ऑनलाइन लेखन शैली को रखें सर्च इंजिन के अनुकूल

ऑनलाइन लेखन शैली और संबंधित तकनीक पर प्रकाश डालता एक ज्ञानवर्धक लेख

समाचारों और तकनीकी जानकारियों से अलग, ऑनलाइन लेखन की एक अलग ही दुनिया है ब्लॉग. एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफार्म, जहां मूल तौर पर मौलिक लेखन होना चाहिए और स्वाभाविक तौर पर मौलिकता कुछ अनगढ़ ही रहती है, अगर कोई उस क्षेत्र की बारीकियों से परिचित नहीं, तो.

इस ऑनलाइन लेखन को इंटरनेट के अथाह समुद्र से तलाश कर आपके सामने लाने का काम करते हैं गूगल, बिंग जैसे सैकड़ों सर्च इंजिन. एक शब्द या वाक्यांश की तलाश में यह सर्च इंजिन लाखों करोड़ों ऑनलाइन लेखन पन्ने ला पटकते हैं जिज्ञासु पाठक के सामने.

अब अगर सर्च इंजिनों को हम, अपना खुद का ऑनलाइन लेखन तलाश करने और पाठकों के सामने रखने में, स्वयं ही सहायता करें, उन्हें ऊँगली पकड़ कर राह दिखाएँ तो क्या मस्त रहेगा मामला. कितना बढ़िया रहेगा ना!? इधर तलाश करने वाले ने हमारा लिखा जो चाहा वह झट से उस इंटरनेटीय समुद्र के ऊपर ऊपर दिखने लगा!:-)

इसी मदद को नाम दिया गया है सर्च इंजिन अनुकूलता (Search Engine Optimization -SEO)

कुछ कहने से पहले सर्च इंजिन की बात

मेरे सैकड़ों मित्र हैं जो ऑनलाईन (ब्लॉग) लेखन के मामले में बेहद लोकप्रिय हैं. उनमें से भी दसियों ऐसे हैं जिनका कहना है कि वे इतने लोकप्रिय हैं कि उन्हें अब किसी एग्रीगेटर की ज़रूरत नहीं. उसके बावज़ूद भी वे हर एग्रीगेटर की ओर लपकते हैं क्योंकि उन्हें नये पाठक चाहियें. वे यह नहीं समझ पाते कि जो पाठक ब्लॉगिंग की दुनिया नहीं जानता वह किसी एग्रीगेटर को क्या जानेगा. नए पाठक तो सर्च इंजिन से ही मिलेंगे.

ऑनलाइन लेखन गूगल के लिए

यह एक कटु सत्य है कि सर्च इंजिन पर किसी शब्द या वाक्यांश के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध लेखन की खोज हो तो मिलने वाले परिणाम के हजारों, लाखों पृष्टों में पहले, दूसरे, तीसरे पृष्ठ से आगे सामान्य उपयोगकर्ता नहीं जाता. यह एक चौंकाने वाला तथ्य है कि 75% खोजकर्ता पहले पृष्ठ के बाद आगे जाते ही नहीं. अगर उस शब्द या वाक्यांश को समेटने वाला आपका ब्लॉग/ वेबसाईट पहले ही पन्ने पर दिखाई देता है तो उसे सर्वोत्तम SEO माना जाता है उसके बाद के पृष्ठों में इसकी गुणवता कम होती मानी जाती है.

इसी कारण कविता, स्थानीय बोली, खिचड़ी भाषा वाले लेख किसी सर्च इंजिन पर दसियों सैकड़ों पृष्ठ पार लेने के बाद भी नहीं दिखते.

