क्या ब्लॉगों को विदाई देने का वक्त सचमुच आ गया!?

पिछले दिनों आई एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि 2006 के मुकाबले 2010 में ब्लॉगिंग के प्रति आकर्षण कम हुआ है। हालांकि यह इतनी बुरी खबर नहीं है क्योंकि इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि 34 वर्ष कि आयु से ऊपर वाल़े इस विधा में 2008 के मुकाबले अधिक सक्रिय हुए हैं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक युवा वर्ग का रूझान फेसबुक और ट्विटर की ओर हो गया है। क्योंकि इन्हें माइक्रोब्लॉगिंग से कुछ अधिक माना जाने लगा है सामाजिक मेलजोल के मामले में, जो कि ब्लॉगिंग कथित रूप से नहीं कर पाई। व्यावसायिक समूहों की दृष्टि के मामले में भी ब्लॉगिंग पिछड़ती जा रही है।

इसके अनुसार ब्लॉगिंग व्यापारिक समूहों के लिए एक आकर्षक प्रेस विज्ञप्ति जैसी रह गई है। जबकि फेसबुक आदि कहीं अधिक प्रजातांत्रिक, सामाजिक मेलजोल वाला विकल्प है। एक कारण फेसबुक पर बनाया जा सकने वाला बिजनेस पेज है। क्योंकि वहां ग्राहक के प्रश्नों के उत्तर तुरंत दिए जा सकते हैं, ताज़ा जानकारी दी जा सकती है, आदि आदि। एक ही पृष्ठ होने के कारण उसमें ताजापन व गतिशीलता बनी रहती है, एक जोडी आँखों से इस पर निगाह रखी जा सकती है। जबकि ब्लॉगिंग को यह रिपोर्ट एक च्युंगम करार देती है जिसका एक लेख लिखा जाने के बाद ‘स्वादहीन’ हो जाता है।

यह तो कुछ छोटी छोटी बातें हैं जो मेरी निगाह में आ पाईं, आप चाहें तो 29 पन्नों की पूरी रिपोर्ट पीडीएफ रूप में यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं

इसे देखने के बाद लगा कि मैंने अपना नया प्रयास http://www.blogmanch.com/ सामने ला कर ठीक ही किया है।

मेरा ख्याल है कि अभी ब्लॉगिंग को बहुत आगे जाना है लेकिन आपका क्या कहना है?

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क्या ब्लॉगों को विदाई देने का वक्त सचमुच आ गया!?” पर 14 टिप्पणियाँ

  1. अच्छी जानकारी दी है आपने, आभार !

  2. इसमे कहना क्या है पाबला जी………ब्लोगिंग का भविष्य तो सभी को उज्जवल दिख रहा है अभी तो ब्लोगिंग शैशवावस्था मे है …………कुछ वक्त दीजिये इसे …………ये कोई चलती फ़िरती चीज़ नही है यहाँ समय देना पडता है लगकर काम करना पडता है फिर उसके बाद नतीज़ा हमेशा अच्छा ही आता है अभी तक का तो यही अनुभव रहा है…………ये फ़ेसबुक और ट्विटर से अलग विधा है …………वहाँ भी सिर्फ़ कुछ पलो का ही खेल है फिर सब भूल जाते है जबकि यहाँ के सम्पर्क ज्यादा मूल्यवान और स्थायी हैं तभी प्रिंट मिडिया भी इस तरफ़ आकर्षित हो रहा है और ये इसके महत्त्व की सबसे बडी पहचान है।

  3. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (26.02.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये……"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

