कुछ ऐसे रोचक आँकड़े, जो शायद आपके लिए भी हैं

जैसा कि पहले भी कहा जाता रहा है कि ब्लॉग एक तरह की निजी डायरी है। एक ऐसी डायरी जिसे खुली किताब कहना ज़्यादा अच्छा रहेगा। हालांकि मैं इसे कुछ विशिष्ठ तरह की जानकारियों के संकलन के रुप में ज़्यादा पसंद करता हूँ, बेशक शैली कुछ अलग सी रोचक हो, आख़िर यह सार्वजनिक जो होता है 🙂

कल नज़र पड़ी कुछ ऐसे आँकड़ों पर, जिनकी तलाश अक्सर की जाती है। वाक्या है संयुक्त राष्ट्र की संस्था International Telecommunication Union (आईटीयू) के पांचवे ‘विश्व दूरसंचार विकास सम्मेलन’ का। जो 24 मई को भारत के हैदराबाद में शुरू हुया था और 4 जून को उसका समापन हुया। इस बीच अधिकारियों, विभिन्न वक्तायों व रिपोर्टों के माध्यम से कुछ आँकड़े सामने आए जो इस तरह हैं:
  • इस सम्मलेन में विश्व के 187 देशों से 1300 से ज्यादा प्रतिनिधि ने भाग लिया
    • 2010 में विश्व में मोबाइल फ़ोनों संख्या पांच अरब तक पहुँच गई है
    • चार वर्ष पहले मोबाइल फ़ोनों की संख्या 2.2 अरब थी
    • तार से जुड़े टेलीफ़ोनों की संख्या में, गत चार वर्षों में, एक करोड़ साठ लाख की कमी हुई है
    • पिछले चार सालों में जो दो अरब पचास करोड़ नए मोबाइल आये हैं उन में से दो अरब कनेक्शन विकासशील देशों में हैं
    • भारत में हर महीने दो करोड़ नए फ़ोन कनेक्शन जुड़ रहे हैं.
    • इस समय मोबाइल फ़ोन के सिग्नल पृथ्वी के 90 प्रतिशत हिस्सों पर पहुंच रहा है, जो 2015 तक बढ़कर सौ प्रतिशत हो जाएगा
    • दुनिया के ग्रामीण इलाकों में 75 प्रतिशत जनसंख्या तक मोबाइल सिग्नल पहुंचता है और ग्रामीण इलाकों की 50 प्रतिशत जनता इसका उपयोग करती हैं
    • विश्व में पांच अरब मोबाइल कनेक्शन हैं
    • कुछ विकसित देशों में जितने लोग आबाद है उससे दोगुनी संख्या में वहाँ मोबाइल फो़न हैं
    • 2015 तक भी विश्व की केवल 50 प्रतिशत जनसंख्या के पास ही मोबाइल फ़ोन होगा और इसे सौ प्रतिशत होने में 2020 तक का समय लगेगा
    • यूरोप और पूर्व सोवियत यूनियन में शामिल देशों में मोबाइल फ़ोन की सुविधा सौ प्रतिशत तक पहुंच गई है
    • इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या में पिछले चार वर्षों में 77 करोड़ का इजाफ़ा हुआ है
    • विकसित देशों में इंटरनेट के उपभोक्ताओं की संख्या 64 प्रतिशत थी जबकि विकासशील देशों में यह संख्या 20 प्रतिशत से भी कम थी। मतलब विकसित देशों में हर तीसरा व्यक्ति इंटरनेट से जुड़ा है वहीं विकासशील देशों में पांच में से चार व्यक्ति अब भी इंटरनेट से दूर हैं।
    • विकसित देशों के लोग तेज़ गति वाले ब्रॉडबैंड नेटवर्क का उपयोग कर रहे हैं वहीं विकासशील देशों में यह संख्या केवल 3.5 प्रतिशत के पास है
    • 2009 तक विश्व की आबादी का 26 प्रतिशत हिस्सा यानि 1.7 अरब लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे थे
    • विकासशील देशों में केवल 12 प्रतिशत घरों में इंटरनेट मौजूद है
    • मोबाइल ब्रॉडबैंड कनेक्शन की संख्या चार वर्ष पहले सात करोड़ थी और अब ये बढ़कर 67 करोड़ हो गई है
    • प्रतिदिन ट्विटर पर पांच करोड़ संदेश भेजे जा रहे हैं
    • फ़ेसबुक के सदस्यों की संख्या 40 करोड़ तक पहुंच गई है

l>

    • विश्व भर में 67 प्रतिशत परिवारों के पास टीवी है और इन घरों की संख्या 1.4 अरब बनती है
    • यूरोप, अमरीका जैसे देशों में 90 प्रतिशत, अरब देशों में 82 प्रतिशत और एशिया पेसिफिक देशों में 75 प्रतिशत घरों में टीवी है लेकिन अफ़्रीकी देशों में यह दर केवल 28 प्रतिशत है
  • जो 10 भाषाए इंटरनेट पर छाई हुई हैं उनमें हिंदी नहीं है ये भाषाएँ हैं- अंग्रेजी, जापानी, चीनी, अरबी, स्पेनिश, फ़्रांसिसी, पोर्तुगीज़, जर्मन, रुसी और कोरियाई भाषा
क्या यह आँकड़े रोचक नहीं हैं?
कुछ ऐसे रोचक आँकड़े, जो शायद आपके लिए भी हैं
4.5 (90%) 2 votes
Print Friendly, PDF & Email

मेरी वेबसाइट से कुछ और ...