व्यावसायिक बाज़ार

बाज़ार में इस Search Engine Optimization के लिए व्यवसायिक संस्थाएं दसियों हजारों रूपये से ले कर लाखों रूपये लेती हैं फीस के रूप में, यह रकम भी मासिक है 😮 गूगल ऎसी किसी भी सेवा देने वाले को चुनने में सतर्कता बरतने की सलाह देता है

ऑनलाइन लेखन शैली

अब आते हैं इस मुद्दे से हट कर ऑनलाईन लेखन शैली पर. मैं ना तो कोई सलाह दे रहा ना ही किसी की भर्त्सना कर रहा. लेकिन अधिकतर मित्र, लिखते समय मूल बातों की परवाह किये बिना लिखे जाते हैं लिखे जाते हैं. ना तो कहीं अर्धविराम, ना ही कहीं पूर्णविराम और ना ही कहीं कोई पैराग्राफ.

बेतरतीब ऑनलाइन लेखन
बेतरतीब ऑनलाइन लेखन का नमूना, इसे जानबूझ कर धुंधला किया गया है

मेरे जैसा पाठक तो भाग खड़ा होता है ऐसा कुछ दिखते ही. और आपने भी देखा होगा ऐसे लेखन पर या तो बेहद औपचारिक टिप्पणी होती है या तो टिप्पणी ही नहीं होती.

ऑनलाइन लेखन फार्मूला

इस तरह लिखा हुआ चाहे जितना भी श्रेष्ठ हो, यह ना तो मानव को भाता है और ना ही मशीन को! मानव भले ही इसे किसी पूर्वाग्रह में पढ़ ले लेकिन सर्च इंजिन का रोबोट इसे अपनी ‘सहज पठन’ गणना में बहुत कम अंक देता है. उसकी गणना का आधार देखिये

ease-read-formula-bspabla

बाक़ी सब तो आप समझ गए होंगे लेकिन यहाँ Syllables का सही सही अनुवाद मैं नहीं कर पाया. Syllable माने, मानव द्वारा सहज शैली में एक बार बोले जा सकने वाले शब्द. शायद मैं सही समझा रहा तो, दो (अर्ध/ पूर्ण) विरामों के बीच वाले शब्दों से बना वाक्यांश.

इस नुस्खे के हिसाब से जितने ज़्यादा अंक, उतनी श्रेष्ठ ‘सहज पठन शैली’. इसके अनुसार 90 से 100 अंक वाले लेख, 11 वर्ष वाले औसत विद्यार्थी को भी समझ आ जायेंगे, 60 से 70 अंक प्राप्त लेख को 13-15 वर्षीय बच्चा भी सहजता से ग्रहण कर सकता है और  0 से 30  अंक वाले लेख तो कॉलेज वाले ग्रेज्युट की ही समझ आयेंगे.

अमेरिका का रक्षा मंत्रालय, इस नुस्खे को अपने दस्तावेजों और फॉर्म्स के लिए एक मानक मानता है.

गंभीर पाठक इसके बारे में यहाँ क्लिक कर अधिक पढ़ सकते हैं

मुद्दे और भी हैं

आपके ब्लॉग पर, सर्च इंजिन के लगातार टहलते, टटोलते रोबोट्स, लेखन शैली के अतिरिक्त कई तकनीकी बातें को भी ‘देखते’ हैं. इनमें प्रमुख हैं वह विशिष्ट शब्द, जिस पर आपका लेख केंद्रित है. यही शब्द आपके लेख के शीर्षक, लेख की इंटरनेट लिंक, लेख के संक्षिप्त विवरण में भी होना चाहिए, लेख के पहले पैराग्राफ में ही इस विशिष्ट शब्द को समेटे, लेख की भूमिका हो और इसी शब्द का प्रयोग आपके लेख में अधिक से अधिक हो.

ऑनलाइन लेखन के प्रयास

लेख का शीर्षक 70 वर्णों (Characters) से अधिक ना हो, संक्षिप्त विवरण (Meta Description) 156 वर्णों से अधिक ना हो, लेख की कुल शब्द संख्या 300 शब्दों से अधिक हो.

