काठमांडू की ओर दही की तलाश में तीन तिलंगे

जैसा कि बताई जा चुकी है छत्तीसगढ़ के चार हिंदी ब्लॉगर्स को परिकल्पना सम्मान 2012 से नवाजे जाने की बात और उनमें से तीन के सड़क मार्ग द्वारा काठमांडू जाने की योजना. तो इसी सिलसिले में काठमांडू सफ़र के पहले की दहशत वाला दिन गुजार कर मैं चल पड़ा अगली सुबह मंजिल की ओर.

भिलाई से निकलने की योजना थी सुबह तीन बजे. लेकिन समय हो गया सुबह पौने चार का. मैं जब जूते पहन रहा था तो ललित शर्मा जी ने मोबाईल की घंटी बजाई तो मैंने बताया कि बस दो मिनट में गाड़ी चल पड़ेगी. और सच में दो मिनट ही लगे मुझे इग्नीशन ऑन करते.

इससे पहले कि अपनी मारूति ईको को आगे बढाता, एक सूचना देता सा एस एम एस मैंने ललित शर्मा जी और गिरीश पंकज जी को भेजा – ‘वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी क़ी फ़तेह‘. ज़वाब में ललित जी का एस एम एस मिला ‘जो बोले सो निहाल, सति श्री अकाल

राष्ट्रीय राजमार्ग 6 से होते हुए रायपुर से 25 किलोमीटर दूर, राष्ट्रीय राजमार्ग 43 पर स्थित अभनपुर से जब ललित जी मेरे साथ रवाना हुए तो सुबह के पांच बज चुके थे. और वापस रायपुर आ कर जब गिरीश जी हमारे साथ चले तो समय था 05:40

काठमांडू आने जाने के लिए हुई 3000 किलोमीटर की यात्रा वाले रोचक संस्मरणों का संक्षिप्त विवरण यहाँ क्लिक कर देखें »


रायपुर से बाहर निकलती, फर्राटा भरती मारुती ईको सुबह सवा आठ बजे बिलासपुर पार कर चुकी. इधर भूख मुझे बहुत पहले ही लगनी शुरू हो गई थी. ललित जी घर से आलू के परांठे बनवा लाये थे और गिरीश जी ने पूरी – सब्जी का इंतज़ाम किया हुया था. ज़रुरत थी तो दही की.

राह में हम जिस किसी ढाबे जैसे स्थान पर दही पूछते इनकार ही मिलता. दर्जन भर स्थानों के बाद आखिरकार राष्ट्रीय राजमार्ग 111 पर रतनपुर के पास बबलू रेस्टारेंट मिला. जहां गिरीश जी, ललित जी ने दही मिलने की खबर पर कुर्सी टेबल पर आसन जमा मुझे आवाज़ दी गाड़ी से उतरने की. मुंह हाथ धो-कर जब मैं उनकी ओर बढ़ा तो वे बाहर निकलते मिले. पूछे जाने पर ललित जी ने बताया कि जैसे ही हमें परांठे निकालते देखा वहां के बंदे ने, तो वह दही होने की बात से मुकर गया.

भूख के मारे बुरा हाल हुए जा रहा था. आखिरकार ललित जी ने राह में आने वाले कटघोरा कस्बे में अपनी बहन को मोबाईल द्वारा संपर्क किया और ढेर सारा दही ले आने के आग्रह संग सूचित कर दिया कि भोजननुमा नाश्ता वहीं किया जाएगा.

सारे परिवार की स्नेहिल मेज़बानी में हमारी क्षुधा तृप्ति हुई और साढ़े दस बजे के आसपास हम उनसे विदा ले बढ़ गए अगले पड़ाव की ओर

हसदेव नदी

हसदेव नदी के पुल पर

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हसदेव नदी के पुल पर

सर्पीली सडकों, ऊंचे पहाड़ों से होते हुए दोपहर बारह बजे हम जा पहुंचे थे हसदेव नदी पर बने पुल के ऊपर, जो प्रसिद्द बांगो बाँध के मुहाने पर ही था. कैमरे का उपयोग यहाँ पहली बार किया गया.

तकरीबन दस मिनट बिताने के बाद हमारा रूख हुया अंबिकापुर की ओर. इस बीच अरविंद मिश्र जी का फोन आ चुका था और उनकी सूचना थी कि उन्हें काठमांडू जाने के लिए राज्य सरकार से अनुमति नहीं मिल सकी है. साथ ही यह भी बताया गया कि वे अभी लखनऊ में हैं तथा उत्तर प्रदेश में उनके पदस्थापना वाले रॉबर्ट्सगंज में ही उन्होंने हमारे रात्रि विश्राम का प्रबंध कर दिया है.