  4. निश्चय ही बहुत आगे तक जाना है ।

  5. ब्लॉगिंग का फ़ारमैट ही अलग है फ़ेसबुक और ट्विटर से !फ़ेसबुक मित्रों से संबंध बनाए रखने का बहुत ही अच्छा माध्यम है और ट्विटर खुद के बारे में ताजा जानकारी प्रदान करने का माध्यम है इन दोनों के माध्यम से लिंक्स के द्वारा कहीं और रखी जानकारी भी खूब शेयर की जाती है । तकनीकी तौर पर भी ये एप्लिकेशन लोगों को जोड़ने की दृष्टि से बनाए गए हैं इसलिए इनकी पहुँच दूर-दूर तक है और ये 'फास्ट' हैं । इसलिए जो केवल 'टच' में रहना चाहते है वो या फिर बिज़नेस पेज़ इत्यादि में अपनी कुछ समस्याओं का समाधान चाहते हैं वो फ़ेसबुक / ट्विटर की राह चलेंगे। ये एक तरह से बातचीत करने का माध्यम हैं । चूंकि 2006 के बाद ही फ़ेसबुक / ट्विटर इत्यादि का प्रादुर्भाव या विस्तार हुआ है अतः लोग स्वाभाविक रूप से उधर खिंचते दिखाई देंगे ।इनमें नई पोस्ट आई पुरानी गई ! बहुत पीछे जा भी नहीं सकते ! ब्लॉग स्थायी है सदैव रहता है । ब्लॉग तो फ़ेसबुक और ट्विटर के लिए एक ऑफ-लाइन स्टोर कि तरह भी काम करते हैं । ब्लॉग विचारों ,समाचारों, संस्मरणों , कृतियों एवं भावनाओं का 'कलात्मक'संकलन है जो एक खुली डायरी के रूप हमेशा मौजूद रहता है जब चाहा खोल लिया जहां चाहा पहुँच गए !एक तरह की आत्मकथा !इस तरह का सेल्फ एक्स्प्रेशन एवं अपना प्रेसेंटेशन फ़ेसबुक या ट्विटर में पूरी तरह संभव ही नहीं । हमारे यहाँ ब्लोंगिंग भी शुरुआती दौर में है और मेरा मानना है कि इसका भविष्य खराब नहीं है ।
    अच्छी जानकारी शेयर की है आपने। बहुत बहुत धन्यवाद ।

  6. रजनीश तिवारी जी ने सही बात कह ही दी है. ब्लॉग परमानेंट है, और रहेगा. बिदाई देने वाले कभी सीरियस रहे ही नहीं होंगे. रहा सवाल फेसबुक का तो उससे पहले कोई ओरकुट भी हुआ करता था!

  7. केवल हू-हू हा-हा करने वालों के लिए निश्चय ही ब्लागिंग में ज़्यादा दिन बने रहना मुश्किल ही रहेगा. ब्लाग वही पढ़े जा सकते हैं जिनपर कुछ पढ़ने लायक तो हो.

  8. बहुत अच्छी जानकारी है। धन्यवाद।

  9. यह बात अवश्य है कि युवा वर्ग का रुझान फेसबुक की ओर अधिक हो रहा है लेकिन ब्लॉगर्स का रुझान भी इस ओर कम नहीं है । कई अच्छे अच्छे ब्लॉगर्स फेसबुक पर नज़र आते हैं । लेकिन ब्लॉगिंग एक गम्भीर विधा है इसमे कोई शक नहीं और यह विधा फले फूले इसके लिये प्रयास करना होगा । हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से सचमुच एक दिन ब्लॉगिंग को विदा कहने का वक़्त आ जायेगा । जागो ब्लॉगर्स जागो …- शरद कोकास

  10. नमस्कार पाबला जी
    ब्लागिंग से संबन्धित आपके दो चार लेख कभी कभी मैं " ब्लागर्स प्राब्लम " में आपके सचित्र सलिंक
    प्रकाशित करना चाहता हूँ । यदि आप सहमत हों । तो कृपया इसी टिप्पणी के प्रोफ़ायल से " ब्लागर्स प्राब्लम " ब्लाग पर जाकर अन्य लोगों की तरह अपनी अनुमति रूपी टिप्पणी दें । धन्यवाद ।

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