कुछ ऐसे रोचक आँकड़े, जो शायद आपके लिए भी हैं” पर 44 टिप्पणियाँ

  1. उम्दा जानकारी के लिए शुक्रिया !

  2. बहुत ही उपयोगी जानकारी ,धन्यवाद ,आपका भी जवाब नहीं खोज करने में ….

  3. बहुत ही रोचक आंकड़े है.
    आपके इधर आओ तो कुछ नया ही मिलता है. विविध भारती की नयी लिंक भेजो जल्दी से गुरु

  4. बहुत ही उम्दा जानकारी………आभार्।

  5. यह संचार का रचनात्मक विस्फोट है -संग्रहनीय लेख ! शुक्रिया !

  6. 'क्या यह आँकड़े रोचक नहीं हैं? … जो 10 भाषाएं इंटरनेट पर छाई हुई हैं उनमें हिंदी नहीं है।'
    यह तो बिलकुल रोचक नहीं है 🙁

  7. आपके द्वारा दी गई जानकारी वास्तव में रोचक हैं। धन्यवाद!

  8. Rochak aur gyanvardhak jaankari kee prastutikaran ke liye bahut dhanyavaad

  9. बहुत ही रोचक आंकड़े हैं ।
    कुछ ही सालों में हम कहाँ से कहाँ पहुँच गए ।
    इस अति का क्या अंत होगा , राम जाने ।

  10. वाह उम्दा जानकारी धन्यवाद

  11. रोचक रोमांचक और उम्दा जानकारी दी आपने

  12. सारी जानकारी रोचक लगी बस हिन्दी की दशा जानकर दुख हुआ ..लेकिन हम विकासशील देश के लोग हैं एक दिन हिन्दी को इस सूची में लाकर ही रहेंगे ।

  13. एक और खबर कुछ दिनो पहले छपी थी कि इस देश में जीतने मोबाइल फोन हैं उतने टॉइलेट नहीं हैं

  14. realy interesting boss. no doubt, lekin durbhagya yahi hai ki hamare desh me mobile jitne hai utne to टॉइलेट nahi hai, is baare me pahle hi ek post likh chuka hu, kya yah is desh ka durbhagya nahi ki bhale mobile hath me ho lekin bahusankhy aabaadi aaj bhi khule me shauch karne jati hai……so kya jaruri hai pahle…..sarkar kab sochegi?

  15. उम्दा और रोचक जानकारी के लिए शुक्रिया ….

  16. हमें आखरी बिंदु पर काम करने की जरुरत है. (१० भाषा..)

  17. हमें आखरी बिंदु पर काम करने की जरुरत है. (१० भाषा..)

  18. हमें आखरी बिंदु पर काम करने की जरुरत है. (१० भाषा..)

  19. हमें आखरी बिंदु पर काम करने की जरुरत है. (१० भाषा..)

  20. हमें आखरी बिंदु पर काम करने की जरुरत है. (१० भाषा..)

  21. हमें आखरी बिंदु पर काम करने की जरुरत है. (१० भाषा..)

  22. हमें आखरी बिंदु पर काम करने की जरुरत है. (१० भाषा..)

  23. हमें आखरी बिंदु पर काम करने की जरुरत है. (१० भाषा..)

  24. वाह जी वाह,
    बहुत बढ़िया, ज्ञान-भरी जानकारी दी हैं आपने.
    कहाँ से लाते हैं ऐसी-ऐसी जानकारियाँ????
    बहुत बढ़िया, हार्दिक आभार,
    धन्यवाद.
    http://WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

  25. पाबला जी ,जानकारियातो प्रायः रोचक होती हैं इसी लिए रूचि के साथ दी जाती हैं.विकास शील देश जो हकीकत में जीते हैं हमारे जैसे विकास शील देश उसे सपनों में उतारते हैं कभी कभी ये सपने भारत जैसे विकास शील देश में अपने समूचे अर्थ के साथ नहीं उतर पाते हैं –गरीबी और असमानता के कारन .हमें आशावान रहना चाहिए.हिंदी भाषा का अभी भी इतना पिछड़ना दुखद है.कोई भी भाषा अपने श्रेष्ठ ज्ञान और साहित्य के बल पर अपना स्थान बनाती है.हिंदी वालों को अधिक जिम्मेदार होना होगा.आप को हार्दिक बधाई.

इस लेख पर कुछ टिप्पणी करें, प्रतिक्रिया दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *


टिप्पणीकर्ता की ताज़ा ब्लॉग पोस्ट दिखाएँ
Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
[+] Zaazu Emoticons