रफ्तार से भागती कार जब अंबिकापुर के पास पहुंची तो हमारी रोबोट कन्या ने इशारा किया बाहरी राहों से निकल जाने का. और उसी के बताये रास्तों के भरोसे हम 10 मिनट में ही अंबिकापुर पार कर चुके थे.

ट्रक के पीछे

सरहरी बाँध के पास, ट्रक के पीछे लिखा दिलचस्प वाक्य

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वाड्रफनगर के पास

छत्तीसगढ़ के आखरी पड़ाव, राष्ट्रीय राजमार्ग 111 पर वाड्रफनगर के पहले ही प्रेमनगर के पास एक तस्वीर लिए जाने के प्रयासों ने हमें कड़ी मशक्कत sign-roadकरनी पड़ी. कैमरे की ऑटोमेटिक टाइमर तकनीक से तस्वीर तो ले ली गई लेकिन फेसबुक पर स्टेटस अपडेट करने के लिए तस्वीर मोबाईल से ही लेनी थी और उसकी टाइमर सुविधा का उपयोग करने के लिए उसका कहीं टिका रहना ज़रूरी था.

आखिरकार ललित जी के साथ मिल सडक किनारे लगे संकेतक पटल की ऐसी तैसी कर इतनी जगह बना ली गई की मोबाईल वहां फँस सके. करीब पंद्रह मिनट तो वहीँ लग गए

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प्रेमनगर के पास

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उत्तरप्रदेश की ओर

आगे बढ़ते हुए गोविन्द वल्लभ पंत सागर के पास, रेणुकूट के पहले हमने चाय पी, बिस्कुट खाए और तरोताजा हो चल पड़े रॉबर्ट्सगंज की ओर. जहाँ पहुंचने के संभावित समय की जानकारी के लिए अरविंद मिश्र जी फोन कर चुके थे.

उत्तर प्रदेश में प्रवेश करते ही खराब सडकों का सिलसिला शुरू हो गया. रात्रि लगभग आठ बजे अरविंद जी एक बार फिर फोन कर पूछा -कहाँ पहुंचे? ललित जी ने बताया –डाला सीमेंट फैक्ट्री के सामने हैं. अरविंद जी ने बड़े आराम से कहा -कम से कम डेढ़ घंटा लग जाएगा आपको रॉबर्ट्सगंज पहुंचते ! हम हैरान थे कि महज़ 30 किलोमीटर की दूरी के लिए डेढ़ घंटा कैसे लगेगा?

लेकिन जैसे जैसे हम बढ़ते गए, अरविंद जी की बात पर विश्वास बढ़ते गया. सीमेंट फैक्ट्री के भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क पर इतने गड्ढे थे, मिट्टी के ढेर थे कि हमारी मारूती ईको की रफ़्तार, 20 किलोमीटर से ज़्यादा हो ही नहीं पा रही थी.

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डाला, सोनभद्र, उत्तरप्रदेश स्थित माँ वैष्णो शक्तिपीठ धाम का रात्रिकालीन दृश्य

डाला से गुजरते हुए ही दिखा भव्य माँ वैष्णो शक्तिपीठ धाम

अपनी रोबोट कन्या के निर्देशानुसार उत्तर प्रदेश के राज्यमार्ग 5A वाली  बेहद खराब सड़क से होते हुए जब हमने रॉबर्ट्सगंज का सूचना पट देखा तो करीब साढ़े दस बज रहे थे. तभी अरविंद जी का फोन आया और वे जैसा जैसा बताते गए उसी अनुसार मैंने, भिलाई से 18 घंटे में 650 किलोमीटर की दूरी तय कर, गाड़ी को रोका उनके द्वारा इंतजाम किये गए होटल के सामने.

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इसे उत्तर प्रदेश में सड़क कहा जाता है 🙂

 

काठमांडू आने जाने के लिए हुई 3000 किलोमीटर की यात्रा वाले रोचक संस्मरणों का संक्षिप्त विवरण यहाँ क्लिक कर देखें »

 

तरो ताज़ा हो रात्रि भोजन करते आधी रात हो चुकी थी. हम तीनों में बहस छिड़ गई कि सुबह कितने बजे यात्रा प्रारंभ की जाए? बात को किसी नतीजे पर ना पहुंचते देख मैं यह कह बिस्तर पर लेट गया कि जब ललित जी उठाएंगे सुबह, अपन तभी उठेंगे!