ऑनलाइन लेखन में यह भी आवश्यक है कि लेख की जान कहे जाने वाले विशिष्ट शब्द का प्रयोग पहले कभी आपने ना किया हो, उप-शीर्षक हों, विषयानुसार चित्र हों तथा प्रस्तुत सभी चित्रों में विशिष्ट शब्द का प्रयोग हुआ हो, बाहरी वेबसाईट्स के लिंक हों. ये सब तो सोने पे सुहागा हैं.

ऑनलाइन लेखन

गूगल के ब्लॉग्स पर तो संभव नहीं लेकिन मैंने अपनी सभी वेबसाईट्स पर प्लगइन कहे जाने वाले ऐसे रोबोट तैनात कर रखे हैं जो मुझे किसी पोस्ट के लिखते समय, उपरोक्त सभी तकनीकों को समेटे हुए कॉमेंट्री करते चलते हैं कि मेरा, मेरे लेख का स्कोर 0 से 100 के बीच क्या चल रहा. साथ ही साथ डैशबोर्ड पर ही लाल, नारंगी, हरा सिगनल दर्शाता है कि सर्च इंजिन्स के लिए यह लेख बुरा है, ठीक ही है, बहुत बढ़िया है.

सोशल मीडिया से संबंधित और भी बहुत सी सहायक तकनीकों से लैस इस बेहद प्रभावी रोबोट सैनिक के बारे में आप यहाँ क्लिक कर जान सकते हैं. हिंदी में इसकी बारीकियों, विधियों, जानकारियों की चर्चा ब्लॉग मंच www.BlogManch.com पर की जा सकती है

तकनीक सिर्फ ऑनलाइन लेखन के लिए?

जी नहीं, यह मूल तकनीक भौतिक रूप से सभी आलेखों, प्रपत्रों, पुस्तकों, शोध पत्रों, अध्ययनों आदि पर लागू होती है. इसके अनुसार विश्व प्रसिद्द टाईम पत्रिका का स्कोर 52 और रीडर्स डाइजेस्ट का स्कोर 65 है. कुछ देशों ने तो बीमा पालिसी के लिए भी न्यूनतम 45 का स्कोर तय कर रखा है. हाँ, यह ज़रूर है कि सहायक युक्तियों से इसका उपयोग, ऑनलाइन लेखन के लिए त्वरित परिणाम दर्शाता रहता है.

इस लेख का स्कोर क्या है

चलते चलते आपको यह जानकारी भी देता चलूँ कि ऑनलाइन लेखन शैली और तकनीक पर आधारित इस लेख का स्कोर मेरा रोबोट बता रहा 96.7 और हरी बत्ती तो जल ही रही है. 😉

कुछ ज़्यादा तो नहीं लिख गया ?

© बी एस पाबला

ऑनलाइन लेखन शैली को रखें सर्च इंजिन के अनुकूल
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56 comments

  • यह बहुत जरूरी लेख है , अभी एक दो बार और पढ़कर अपनी वेबसाइट भी ठीक ठाक रखने का ओरायास करूंगा !
    आभार !
    टिप्पणीकर्ता सतीश सक्सेना ने हाल ही में लिखा है: अगर हमने भी डर के ऐसे, समझौते किये होते -सतीश सक्सेनाMy Profile

  • बहुत उम्दा जानकारी….
    आभार सर जी…

  • बढ़िया एवं काम की जानकारी

  • बडी ज्ञान की बातें बताईं, आभार।

    वैसे बताता चलूं कि मेरे पर्सनल बलॉग और मुख्‍य ब्‍लॉग दोनों पर 99;99 प्रतिशत पाठक सर्च इंजन से ही आते हैं। ये और बात है कि ऐसे पाठक कमेंट नहीं देते। 🙂
    टिप्पणीकर्ता Dr. Zakir Ali Rajnish ने हाल ही में लिखा है: नहीं रहे डॉ0 हरि कृष्‍ण देवसरे।My Profile

    • बी एस पाबला says:

      Smile
      निश्चित तौर पर टिप्पणियाँ एक अतिरिक्त संतुष्टि है लेखन की

  • बहुत सुन्दर प्रस्तुति…!

