कागज़, जो लोहे से भी ज्यादा मजबूत है

यूरोप के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कागज विकसित करने का दावा किया है जो कच्चे लोहे से भी अधिक मजबूत होगा। इस कागज को बनाने स्वीडिश रायल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी के विशेषज्ञों ने तैयार किया है। इसे ‘नैनो पेपर’ नाम दिया गया है। एक दल ने पारंपरिक कागज में इस्तेमाल होने वाले सेलुलोज से ‘नैनोपेपर’ को बनाया है। दल का नेतृत्व करने वाले लार्स बेरग्लंड ने बताया, नए कागज से पारंपरिक कागज और अधिक मजबूत होगा।

नैनो पेपर को परंपरागत कागज में पाए जाने वाले जैविक पदार्थ ‘सेल्युलोज’ से विकसित किया गया है। यह शर्करा अणु पौधों की कोशिकाभित्ति का मुख्य हिस्सा है। साथ ही पृथ्वी पर पाया जाने वाला आम रासायनिक यौगिक है। यह जैविक ऊतकों का स्थान ग्रहण कर कागज को मजबूती प्रदान करेगा। कागज बनाने के लिए सेल्युलोज लकड़ी से प्राप्त किया जाता है। लेकिन, लकड़ी की लुग्दी से कागज बनाने की मशीनी प्रक्रिया के दौरान सेल्युलोज के रेशों को क्षति पहुंचती है, जिससे उनकी मजबूती कम हो जाती है। इसलिए स्वीडिश टीम ने कागज बनाने का ऐसा तरीका विकसित किया जिसमें सेल्युलोज के रेशों की मजबूती बरकरार रहती है। इन मजबूत रेशों से बने कागज को ही उन्होंने नैनो पेपर नाम दिया। मशीनी परीक्षणों में इस कागज की तन्यता 214 मेगापास्कल आंकी गई, जो मजबूती के मामले में इसे ढलवां लोहे से बेहतर और स्टील सरीखा बना देती है।

नई विधि में लकड़ी को एंजाइम के साथ तोड़ा जाता है और फिर इसे एक मशीन के जरिए कूटकर अलग किया जाता है। अंत में इसे पानी में छोड़ दिया जाता है। कुछ समय बाद पानी निकलने से हाइड्रोजन बांड के जरिए वे आपस में जुड़कर ‘नैनोपेपर’ की चादर बन जाते हैं। यह 214 मेगापास्कल्स मजबूत होता है जो कच्चे लोहे से भी मजबूत है। मजबूती का कारण न केवल सेलुलोज रेशों का सुरक्षित रहना है, वह प्रक्रिया भी है जिसमें यह नेटवर्क में व्यवस्थित होता है।

अधिक जानकारी के लिए देखिये यहाँ और यहाँ

लेख का मूल्यांकन करें

कागज़, जो लोहे से भी ज्यादा मजबूत है” पर 2 टिप्पणियाँ

इस लेख पर कुछ टिप्पणी करें, प्रतिक्रिया दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *


टिप्पणीकर्ता की ताज़ा ब्लॉग पोस्ट दिखाएँ