इधर मेरा बिस्तर पर लेटना हुआ उधर कब नींद आ गई पता ही नहीं चला

मैं तो यात्रा के मज़े ले रहा हूँ, आपका क्या हाल है?

अगली कड़ी में क्लिक कर पढ़िए कि किस तरह काठमांडू जाती कार को नागालैंड वाले खींच ले गए

काठमांडू की ओर दही की तलाश में तीन तिलंगे
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मेरी वेबसाइट से कुछ और ...

7 दिनों में, भिलाई से सड़क मार्ग द्वारा
काठमांडू आने जाने के लिए हुई 3000 किलोमीटर की यात्रा वाले प्रतिदिन के रोचक संस्मरण 8 हिस्सों में में लिखे गए हैं. जिन्हें रुचि अनुसार पढ़ा जा सकता है इन कड़ियों पर क्लिक कर

  1. काठमांडू सफ़र के पहले की दहशत
  2. काठमांडू की ओर दही की तलाश में तीन तिलंगे
  3. काठमांडू जाती कार को नागालैंड वाले खींच ले गए
  4. भैंसा भोजन, खिलखिलाती युवती, पीछा करते युवक और आधी रात का काठमांडू
  5. नेपाल की मुर्गी, उसकी मुस्कान, मेरी नाराज़गी और लाखों का मुआवजा
  6. सुबह सुबह तोड़-फोड़, माओवादियों से टकराव, जलते टायरों की बदबू और मौत से सामना
  7. खौफनाक राह, घूरती निगाहें, कमबख्त कार और इलाहाबाद की दास्ताँ
  8. धुआंधार बारिश, दिमाग का फ्यूज़ और सुनसान सड़कों पर चीखती कन्या को प्रणाम
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7 दिनों में, भिलाई से सड़क मार्ग द्वारा
काठमांडू आने जाने के लिए हुई 3000 किलोमीटर की यात्रा वाले प्रतिदिन के रोचक संस्मरण 8 हिस्सों में में लिखे गए हैं. जिन्हें रुचि अनुसार पढ़ा जा सकता है इन कड़ियों पर क्लिक कर

  1. काठमांडू सफ़र के पहले की दहशत
  2. काठमांडू की ओर दही की तलाश में तीन तिलंगे
  3. काठमांडू जाती कार को नागालैंड वाले खींच ले गए
  4. भैंसा भोजन, खिलखिलाती युवती, पीछा करते युवक और आधी रात का काठमांडू
  5. नेपाल की मुर्गी, उसकी मुस्कान, मेरी नाराज़गी और लाखों का मुआवजा
  6. सुबह सुबह तोड़-फोड़, माओवादियों से टकराव, जलते टायरों की बदबू और मौत से सामना
  7. खौफनाक राह, घूरती निगाहें, कमबख्त कार और इलाहाबाद की दास्ताँ
  8. धुआंधार बारिश, दिमाग का फ्यूज़ और सुनसान सड़कों पर चीखती कन्या को प्रणाम
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काठमांडू की ओर दही की तलाश में तीन तिलंगे” पर 59 टिप्पणियाँ

  1. आप के साथ साथ सफर में हैं। हम ने भी पराठे खाए और नाश्ता किया है, साथ साथ। सड़क के गड्ढों के झटके भी सहे हैं। थक गए हैं, आप के साथ साथ हम भी चाहते हैं नीन्द निकालें। जरा खर्राटे कम तो हों। 🙂

  2. पुत्तर प्रदेश के झटके हम झेल रहे हैं आप छत्तीसगढ के , आपको इनसे डर लगता है और हमको उनसे

  3. हम आपके यात्रा संस्मरण के मजे ले रहे हैं. यदि पता होता कि आप नेपाल के लिए वाहन यात्रा कर रहे हैं वह भी अम्बिकापुर – वाड्रफनगर – राबर्ट्सगंज जो कि मेरी पहली नौकरी के स्थान रहे हैं, तो मैं तो जबरदस्ती आपके साथ हो लेता. बहरहाल, अब तो चिड़िया चुग गई खेत!

    चलिए, आपके संस्मरण से ही यात्रा के मजे ले लेते हैं.
    टिप्पणीकर्ता रवि ने हाल ही में लिखा है: सॉफ़्टवेयर स्थानीयकरण में मानक लाने के लिए FUEL के बढ़ते कदमMy Profile

  4. आप लोग जिस दिन यात्रा पर रवाना हुए थे, हमें उसी दिन से जिंदगी के मेले पर लेख का इंतजार था। आज रवाना होने के पहले वाला और राबर्टसगंज तक के सफर का पढा। ऐसा लग रहा है कि मैं भी कार में ही हूं।

  5. वाह १८ घंटे .. अपन तो ३-४ घंटे मैं ही Tired…अगली किश्त का इंतज़ार रहेगा…

    Happy birthday…& tk care..

