसे समय मिलता जा रहा है, इन्हें डालते जा रहा हूँ। किन्तु आपके सहयोग के बिना, यह निरंतर चलने वाला कार्य पूर्णता की तरफ बढ़ नहीं पायेगा।

जो साथी, ब्लॉग में सहभागी नहीं बनना चाहते वे यदि संबंधित सूचना भी मुझ तक पहुँचा दें तो बहुत सा समय बच जायेगा।

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एक ही स्थान पर ऐसे ब्लॉगों का जिक्र, जिनकी चर्चा समाचार पत्र-पत्रिकायों में की गयी” पर 15 टिप्पणियाँ

  1. अच्छा विचार है जी।

  2. हिन्दी ब्लागजगत ने एक संस्था का रूप ग्रहण कर लिया है। जब आवश्यकता होती है तो लोग उस संस्था को विकसित करने में स्वेच्छापूर्वक ही लग पड़ते हैं। वे ही उस संस्था के संस्थापक होते हैं। उन में एक आप भी हैं।
    आप का कहना भी सही है कि एक अकेले के बूते कोई काम निरंतर नहीं रह सकता। जरूरी है कि लोग सहयोग करें और आप को सूचनाएँ और कटिंग के चित्र आप को भेजें। मुझे लगता है कि सब सहयोग करेंगे।

  3. ब्लाग जगत के संस्थापक बनने के लिए बधाई:)

  4. अच्छा विचार है जी ….आपकी मदद करेंगे…हमारे विषय में कही किसी ने भूले-भटके लिख दिया हो तो सूचित करें धन्यवाद,

  5. अच्छा प्रयास है।

  6. आप विचार पूछ रहे हैं
    अच्‍छा अचार है
    जिसने नहीं डाला है
    वह भी स्‍वाद ले पाएगा
    अचार का यही
    तो है प्रचार।

  7. आप कुछ करे और वो अच्छा ना हो।बधाई हो।

  8. बहुत अच्छा हुआ ये …..दैनिक भास्कर अखबार ने एक बार मेरे ब्लॉग का ज़िक्र किया था …मुझे पता ही नहीं चला

  9. मेरी एक पोस्‍ट कुछ महीने पहले नुक्‍कड़ से अमर उजाला ने प्रकाशित की थी। उसके बारे में कई लोगों ने बतलाया है परन्‍तु मैं वह आज तक नहीं देख पाया हूं। अब उम्‍मीद बंधी है।

  10. is kaam me sabhee ka sahyog milna chahiye aur ummeed hai milega bhee . print aur blog ek tarah se ek doosre se alag naheen aur sampoorak bhee samjhe ja sakte hain . prayas bahut hee achcha hai . badhayee is suruat ke liye .

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