    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (16-11-2013) को “जीवन नहीं मरा करता है” : चर्चामंच : चर्चा अंक : 1431 पर भी होगी!

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    मुहर्रम की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’

  • टिप्‍पणी का दुख तो नुक्‍कड़ को भी गहरा है। वह अब भी हरा है। इसे सुखाएं कैसे,, पाबला जी उपाय बतलाएं वैसे।
    टिप्पणीकर्ता अविनाश वाचस्‍पति ने हाल ही में लिखा है: भारत सरकार ‘बाल भवन’ का नाम बदलकर ‘डॉ. हरिकृष्‍ण देवसरे बाल भवन’ घोषित करेMy Profile

    • बी एस पाबला says:

      Wink
      लेख के सहारे, पाठक को टिप्पणी के लिए उकसाना एक बढ़िया उपाय है

      अगली बार इसी पर लिखा जाए?

  • आभार आपका नवीनतम जानकारी देने के लिए
    टिप्पणीकर्ता रोशन जसवाल ने हाल ही में लिखा है: पत्थर बरसाने का मेलाMy Profile

  • पढ़ रहे हैं, अब परेशान भी करेंगे..
    टिप्पणीकर्ता विवेक रस्तोगी ने हाल ही में लिखा है: ब्लॉगिंग की शुरूआत के अनुभव (भाग ३)My Profile

  • Mahfooz Ali says:

    पाब्ला जी इज़ रियली ग्रेट ….

  • सही लि‍खा है आपने. छोटा और सटीक वैसे भी अच्‍छा लगता है.
    टिप्पणीकर्ता काजल कुमार ने हाल ही में लिखा है: कार्टून :- वो भगवान के श्रााप से ईमानदार हो गयाMy Profile

  • बहुत सटीक आलेख…सारगर्भित…
    टिप्पणीकर्ता समीर लाल “भूतपूर्व स्टार टिपिण्णीकार” ने हाल ही में लिखा है: कुछ वाँ की.. तो कुछ याँ की…My Profile

    • बी एस पाबला says:

      THANK-YOU
      शुक्रिया स्टार टिप्पणीकार

    • indu puri says:

      भूतपूर्व क्यों जी??? अब कोई लिखे ही नही तो आप क्या करें. अरे मुझे ही देख लीजिये. खुद के ब्लॉग का नाम ही भूल गई Tounge-Out

  • उपयोगी जानकारी है।

  • काफी उपयोगी जानकारी है। धन्यवाद।

  • पावला जी,
    मैंने कई ब्लॉग पढ़े हैं, आज भी कुछ ब्लॉग हमेशा पढ़ता हूँ. ये निरंतर मेरे ई-मेल पर आते हैं.
    मैंने महसूस किया है कि इन ब्लॉगों में बहुत सारी गलतियाँ मिलती हैं. इन गलतियों में कॉमा फुलस्टॉप की जो गलतियाँ होती हैं, वह तो अलग, शब्दों के विवरण और वाक्य विन्यास की भी बड़ी गलतियाँ मिलती हैं. आपके इसी ब्लॉग में ‘व्यावसायिक’ शब्द को ‘व्यवसयिक’ लिखा है. यह स्लिप ऑफ पेन तो नहीं ही है.
    इन ब्लॉगों की भाषा को गुनकर तो लगता है हिंदी भाषा में कोई अनुशासन है ही नहीं. श्री वाडनेरकर की भाषा मुझे बहुत सुलझी और सुस्थिर लगती है.
    ः शेषनाथ प्र श्री.

  • बी एस पाबला says:

    Approve
    निश्चित तौर पर यह ‘स्लिप ऑफ़ पेन’ था
    ध्यानाकर्षण हेतु आभार

    वर्तनी की त्रुटियाँ तो वाकई बहुत मिलती है हिंदी लेखन में

  • वाह। उपयोगी लेख।

    लगता है आपके पास आना पड़ेगा एक बार।

  • rohit says:

    बड़ा मुश्किल है भाई इस को समझना…..अगर उंगली पकड़ कर और अपार धैर्य के साथ समझाना चाहें तो हाजिर होउं…..

