गगन शर्मा जी के पारिवारिक समारोह में जब मुझे पहचाना गया

कुछ दिन पहले सितम्बर की 6 तारीख को ईमेल में कुछ अलग सा वाले गगन शर्मा जी की दो लाईना मेल मिली कि अपना पोस्टल एड्रेस भेजें।

मैंने पता लिख दिया और गुरमुखी में उनसे पूछ भी लिया कि ਕੋਈ ਕੇਕ, ਲ੍ਡੂ-ਸ਼੍ਡ੍ਡੂ ਭੇਜ ਰਹੇ ਜਾਂ ਆਪ ਖੁਦ ਤਸ਼ਰੀਫ ਲਿਆ ਰਹੇ? (कोई केक या लड्डू वगैरह भिजवा रहे या स्वयं ही तशरीफ ला रहे?)। उनके प्रोफाईल को देखा तो छत्तीसगढ़ को शामिल पाया। अंदेशा हुया कि कोई विवाह आदि का निमंत्रण होगा।

बात तब सच हुई जब 19 सितम्बर की दोपहर उनके बड़े बेटे के मंगल परिणय का चमचमाता कार्ड आ पहुँचा। मोबाईल नम्बर लिखा ही था लिफाफे पर। तुरंत लगाया गया उस नम्बर को और गगन जी ने ही उठाया। फिर तो खूब बातें हुईं। लेकिन जब पता लगा कि वे पिछले 15 वर्षों से रायपुर में हैं तो मुझे हैरानी हुई। उन्होंने कभी आभास भी नहीं होने दिया था ब्लॉग की दुनिया पर।

29 सितम्बर की शाम जब यह पक्का हो गया कि भिलाई से कोई अन्य ब्लॉगर नहीं जा रहा तो बिटिया ने बहुत दिनों बाद अपनी फुरसत मिलने की बात कहते हुए साथ चलने की इच्छा जाहिर की। जितना समय हमें भिलाई से रायपुर पहुँचने में लगा, उससे कहीं अधिक समय शहर के एक कोने से दुसरे कोने तक पहुँचने में लग गया। इस बीच अनिल पुसदकर जी ने अपने अस्वस्थ होने की सूचना दी तथा गगन जी से बात करवाने का आग्रह किया।
लम्बे चौड़े लॉन में चल रहे समारोह में किसी परिचित के होने की संभावना कम ही थी। आँखें तलाश रहीं थी गगन जी को। एक चक्कर लगा लिया, कोई चेहरा परिचित न दिखा। गगन जी से मोबाईल पर सम्पर्क करने की कोशिश की, असफल रहा। एकाएक सामने किसी से बतियाते गगन जी दिखे आँखें चार हुई, दोनों ही आगे बढ़े और गले लिपट गये एक दूसरे से।
मंच पर हमें घुट घुट कर बातें करते देख रहीं श्रीमती शर्मा पर निगाह पड़ी जो नज़रों में उत्सुकता और प्रश्न भाव लिए हम दोनों की ओर देख रहीं थीं। गगन जी ने परिचय करवाते हुए शुरूआत की “ये पाबला जी …” श्रीमती शर्मा, गगन जी की बात पूरी होने के पहले ही खुशी मिश्रित आश्चर्य भरे भाव में चहक पड़ीं ” पाबला जी!? वो ब्लॉग वाले?” अनुमोदन मिलते ही ब्लॉगिंग को ले दोनों, पति पत्नी, ने क्षण भर में चुटीली बातों का आदान प्रदान कर लिया।
जिन ब्लॉगरों ने गगन जी से बात करवा देने का आग्रह किया था, उनकी बात, मौका देख कर गगन जी से करावाते रहा। गगन जी ने कई बार सुरेश चिपलूनकर जी का नाम लिया और दुर्भाग्यवश सुरेश जी का नम्बर मेरे पास नहीं था।

भोजनोपरांत कुछ मिनट के लिए बेहद व्यस्त गगन शर्मा जी से मीठी मीठी बातें हुईं और हम लौट आए हिंदी ब्लॉग परिवार के एक सदस्य की खुशी में शामिल हो कर।

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गगन शर्मा जी के पारिवारिक समारोह में जब मुझे पहचाना गया” पर 21 टिप्पणियाँ

  1. आप की बदौलत हम भी गगन जी को उसी समय बधाई दे सके जब आप समारोह में थे। गगन जी को एक बार फ़िर से बहुत बहुत बधाई और आप का धन्यवाद

  2. गगन शर्मा जी को मेरी तरफ से भी बधाई. यह जानकर हर्ष हुआ कि अपका सामाजिक क्षेत्र इतना बढ़ता जा रहा है…आपको भी बधाई.

