कौन बनेगा प्रधानमंत्री 2014 में

2014 के लोकसभा चुनाव खत्म हो चुके है. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें जमा हो चुकी है. वोटों की गिनती में कुछ ही घंटे रह गए है. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अपनी रही सही कसर पूरा करने में लगा गए हैं कि नतीजे कैसे रह सकते हैं. इधर मैं यही सोच रहा कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा?

हालाँकि मुझे इस बात में कोई राजनैतिक दिलचस्पी अब नहीं रह गई है कि कौन बनेगा प्रधानमंत्री. पिछले कई प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल देखने के बाद यही समझ आया है कि देश की दिशा केवल आर्थिक मुद्दे ही तय करते हैं और इन आर्थिक मुद्दों का कार्यान्वयन करते हैं अफसर.

सामाजिक राजनैतिक मुद्दे भी अब इन्हीं बातों पर निर्भर हैं कि उद्योगपति इन सब पर कैसी कृपादृष्टि रखते है. कभी एक समय था जब तमाम कथित शोषणों के बाद भी धर्मार्थ कार्य दिखते थे इनके. अब तो क़ानून के डंडे से काम करवाना पड़ रहा है कि अपने लाभं का 2% खर्च करो सामाजिक जिम्मेदारियां निभाते हुए.

खैर, ये तो अंतहीन बहस के मुद्दे है. आज मेरा ध्यान इस ओर गया कि प्रधानमंत्री कौन होगा? तो पिछले दिनों की खबर याद आई कि ज्योतिषियों ने किसी महिला या वृद्ध व्यक्ति के प्रधानमंत्री बनने की बात कही है.

ऐसा ही कुछ 1991 में भी हुआ था. यह वह समय काल था जब देश में आतंकवाद और इससे निपटने वाले टाडा (Terrorist and Disruptive Activities :Prevention: Act -TADA) का जोर था. किसी भी तरह की ‘भयंकर’ भविष्यवाणी करने वाले को आतंक फ़ैलाने के आरोप में ‘पकड़’ लिया जाता था.

मुझे अच्छे से याद है कि राजीव गांधी जी के समय 1991 की उस चुनावी गहमागहमी में मेरी निगाह अखबार के उस हिस्से पर जा पड़ी थी जहॉं शीर्षक था -कौन बनेगा प्रधानमंत्री. उत्सुकता से पढने लगा तो लगभग सभी ज्योतिषियों ने अपनी बात घुमा फिरा कर कुछ ऎसी लिखी थी कि

  • ‘ज़्यादा सीटें पाने के बावजूद भी राजीव गांधी प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे’
  • ‘इस बार कोई गांधी नेहरू परिवार से बाहर का व्यक्ति बनेगा प्रधानमंत्री’
  • ‘कांग्रेस सबसे ज़्यादा सीटें जीतेगी लेकिन राजीव नहीं बन पाएंगे प्रधानमंत्री’
  • ‘इस बार दक्षिण का कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री बनेगा, उत्तर वाला नहीं’
  • ‘कोई वृद्ध बनेगा इस बार प्रधानमंत्री’

प्रधानमंत्री भविष्य

यह सब पढ़ मैं हैरान. अरे यह सब बकवास है. राजीव नहीं बनेंगे प्रधानमंत्री, तो और कौन बनेगा? ये ज्योतिषी लोग भी ना कुछ भी बोल देते हैं और अखबारों को भी पन्ने भरने की कोई भी चीज मिल जाए, डाल देंगे.

लेकिन हुआ क्या? बीच चुनाव राजीव मारे गए एक बम धमाके में. कांग्रेस को मिली 244 सीटें, 70 साल की उमर में नरसिम्हा राव बन गए प्रधानमंत्री और पांच साल राज किया.

आज भी जब भविष्यवाणियों की बात होती है तो मेरे ज़हन में अखबार का वह पन्ना तैरने लग जाता है. उस समय हमारे यहाँ नवभारत, (नव)भास्कर और देशबन्धु आते थे. इतना पुराना अखबार अब ऑनलाइन तो मिलेगा नहीं लेकिन किसी अभिलेखागार को खंगालने दिया जाए तो निश्चित ही वह खबर ढूंढ निकालूँगा.

अब जब तमाम लोग कयास लगा रहे तो मैं मुस्कुराता हूँ कि समय के गर्भ में क्या है कोई नहीं जानता.

आप क्या सोचते हैं? कौन बनेगा प्रधानमंत्री?

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कौन बनेगा प्रधानमंत्री 2014 में” पर 13 टिप्पणियाँ

    • वाकई ,बिलकुल सही कहा आपने चंदर जी-.”बिकाऊ मीडिया के शोर में आजकल निष्पक्ष अवलोकन करने वाले पत्रकार/न्यूज चेनल्स बचे ही नहीं”.

  1. जब देश का विकास अफसर कर रहे हैं तो क्या फर्क पड़ता है कि प्रधानमंत्री कौन है? ये सब मुखौटे होते हैं, शरीर तो कोई और है.

  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (15-05-2014) को बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का { चर्चा – 1613 } (चर्चा मंच 1610) पर भी है।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’

    • :THANK-YOU:
      शुक्रिया रूपचन्द्र जी

  3. बात तो सही है लेकिन इस बार तो हवा के आधार पर चुनाव लड़ा गया है। देखिये क्या होता है वैसे अपने लेख में इस बार की भविष्यवाणी क्या है को शामिल करते तो बहुत बेहतर होता।

    • :Smile:

      मैंने बताया ही है लेख में शिव सागर जी कि

      “…ज्योतिषियों ने किसी महिला या वृद्ध व्यक्ति के प्रधानमंत्री बनने की बात कही है….”

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