  • vikas gupta says:

    पाबला जी
    आपका यह लेख संग्रहणीय है और अनुकरणीय भी । मै भी अपने ब्लॅाग पर बहुत ही बेतरतीब तरीके से लिखता हूँ । आगे से ध्यान रखूँगा ।

  • अच्छा लेख है।

    लेकिन इसको ध्यान में रखते हुये ही लिखा जायेगा तो लेख के यांत्रिक हो जाने का खतरा है। 🙂

    • बी एस पाबला says:

      Smile
      जहाँ अनुशासन का पालन होगा वहाँ सब यांत्रिक ही लगता है अनूप जी

    • Ashok Kanaji Sachde says:

      निदिध्यासन याने अपने आपको आप ही अभ्यासः कराना जिससे आत्मकल्याण हो | जो जीवनका लक्ष्यभी है | जड़ शरीर, इन्द्रिया, मन और बुद्धिसे परे खुशामत खुदा को ही प्यारी होती है | इससे नीचे जड़ता गए तो ईश्वरको बुरा लगता है | बस वैसेही जड़ता से परे पतीही परमेश्वर है | मंदीरमें रखीं ईश्वरकी प्रतिमा का दर्शन करते हुवे जो अपने अंदर चेतन का अनुभव करता है उसे ही ईश्वर दर्शनका लाभ होता है | जिसे भगवद गीतामें कुछ ऐसे वर्णन किया है ईश्वर अंश जीव अविनाशी चेतन अमल शहजा सुख राशी | जिसे हम कुछ ऐसेभी समझ शकते है हमारे अंदर के चेतनका सहारा लेके शरीर और मन – बुद्धि को मल रहित करना जिससे ईश्वर चैतन्य का अमल हो शके हमारे द्वारा इस जगपे जो उस चैतन्य ईश्वरकाही है | 

  • दिलीप सोनी says:

    आपका स्कोर 100 प्रतिशत हैं ,पाबला जी ..:)

  • जब भी आपके ब्लॉग पर आता हूँ , हर बार नयी जानकारियां पता हूँ . हिंदी ब्लॉग लेखन में बहुत से ब्लॉगरों को हिंदी व्याकरण , साहित्य और लेखन की जानकारी नही है . कुछ तो बस अपनी भावनाएं , कुछ बकवास और कुछ अपनी भड़ास को अपने ब्लॉग पर लिख देते है . हाँ लेकिन कुछ बहुत ही शानदार लिखते है . और इन्ही लोगो से ब्लॉगिंग की सार्थकता बनी हुई है .
    आपको सादर नमन
    आप जैसे लेखक कई नये ब्लॉगरों के प्रेरक होते है .

    • बी एस पाबला says:

      Yes-Sir
      आभार मुकेश जी
      स्नेह बनाए रखियेगा

    • indu puri says:

      तो अपने कमेंट्स में इस बात की और ध्यान दिलाना चाहिए न ‘ब्लॉगर को .
      कमेंट बॉक्स इसीलिए तो खोले बैठे हैं हम लोग . वाह वाह करके आते हैं सभी . गंदी बात Tounge-Out

  • उपयोगी बातें …… सभी लिखने वालों के लिए जानकारीपरक पोस्ट

  • Yogendra Pal says:

    यही लेख तो चाहिये था, बहुतों को देने के काम आएगा 🙂

  • लेख ज्ञानवर्धक औऱ मेरे जॅसे नॉसिखियों के लिये तो अत्यन्त ही उपयोगी है । श्री पाबला जी ने विषय के प्रत्येक बिन्दु को विस्तार से समझाया है । पाबला जी को हार्दिक धन्यवाद ।

  • बाबु वाला says:

