क्या मसिजीवी में साहस है इसे पढ़ कर उत्तर देने का?

भले ही इधर उधर की पोस्टों में बताया गया हो कि दिल्ली के एक शिक्षण संस्थान में सेवारत विजयेन्द्र सिंह चौहान, मसिजीवी के नामधारी प्रोफाईल के सहारे ब्लॉगिंग करते हैं, किन्तु बिना उनकी किसी आत्मस्वीकृति के, मैं वह कदम नहीं उठाना चाहता जो शून्य में चला जाए।

मसिजीवी नाम के विशेषण वाले प्रोफाईलधारी किसी व्यक्ति की पोस्ट पर जो कुछ लिखा गया है, उससे मुझे कष्ट हुआ है। तत्संबंध में उन्हें एक कानूनी नोटिस भिजवाए जाने की औपचारिक तैयारी की जा चुकी है।

इस पोस्ट के माध्यम से मैं उन्हें, 3 दिनों के भीतर, इसी पोस्ट पर टिप्पणी कर, अपनी पूरी पहचान जाहिर किए जाने का आग्रह करता हूँ, ताकि उन्हें वह नोटिस भिजवाया जा सके।

इस आग्रह की उपेक्षा किए जाने पर, यत्र तत्र दी गई जानकारियों को ही सही मान कर उनके विरूद्ध उचित वैधानिक कदम लिया जायेगा, जिसमें वह व्यक्ति भी शामिल किए जाएँगे, जिनके लेखन से जानकारियाँ एकत्र की गई हैं।

यहाँ टिप्पणी न आने पर इस पोस्ट की सूचना उनके ब्लॉग पर टिप्पणी कर तथा उपलब्ध ईमेल पते पर दी जाएगी।

जिस पोस्ट के संदर्भ में यह आग्रह किया जा रहा है उसका लिंक है : http://masijeevi.blogspot.com/2010/01/blog-post.html

क्या मसिजीवी में साहस है इसे पढ़ कर उत्तर देने का?
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क्या मसिजीवी में साहस है इसे पढ़ कर उत्तर देने का?” पर 34 टिप्पणियाँ

  1. साहस होता जो ये जुर्रत ही क्यों करते!

  2. पावला जी अपनी समझ मे तो कुछ नही आया मगर आपका कदम सही है। अगर कोई इल्जाम लगाता है तो उसे स्पश्ट भी करे। शुभकामनायें

  3. पाबला जी, हिन्दी ब्लॉगजगत में वैमनस्य भला किसे पसंद होगा? "दूध का दूध और पानी का पानी" तो होना ही चाहिये!

  4. ए लो, मैं तो समझा था कि मामला खत्म हो चुका है। पाबला जी काहे मरे हुए मुद्दे को पीटने में लगे हुए हैं? अनूप शुक्ल जी के जवाब और रायपुर ब्लागर मीट के बाद मुझे लगा था कि ये मुद्दा खत्म हो चुका है…।
    कुछ ऐसे ही मिलते-जुलते कारण से पहले अरुण अरोरा जी ने ब्लॉगिंग बन्द की। और लगता है अब मसिजीवी ब्लॉगिंग बन्द कर देंगे।
    ये हो क्या रहा है हिन्दी ब्लॉग जगत में? लगता है अब किसी चिठ्ठे पर टिप्पणी करना भी बन्द करना पड़ेगा, पता नहीं कौन व्यक्ति किस बात पर कानून की व्याख्या करने लगे…

  5. हत्या दो तरह की होती है.एक होती है कोल्ड ब्लडेड मर्डर,सोच समझ कर की गई ह्त्या. और दूसरी होती है एकाएक गुस्से में आ कर की गई या आत्मरक्षा में की गई ह्त्या.
    यही फर्क होता है पोस्ट लिख कर किसी की ऎसी तैसी करने और भड़क कर टिपण्णी करने में.मसिजीवी ने जो कुछ किया है छानबीन कर किया है,ठन्डे दिमाग से किया है,सोच समझ कर किया है.
    सोचा होगा मौज लेते हैं,लेकिन पंगा ले लिया

  6. आपका कदम उचित ही नहीं, आवश्यक भी है

    सच वही जो सर चढ़ के बोले !

    आपकी जय हो !

  7. हुआ क्या पावला जी ? आप जो भी कदम उठायेंगें उचित ही होगा ।

  8. यह कदम सर्वथा उचित है…
    बिना सोचे समझे किसी के चरित्र पर प्रहार कहाँ तक ठीक है…!
    समझाने के बाद भी नहीं माना गया था….
    पाबला जी बिकुल ठीक कर रहे हैं…

  9. आपका कदम सही है।
    सवाल तो जवाब चाहते ही हैं।

  10. पाबला जी कितना हडकंप मचा है आपकी पोस्ट से देख लो. इस पोस्ट को ब्लोगवाणी पर नापसंद करने के लिए लोगों को फोन किए जा रहे हैं.लेकिन सच कहीं छुपेगा क्या

  11. हिंदी ब्लोग जगत के वर्तमान हालातों को देख कर ये मुझे अंदेशा तो था ही कि देर सवेर ये होगा ….मगर अभी हो जाएगा , ये नहीं सोचा था …खैर इससे बहुत सबक मिलने वाला है ……
    अजय कुमार झा

  12. ब्लॉग जगत में ये तो बड़े दुर्भाग्यपूर्ण हालात बनते जा रहे हैं।
    इनसे निपटना भी ज़रूरी है।

  13. मैं इस कदम का समर्थन करता हूँ क्योंकि यह गुटबंदी के खिलाफ लिया गया एक उचित निर्णय है .

  14. पावला जी-बने करे हस। हमन 36गढ वासी आप मन के संगे मा हन। ये मन हमर 36गढिया ब्लागर भाई मन के तरक्की देख नई सकत हे। तेखरे सेती घेरी-बेरी उदिम लगावत हे। ए मन ला अइसने जवाब देय के चाही।

    बने हे

  15. आपके इस कदम से ब्लॉगजगत में हर किसी के खिलाफ कुछ भी लिख देने वाले मनमौजू लोगों पर लगाम लगेगी | इसलिए आपके कदम का स्वागत है आपकी इस कार्यवाही से किसी भी तरह की बकवास लिखने वाले लोगों पर अंकुश लगेगा |

  16. जाने दीजिये.. इस सब से क्या मिलना है सिवा कड़वाहट के.. मोहब्बत और माफ़ी बड़ी चीज़ है..हम लोगों का शगल ब्लागिंग है मुक़दमेबाज़ी नहीं..

  17. चलिए, ब्लॉगर असोसिएशन बन ही रहे हैं. यह नोटिस भेजना उसी का एक्टेंशन है. ट्रेंड भी तो सेट किये जाने चाहिए. ट्रेंड सेट करने के लिए आपको बधाई.

  18. मै शास्त्री जी के विचारो से सहमत हूँ …. ऐसे तत्वों को सबक सिखाना अब बहुत जरुरी गया है .

  19. वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता
    हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम


  20. हम आह भी भरते हैं, तो हो जाते बदनाम !

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