  6. आपके जैसा साथ मिले तो अपन भी सफर पर निकल पड़ते..बस जी गलती हो गई इस बार जो साथ न बनाया…। अपन भी इसी तरह यात्रा करते रहना चाहते हैं…..खैर फिलहाल तो आपके साथ यहां से काठमांडू की यात्रा पर हूं…..पर एक मुश्किल है कि आप पोस्ट लिखकर नींद के आगोश में चले गए हैं…और अपन की नींद अभी थोड़ी देर पहले टूटी है पूरे २ घंटे के बाद…

  7. वैसे फ़ोटो खींचने की जुगाड़ सही बनाई, जैसे पहले कहते थे मध्यप्रदेश सीमा प्रारंभ रोड समाप्त अब वही हाल लगता है कि उत्तर प्रदेश का हो चला है । हम भी आजकल जीपीएस का उपयोग करना सीख रहे हैं..
    टिप्पणीकर्ता विवेक रस्तोगी ने हाल ही में लिखा है: वो एक रंग की कमीज..My Profile

    • Worry
      सही है, उत्तर प्रदेश में इक्का दुक्का सड़कें ही दिखीं

      जीपीएस कौन सा है? किस तरह का है?

  8. दूसरा एपिसोड भी मजेदार है। यात्रा वृत्तांत इसी शैली में लिखे जाने चाहिये. अपने एक नए आनंद का सृजन कर दिया. ऐसा जीवंत वर्णन ? कमाल है आपकी याददाश्त का।

  9. सम्मानित किये जाने की ढेरो बधाईयाँ आपका यात्रा वृतांत पढकर मज़ा आगया काश हम भी साथ होते खेर वो दीन भी कभी आएगा आपकी यात्रा मंगलमय हो
    टिप्पणीकर्ता महेंद्रसिंह परमार ने हाल ही में लिखा है: શું તમારો પહેલો મોબાઇલ ફોન નોકિયા હતો ?My Profile

  10. हम तो उल्टा प्रदेश को जन्म से झेल रहे है. किसी सरकार को रोड का ख्याल ही नही आता. मायावती थी तो अपनी कब्रगाह बनवाये डाल रही थी. अरे वही अम्बेडकर पार्क और मैदान. और अब अखिलेश आ गया है उसको लैपटाप बेचने से और छुद्र राजनीति करने से ही फुर्सत नही.

  11. Afraidउत्तर प्रदेश की सडको का हाल बदतर तो बहुत हैं |महाकुम्भ के दौरान जो हाल था ,एक ही बारिस में सारी सड़के उखर गयी |
    वैसे दही की बड़ी लंबी तलाश की आपने |

  12. सबसे पहले आप सभी को सम्मानित किये जाने की ढेरो बधाईयाँ…. वाकई दाद देनी चाहिए आप लोगों की हिम्मत को. वृत्तांत शैली बहुत ही रोचक लगी. बिलकुल जीवंत… अगली कड़ी का इंतजार है ….

  13. ब्लॉग – चिठ्ठा का सभी तकनिकी ब्लॉगर्स और तकनिकी जानकारों से सविनय निवेदन है कि अगर आपकी कोई ब्लॉग – पोस्ट या प्रस्तुति, जो हिंदी ब्लॉगजगत के दूसरे ब्लागरों के काम आ सकती है तो आप अपनी उस ब्लॉग – पोस्ट का लिंक या यूआरएल ब्लॉग – चिठ्ठा को ईमेल, कमेंट और मैसेज के माध्यम से भेजें, ताकि हम उसे ब्लॉग – चिठ्ठा के तकनिकी कोना में शामिल कर सकें।

    सादर ….. आभार।।

  14. ललित जी ने वर्धा में इस यात्रा के बारे में थोड़ा सा बताया था, पढ़कर सच में आनन्द आ रहा है।

    • Angry
      जब 12 घंटे में नाश्ता करते, खाना खाते 650 किलोमीटर चले थे तब तो आपने कुछ नहीं कहा!
      आपने पढ़ा ही नहीं होगा https://www.bspabla.com/?p=3272

  15. आपके मजेदार विवरण के अलावा, टिप्पणियों पर आपके रिस्पोंस वाली स्माइलीज देखकर मुझे बहुत मजा आता है 🙂

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