    मेरे जेसे हजारों लोग ‘ब्लॉग से तालुक रखते हे ! कृपया आप इतना बताये की इंग्लिश के सिवा दूसरी भाषा में
    ब्लॉग बनाने से एडसेन्स के लिये नेटवर्क मिलेगा ? अगर हा तो कृपया हमारा मार्गदर्शन करे

    • बी एस पाबला says:

      इस वक्त तो हिंदी के लिए एडसेन्स प्रभावी नहीं है

  • indu puri says:

    नही कुछ भी ‘ज्यादा ‘नही लिखा है . जो लिखा है वो जानकारी भरा है.
    एक बात बताइये………..आपके चरण कहाँ हैं ?? 🙂
    और अब मेरे ब्लॉग पर आ कर ‘वाह वाह ‘ की न तो पंगा हो जायेगा. समझ लेना.
    गाइड कीजिये. आलोचना कीजिये. कमियां बताइये. मेरा ब्लॉग सबके हर तरह के कमेंट का स्वागत करता था और करता रहेगा.
    सबको बतला देना वीरा !

  • Ashok Kanaji Sachde says:

    निदिध्यासन याने अपने आपको आप ही अभ्यासः कराना जिससे आत्मकल्याण हो | जो जीवनका लक्ष्यभी है | जड़ शरीर, इन्द्रिया, मन और बुद्धिसे परे खुशामत खुदा को ही प्यारी होती है | इससे नीचे जड़ता गए तो ईश्वरको बुरा लगता है | बस वैसेही जड़ता से परे पतीही परमेश्वर है | मंदीरमें रखीं ईश्वरकी प्रतिमा का दर्शन करते हुवे जो अपने अंदर चेतन का अनुभव करता है उसे ही ईश्वर दर्शनका लाभ होता है | जिसे भगवद गीतामें कुछ ऐसे वर्णन किया है ईश्वर अंश जीव अविनाशी चेतन अमल शहजा सुख राशी | जिसे हम कुछ ऐसेभी समझ शकते है हमारे अंदर के चेतनका सहारा लेके शरीर और मन – बुद्धि को मल रहित करना जिससे ईश्वर चैतन्य का अमल हो शके हमारे द्वारा इस जगपे जो उस चैतन्य ईश्वरकाही है | 

  • धन्यवाद पाबला जी;

    आपके Recent Article से –
    “गूगल के ब्लॉग्स पर तो संभव नहीं लेकिन मैंने अपनी सभी वेबसाईट्स पर प्लगइन कहे जाने वाले ऐसे रोबोट तैनात कर रखे हैं जो मुझे किसी पोस्ट के लिखते समय, उपरोक्त सभी तकनीकों को समेटे हुए कॉमेंट्री करते चलते हैं कि मेरा, मेरे लेख का स्कोर 0 से 100 के बीच क्या चल रहा. साथ ही साथ डैशबोर्ड पर ही लाल, नारंगी, हरा सिगनल दर्शाता है कि सर्च इंजिन्स के लिए यह लेख बुरा है, ठीक ही है, बहुत बढ़िया है.”

    मेरा प्रश्न :-
    इस article पर आपके द्वारा दिये गए जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद । जो मेरे लिए Online Earn Money & Google Adsense Aprroval (& Adsense A/c disability) में लाभप्रद शाबित होगा । परंतु क्या आप बता सकते है की आपने अपने इस WordPress Hindi ब्लॉग पर जो WP Plugin की बात कही है वो कौन सी है । कृपया कर नाम बतावे ।

    अभिलाषी;
    प्रदीप कुमार राजपूत
    रायपुर, छत्तीसगढ़ [IND]
    pradeep.rajput@gmail.com

    • बी एस पाबला says:

      Heart
      यात्रा में था इसलिए उत्तर देने में देर हुई

      मैं इस काम के लिए WordPress SEO by Yoast का प्रयोग करता हूँ

  • kishan bahety says:

    आपके
    इस लेख में कही भी खड़ी पाई का इस्तमाल नहीं हुआ ???

  • बस हाजरी लगा लें१ भाजी कैसे हो?

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