  3. आप सवा लाख मे एक हो इसलिए पहचाने जाते हो,
    सवा लख ते एक लडाऊ………………………
    धन्यवाद,

  4. कभी-कभी इच्छा पूरी ना होने की कसक रह जाती है। घर दूर होने की वजह से आपको "प्भाजी" न दे पाने का सदा खेद रहेगा।

    एक और त्रुटि रह गयी। सोचा था, अनीताजी को और द्विवेदीजी को जरा हल्का हो आराम से बात कर फिर धन्यवाद दूंगा पर, पर मेहमानों की अभी सादर विदाई नहीं हो पाने की वजह से देरी के लिए क्षमा चाहता हूं। पर जितना प्रेम और स्नेह मिला है, अभिभूत हूं।

  5. ललितजी,
    आपकी तथा पाबलाजी की आज्ञा ले कर जरा संशोधन करना चाहता हूं,
    यहां सवा लाख से एक लड़ाऊं की जगह "सवा लाख को गले लगाऊं करना चाहूंगा" (-:

  6. गगन शर्मा जी को बहुत-बहुत बधाई और उनके साथ आपको भी बहुत-बहुत बधाई

  7. wah , ye to badi achchi bat hui.

    suresh chiplunkar ji ka no nai tha to hame phunwa laga lena tha fauran, hamse le lete na ji.

    accha laga.

  8. पाबला जी, पहले टीवी पर एक विज्ञापन आया करता था…
    लाइफब्वॉय है जहां, तंदरूस्ती है वहां…
    मैंने इसमें बदलाव कर दिलाया है…
    पाबला जी हैं जहां, सारे ब्लॉगर्स हैं वहां…

    गगन जी, आपको एक बार फिर बहुत बहुत बधाई और नवदंपत्ति के मंगल जीवन के लिए शुभ कामनाएं…

    लेकिन गगन जी एक शिकायत भी है आपसे…पाबला जी ठहरे हमारे सज्जन आदमी…एक तो विवाह समारोह में उन्होंने हम सारे ब्लॉगर्स की तरफ से एक एक रसगुल्ला पहले ही चख लिया है…अभी आपकी तरफ से उनके लिए भाजी की कसर और रह गई…कुछ तो शुगर-वुगर का भी ख्याल रखिए..हां, एक बात और दुनिया की लाख मिठाइयां एक तरफ़ और पाबला जी के मीठे बोल दूसरी तरफ़…मेरा दावा है पाबला जी ही भारी पड़ेंगे…

  9. गगन शर्मा जी आप को बधाई ओर बच्चो को आशिर्वाद तो हम पहले ही दे चुके है, लेकिन आप को एक बार फ़िर से बधाई, अब मिठाई( भाजी)जल्द से जल्द भेजने का इंतजाम करे पंजाबियो मै बडी बडी मठिट्या ओर शक्कर पारे , जलेबिया, ओर मोटी मोटी सेविया होती है, क्या आज भी ऎसा ही है या हम भी बदल गये, पावला जी आप का लेख बहुत ही प्यार भरा लगा, आप के गये तो लगा हम सब पहुच गये, चित्र बहुत सुंदर लगा.आप का धन्यवाद,
    अजी चित्र देख लिये मुंह मिठ्ठा हो गया, मिठाई भेजने का कष्ट ना करे, मेने तो मजाक मै लिखा है

  10. गगन शर्मा जी को बहुत-बहुत बधाई और उनके साथ आपको भी बहुत-बहुत बधाई |

  11. गगंजी को बधाई और आप तो सेलिब्रिटी हो सरजी 🙂 हम भी मिलते हैं आप से ३१ अक्टूबर को !

  12. मै बहुत चाहकर भी पाबला जी के साथ नही जा सका एक मित्र के परिवार जनो की चिकित्सा मे व्यस्तता के कारण लेकिन पाबला जी से शुभकामनाये भिजवा दी और यह तस्वीर भी देख ली ,पुन: गगन जी को बधाई , पाबला जी के साथ दूसरी बार मे तो आयेंगे ही । और पाबला जी को धन्यवाद के साथ यह सूचना कि अभी तो बहुत सी शादियों में भंगड़ा करना है ..।

  13. हान्जी-शर्मा जी आपने सही समय सही सुधार किया, बडे बुजुर्गो से यही सीखने मिलता है,धन्यवाद,

  14. वाह जी वाह, बल्ले बल्ले —बहुत बढ़िया किया।

  15. What a Touchy Moment!

    शायद यही है ब्लॉगिंग के बदलते आयाम ( dimensions) जो कि परिचय की प्रगाढता में सहायक हो रहे हैं।

    बहुत बढिया।

  16. पाब्ला जी अभी तक़ ठीक नही हुई है तबियत,वर्ना हम भी शामिल रहते गगन जी की खुशियों मे।

  17. गगन शर्मा जी को बधाई तो हम दे चुके। अब अगली बधाई तब देंगे जब हमारे रायपुर पहुँचने पर वे मिठाई खिलाएंगे। और हाँ, सिख तो एक ही सवा लाख के बराबर होता है. एक मिठाई खाए तो सवा लाख को खिलाने का अनुभव होता है।

  18. वाह इसे कहते हैं आम के आम गुठलियों के दाम…गगन जी की खुशी मे शामिल भी हुए और ब्लोग्गर के गले भी लगे….कमाल है…यही तो है वो रिशते जो बन जाते हैं…

  19. पावला जी,आज आपकी,पोस्ट पड़ी,बहुत आत्मियता से लिखी,हुई थी ।

  20. आप समाचार पत्र में ब्लॉग की प्रकाशित पोस्टों की सूचना ब्लोगर तक पहुंचाने के साथ साथ उनके व्यक्तिगत समारोहों में शामिल होकर भी उनकी खुशी बढ़ा रहे हैं.

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