कुछ ना कहो… कुछ भी ना कहो

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कुछ ना कहो… कुछ भी ना कहो” पर 15 टिप्पणियाँ

  1. वाह कितने महान बच्चे हे यह, हम तो गुड की शकल ही भुल गये थे अब बनायेगे:)आलू जरुर आलू बुखारे के पेड पर लगता होगा ना:)…. हे राम यह केसी पढाई? कैसा ग्याण?

  2. बड़े दुख की बात है…पाबला जी,

    अक्सर नौकरी के लिए इंटरव्यू लेने वाले लोगो से ऐसे किस्से सुने हैं…बड़ी -बड़ी डिग्रियां लगा रखी हैं,नाम के आगे…. पर सामान्य सा ज्ञान नहीं होता,उन्हें

  3. वाकई महान है ये मैनेजर …
    शुभकामनायें पाबला जी !

  4. अमर उजाला में था तो पत्रकार बनने के इच्छुक अभ्यर्थियों के टेस्ट की कापियां चेक करने का मौका मिला था…उसमें अंग्रेज़ी से हिंदी में अनुवाद का भी प्रश्न था…एक अभ्यर्थी ने round the clock की हिंदी लिखी थी…घड़ी के चारों ओर…

    जय हिंद…

  5. तरस ही आ सकता है इन नो निहालो पर

  6. चीनी तो पले ही छोड़ चुके थे। अब तो गुड़ भी छोड़ना पड़ेगा क्योंकि गुड़ तो चीनी से ही बनता है न। वाकई साधारण ज्ञान का स्तर बढ़ रहा है।

  7. ऐसे लोग बड़े सरकारी ओहदों पर बैठेगें सोच कर ही भविष्य की चिन्ता होती है

  8. क्या कहना है, क्या सुनना है,
    सबको पता है……

  9. समझदार उम्र के कई बच्‍चे मानते हैं कि चावल राईस मिल में बनता है, आजमा कर देख सकते हैं.

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