मैं और मेरी कार… अक्सर बातें करते हैं

मेरे यात्रा संस्मरण पढ़ देख कर कई मित्र पूछते हैं तारीख, समय, स्थान आदि इतना सब याद कैसे रहता है आपको? मेरा मुस्कुराते हुए यही ज़वाब होता है बस याद रहता है यूँ ही. लेकिन जब एक दिन मेरे सहकर्मी ने मुझे अपनी कार से ‘बातें करते’ रंगे हाथों पकड़ लिया तो सोचा इन सब मुद्दों पर कुछ लिखा जाए.

बचपन में साइकिल से अपने जिले का चप्पा चप्पा छानने के बाद जब युवावस्था में घुमक्कड़ी के लिए सड़क सहारे कहीं जाना होता था तो मंजिल और राह के बारे में सारी जानकारियाँ, मानचित्र सहित रख लेता था और रास्ते के संक्षिप्त विवरण, डायरी में चंद शब्दों के रूप में दर्ज करते चलता. जिसे बाद में विस्तृत रूप दे दिया जाता था.

1975 में जब फोटोग्राफी का शौक परवान चढ़ा तो फोटो के पीछे स्थान व तारीखें लिख देता जो किसी को बताते समय काम आतीं.

तकनीक बदलते समय के साथ कदम बढ़ाते आवाज़ रिकॉर्ड करने वाला यंत्र आया तो उस पर बहुत सारी बातें बोल कर सुरक्षित कर लेते थे जिसे बाद में सुन कर लिख लिया जाता, विभिन्न लेखों में

मोबाईल आया तो गूगल मैप्स से पाला पड़ा. मानचित्र का सारा काम कर, मंजिल की राह दिखाता और लैटीट्यूड के सहारे, विचरण किये गए स्थानों का इतिहास एक क्लिक में सामने रख देता

नोकिया के मोबाईल पर OVI मैप्स, एक बार नेटवर्क से जुड़ने बाद अपडेट हो भले ही नेटवर्क से कट जाए या सिम कार्ड निकाल लिया जाए, तब भी पूरी क्षमता से काम करता. इसकी वो खूबी बहुत पसंद आई जिसमें मानव स्वर, मंजिल का रास्ता बताते जाता था .

Nokia E71

Nokia E71 मोबाईल पर OVI मैप्स

पिछले वर्ष एक बार फिर चार पहिया वाहन लिया तो उपग्रहों के सहारे चलने वाले जीपीएस नेवीगेटर ने मानचित्र सहित मानव स्वर में राह बताने वाली उन्नत तकनीक से परिचय करवाया.

इसी में, सारी राह का रिकॉर्ड बनाए, संरक्षित जाने की सुविधा भी है जिसका जायजा बाद में कभी भी लिया जा सकता है.

जीपीएस नेवीगेटर

उपग्रहों के सहारे चलने वाला जीपीएस नेवीगेटर

यह सभी तकनीकें मुझे स्वयं के द्वारा किसी भ्रमण के समय की राहें, तारीखें, समय, स्थिति याद रखने में सहायक हैं लेकिन अलग सी आवश्यकता के कारण मैंने अपनी मारुति ईको में एक और यंत्र लगा रखा है जो मेरे अनुपस्थित रहने की स्थिति में भी वाहन द्वारा तय की गई सारी राहें, स्थान, स्थिति याद रखता है और बाद में मुझे सूचित कर देता है.

सामान्यतया इसे जीपीएस डिवायस कह पुकारा जाता है जिसका जिक्र गाहे बगाहे सार्वजनिक वाहनों पर लगाए जाने की बातें उठाती रहती हैं. हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा आदेश दिए जाने के बावजूद देश की राजधानी दिल्ली के ऑटो रिक्शा वालों ने घोर विरोध किया था इसकी अनिवार्यता को लेकर

मैंने यह यंत्र अपनी मारुती ईको की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगाया था लेकिन इसकी कई अन्य खूबियाँ भी हैं

 

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मोबाईल एप्प

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मोबाईल पर चलती कार की भौगोलिक स्थिति

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कार की भौगोलिक स्थिति का विवरण

मूलत: किसी वाहन के चोरी हो जाने की स्थिति में यह यंत्र वाहन मालिक को अपनी भौगोलिक स्थिति के बारे सटीक सूचना देता रहता है. जिससे कम से कम समय में वाहन को फिर से पा लेना आसान हो जाता है

या फिर यदि आपने कोई लक्ष्मण रेखा खींच रखी है अपनी कार के लिए तो उस दायरे से बाहर जाते ही आपकी कार आपको मोबाईल पर SMS भेज कर बताएगी उसे चुपके से कहीं बाहर ले जाया जा रहा. अब चाहे उसे ले जाने वाला आपका मित्र हो या घर का कोई सदस्य

इसके अलावा यदि आपने अपने किसी वाहन के लिए कोई विशिष्ट राह निर्देशित कर दी है तो उस राह से अलग होते ही आपको एसएमएस द्वारा सूचना मिल जायेगी.

हालांकि अपनी गाड़ी की सारी जानकारी आप एक खास वेबसाईट पर संबंधित कंपनी द्वारा प्रदत्त आईडी-पासवर्ड द्वारा देख सकते हैं. लेकिन एंड्राइड आधारित मोबाईल के साथ भी इस पर बखूबी निगाह रखी जा सकती है.

ऐसे ही एक मौके पर मेरे सहकर्मी ने मुझे अपनी कार से ‘बातें करते’ तब रंगे हाथों पकड़ लिया जब हमारे एक संबंधी गाड़ी ले गए यह कह कर गए कि सेक्टर 9 अस्पताल तक हो कर आता हूँ लेकिन मेरी कार ने मुझे संदेश भेज कर बताया कि उसे तो भिलाई शहर की सीमा से बाहर निकाल लिया गया है.

उस समय मैं ऐसे स्थान पर था जहाँ जीपीआरएस काम नहीं कर रहा था. सो मैंने कार को SMS संदेश भेजा कि वह कहाँ है ये बता दे! उसने तुरंत बताया कि वो भिलाई 3 के पुलिस थाने के सामने इग्नीशन ऑन किये खड़ी है.

मैंने अपने मित्र को कॉल कर वस्तुस्थिति जाननी चाही कि वे विपरीत दिशा में क्यों पहुँच गए तो पता चला कि जिस घायल को देखने अस्पताल जा रहे थे उससे संबंधित एक कानूनी कारवाई के लिए थाने आना पड़ गया. लेकिन वे हैरान भी हुए कि मुझे कैसे पता चला? मैंने बताया कि मेरी और कार की ‘बातचीत’ हुई तो पता चला. 😀

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बंद इग्नीशन वाली कार की भौगोलिक स्थिति

तकनीकी बात की जाए तो किसी भी स्थानीय कार सजावट केंद्र पर उपलब्धता वाले 6000 रूपये खर्च कर 11 X 2 X 6 सेंटीमीटर के आकार और 100 ग्राम वजन वाले इस यंत्र के द्वारा आप अपनी गाड़ी को चोरी हो जाने की स्थिति में इंटरनेट पर गूगल मैप्स पर दो फीट की बारीकी तक तलाश सकते हैं, वाहन के किसी निर्धारित राह से भटकने पर सूचना पा सकते हैं, किसी मोहल्ले, शहर से बाहर जाते ही सूचना पा सकते हैं, अगर इग्नीशन बंद की स्थिति (जैसे पार्किंग) में गाड़ी को घसीट कर (क्रेन द्वारा) कोई ले जा रहा हो तो सूचना मोबाईल पर मिल जायेगी. कार के आसपास पेट्रोल पंप कहाँ हैं ये पता लगाया जा सकता है,

उन्नत संस्करणों में कार का इग्नीशन बंद/ चालू करने, सेंट्रल लॉकिंग के द्वारा दरवाजे बंद करने, कार के अन्दर/ आसपास की बातचीत सुनने, जबरन दरवाजा खोले जाने, बोनेट खोले जाने जैसी सूचनाएं मोबाईल / ईमेल पर प्राप्त की जा सकती हैं

अब ये हाल है कि मोबाईल के GPS के सहारे मेरे शुभचिंतक मेरी सारी भौगोलिक गतिविधियों से अवगत रहते हैं और मैं अपनी मारूति ईको से बातें करते उसका हालचाल लेते रहता हूँ. … और कह सकता हूँ “… मैं और मेरी कार… अक्सर बातें करते हैं…”

बताईये, गलत कह रहा मैं?

इन यंत्रों की खरीदी यहाँ क्लिक कर की जा सकती है

मैं और मेरी कार… अक्सर बातें करते हैं
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मैं और मेरी कार… अक्सर बातें करते हैं” पर 12 टिप्पणियाँ

  1. नहीं जी आप गलत नहीं कह रहे। पर मैं तो आज भी इन बातों को पढ़ कर जान कर आश्चर्य में पड़ जाती हूँ। 100 साल बाद ये साइंस ये टेक्नोलॉजी कहाँ तक पहुँच जायेगी ?? woooooow काश हम भी तब तक यहीं रहते 😛
    वैसे आपकी गाड़ी को चितौड़ का रास्ता मालूम है??? पूछ कर बताईयेगा

  2. जी पी एस बेहद उपयोगी है और कई बार परेशानियों में मेरे काम आया है , आभार आपका !
    टिप्पणीकर्ता सतीश सक्सेना ने हाल ही में लिखा है: हिमालय, को समझते,उम्र गुज़र जायेगी – सतीश सक्सेनाMy Profile

  3. बेहद खूबसूरत तरीके से आपने इस उन्नत तकनीकी क्षमता से हमें रूबरू कराया आभार

  4. जी पी एस बेहद उपयोगी है,इस उन्नत तकनीकी से हमें रूबरू कराए आभार.

  5. आपकी यह रचना बहुत बहुत पसंद आई. चित्रों सहित प्रस्तुतिकरण बहुत उम्दा है, और पाठन को रोचक बनाता है.
    आपकी अपनी कार से घनिष्ठता स्वाभाविक है, यात्रा भी करवाती है, और यात्रा के संस्मरण संजोने में अहम भूमिका निभाती है… लेखन में रुचि रखने वालों के लिए काफी कारगर तरीके साझा किए आपने… वरना “मैं” और “मेरी याद्दाश्त” अक्सर ही बातें नहीं कर पाते 😀

  6. प्राजी, आपने इस तरह की विद्वतापूर्ण जानकारी देकर एक मिथक को तो तोड़ ही दिया। मिथक क्‍या है, इसे नहीं बताऊंगा, सभी जानते हैं। पर यह तो सच है कि आधुनिक तकनीक को समझना हर किसी के बस की बात नहीं है। आपने अपने भीतर के वैज्ञानिक या कह लें कि शरारती बच्‍चे को कभी अनदेखा नहीं किया, इसलिए इतना आगे बढ1 पाए। हर इंसान के भीतर एक शरारती बच्‍चा होता है, जिसकी असमय मौत हो जाती हैत्र क्‍यांकि तब तक इंसान बुद्धिशाली हो जाता है, तब शरारती बच्‍चे का कोई काम नहीं रहता। यदि वह बच्‍चा भीतर कहीं जीवित रहे, तो इंसान को कहां से कहां पहुंचा सकता है। बस उसकी शरारतों को सकारात्‍मक सोच देना ही हमारा काम होता है। बधाई बहुत बहुत बधाई अच्‍छे तकनीकी आलेख के लिए

    डॉ महेश परिमल

  7. भाजी,
    आप ने बहुत अच्छे ढग से टेक्निकल जानकारी दी है.
    कभी मेरे ब्लोग unwarat.कॉम पर आइये.पढने पर अपने विचार जरूर लिखे.muze अच्छा लगेगा|
    विन्नी,

  8. बहुत बढ़िया जानकारी पाबला जी…मैं भी जल्द ही इन्स्टाल करवाती हूँ इसे अब….:)
    सुनीता पाण्डेय

  9. सच में आप ने बहूत वर्णन पेश किया है.गाडी के प्रेमी इसे अत्याधिक pasnad करेंगे.
    vinnie

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